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हरिद्वार की सड़कों पर ‘ऑपरेशन ई-रिक्शा’ का असर! 2000 से ज्यादा वाहन सत्यापित, नई खरीद पर लगा ब्रेक,, कभी 100 से ज्यादा नए ई-रिक्शा का होता था रजिस्ट्रेशन, अब आंकड़ा 10-15 पर सिमटा—एआरटीओ निखिल शर्मा बोले, अभियान का दिख रहा लॉन्ग टर्म इफेक्ट,, दूसरी तरफ सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए बड़ी राहत—7 दिन तक ₹1.50 लाख का कैशलेस इलाज, बीमित और अनबीमित वाहन दोनों के लिए व्यवस्था

हरिद्वार की सड़कों पर ‘ऑपरेशन ई-रिक्शा’ का असर! 2000 से ज्यादा वाहन सत्यापित, नई खरीद पर लगा ब्रेक,,

कभी 100 से ज्यादा नए ई-रिक्शा का होता था रजिस्ट्रेशन, अब आंकड़ा 10-15 पर सिमटा—एआरटीओ निखिल शर्मा बोले, अभियान का दिख रहा लॉन्ग टर्म इफेक्ट,,

दूसरी तरफ सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए बड़ी राहत—7 दिन तक ₹1.50 लाख का कैशलेस इलाज, बीमित और अनबीमित वाहन दोनों के लिए व्यवस्था

हरिद्वार… हरिद्वार की सड़कों पर दौड़ते हजारों ई-रिक्शा… बढ़ती संख्या से बिगड़ता ट्रैफिक… नियमों की अनदेखी और लगातार बढ़ता दबाव। लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। परिवहन विभाग के अभियान ने ई-रिक्शा व्यवस्था पर ऐसा शिकंजा कसा है कि इसका असर अब नई ई-रिक्शा की बिक्री और रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है।

2000 से ज्यादा ई-रिक्शा का सत्यापन पूरा हो चुका है। वहीं सबसे बड़ा संकेत यह है कि नई ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां नए ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 100 से ज्यादा तक पहुंच जाता था, अब यह घटकर लगभग 10 से 15 के बीच रह गया है।

यानी सड़क पर नई ई-रिक्शा की एंट्री पर ब्रेक लगने लगा है और विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में ई-रिक्शा की संख्या धीरे-धीरे नियंत्रित होगी।

‘2000 पार’ सत्यापन… अब अगला निशाना नियम तोड़ने वाले वाहन!

एआरटीओ प्रशासन हरिद्वार निखिल शर्मा ने बताया कि ई-रिक्शा के सत्यापन की कार्रवाई लगातार जारी है। अब तक 2000 से अधिक ई-रिक्शा सत्यापित किए जा चुके हैं। विभाग की ओर से केवल सत्यापन ही नहीं, बल्कि लगातार प्रवर्तन कार्रवाई भी की जा रही है।

निखिल शर्मा के मुताबिक अभियान का असर तत्काल कार्रवाई से कहीं आगे दिखाई देगा। नई ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन में जिस तरह से गिरावट आई है, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित होगी और उनकी जगह अन्य प्रकार के व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन साधनों को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि जिन ई-रिक्शा संचालकों ने अभी तक अपना सत्यापन नहीं कराया है, वे जल्द से जल्द सत्यापन करा लें। ऐसा नहीं करने पर भविष्य में विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान चालानी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

100 से सीधे 10-15! आंकड़ों ने खोल दी अभियान के असर की तस्वीर

परिवहन विभाग के आंकड़े इस पूरे अभियान की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। कभी एक बड़ी संख्या में नई ई-रिक्शा का पंजीकरण होता था। अब यह संख्या बेहद कम रह गई है।

100 से ज्यादा नए रजिस्ट्रेशन… और अब सिर्फ 10 से 15!

विभाग इसे अभियान के प्रभाव का बड़ा संकेत मान रहा है। अधिकारियों का मानना है कि अगर इसी तरह सत्यापन और प्रवर्तन की कार्रवाई आगे भी जारी रही तो ई-रिक्शा की अनियंत्रित बढ़ती संख्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।

हादसा हुआ तो इलाज के लिए नहीं भटकना पड़ेगा—₹1.50 लाख तक कैशलेस इलाज

इसी बीच सड़क हादसों को लेकर परिवहन विभाग ने आम लोगों को बड़ी राहत वाली योजना की जानकारी दी है। दुर्घटना होने की स्थिति में पात्र पीड़ित को शुरुआती सात दिनों तक ₹1.50 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

एआरटीओ निखिल शर्मा ने बताया कि योजना की ऑनलाइन प्रक्रिया वर्तमान में फंक्शनल है और इसका लाभ मिलना शुरू हो चुका है।

अगर दुर्घटना बीमित वाहन से हुई है तो संबंधित बीमा कंपनी के माध्यम से क्लेम की प्रक्रिया के तहत पीड़ित को लाभ मिलेगा। वहीं अगर दुर्घटना अनबीमित वाहन से होती है तो इसके लिए जिला स्तर पर बनाए गए खाते के माध्यम से अस्पतालों को उपचार की राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

इसका मतलब साफ है—सड़क हादसे के बाद शुरुआती इलाज के लिए आर्थिक संकट से जूझ रहे पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत मिल सकती है।

‘चालान से पहले खुद संभल जाएं’—एआरटीओ की सख्त अपील

निखिल शर्मा ने वाहन चालकों को सिर्फ चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि सड़क सुरक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में लेने की अपील भी की।

उन्होंने कहा कि विभाग नियमों का पालन कराने के लिए लगातार इंफोर्समेंट अभियान चला रहा है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बेहतर यही है कि लोग कार्रवाई का इंतजार न करें और खुद यातायात नियमों का पालन करें।

बिना हेलमेट बाइक चलाना हो, शराब पीकर ड्राइविंग करना हो या नियमों के विरुद्ध वाहन चलाना—एक छोटी सी लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि सड़क पर वाहन चलाते समय अपनी सुरक्षा के साथ-साथ दूसरे लोगों की जिंदगी की जिम्मेदारी भी समझनी होगी।

हरिद्वार की सड़कों पर परिवहन विभाग का यह अभियान अब सिर्फ चालान और सीज करने तक सीमित नहीं दिख रहा। 2000 से ज्यादा ई-रिक्शा का सत्यापन, नई ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन में भारी गिरावट और लगातार प्रवर्तन कार्रवाई इस बात का संकेत दे रही है कि विभाग शहर की परिवहन व्यवस्था को धीरे-धीरे नए ढांचे में लाने की तैयारी में है।

अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह अभियान हरिद्वार की सड़कों पर ई-रिक्शा व्यवस्था को कितना बदल पाता है और क्या नई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था वास्तव में इस बढ़ते दबाव का विकल्प बन पाती है।

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