जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के बड़े बदलाव पर अपडेट! 1 अक्टूबर से बदलेंगे नियम….. देरी हुई तो बढ़ेगी जांच और मंजूरी की ‘सीढ़ी’, दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी

जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के बड़े बदलाव पर अपडेट! 1 अक्टूबर से बदलेंगे नियम…..
देरी हुई तो बढ़ेगी जांच और मंजूरी की ‘सीढ़ी’, दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी

देहरादून। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर कराना अब और भी जरूरी हो जाएगा। 1 अक्टूबर 2026 से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण से जुड़े संशोधित प्रावधान लागू होने जा रहे हैं। नए नियमों में देरी से पंजीकरण कराने वाले मामलों के लिए अलग-अलग स्तर की जांच और मंजूरी का प्रावधान किया गया है।
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार 30 दिन के बाद लेकिन एक वर्ष के भीतर जन्म या मृत्यु की सूचना देने पर जिला रजिस्ट्रार या अधिकृत प्राधिकारी की लिखित अनुमति की जरूरत होती है। वहीं एक वर्ष से अधिक देरी वाले मामलों में जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी या जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकता है।
अब दो साल की देरी का भी अलग प्रावधान होगा। संशोधित कानून के तहत जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर देने पर संबंधित जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मंजूरी और रिकॉर्ड की सत्यता का सत्यापन जरूरी होगा।
वहीं दो वर्ष से अधिक पुराने मामले और अधिक सख्त प्रक्रिया के दायरे में आएंगे। ऐसे मामलों में पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। इसके साथ ही संबंधित जानकारी की सत्यता की जांच और निर्धारित शुल्क की प्रक्रिया भी लागू रहेगी।
क्यों जरूरी है समय पर पंजीकरण?
जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र अब केवल एक सामान्य दस्तावेज नहीं रह गए हैं। जन्म प्रमाणपत्र का इस्तेमाल शिक्षा में प्रवेश, मतदाता सूची, सरकारी नियुक्ति, पासपोर्ट, आधार सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है। केंद्र सरकार के संशोधित प्रावधानों का उद्देश्य जन्म-मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक सटीक, विश्वसनीय और डिजिटल रूप से व्यवस्थित करना है।
ऐसे में लोगों के लिए जरूरी है कि जन्म या मृत्यु की घटना होने के बाद उसका पंजीकरण निर्धारित समयसीमा में करा लिया जाए। देरी होने पर दस्तावेजी जांच और उच्च स्तर की मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
यानी अब संदेश साफ है—जन्म हो या मृत्यु, पंजीकरण में देरी न करें; वरना प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया ज्यादा लंबी और जांच आधारित हो सकती है।



