मान्यता नहीं तो मदरसा होगा सील! डॉ. सुरजीत सिंह गांधी की अगुवाई में बहादराबाद में औचक निरीक्षण, एक सप्ताह की मोहलत,, शिक्षा विभाग की मान्यता मिली, लेकिन प्राधिकरण की मान्यता गायब! धार्मिक शिक्षा पर रोक नहीं, मगर नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं; 452 मदरसों का तैयार हो रहा रिपोर्ट कार्ड
फिलहाल डॉ. सुरजीत सिंह गांधी की सख्ती से संदेश साफ है—धार्मिक शिक्षा चलेगी, लेकिन नियमों के दायरे में; बच्चों की शिक्षा होगी, लेकिन मुख्यधारा से जुड़ाव भी जरूरी होगा। और मान्यता के बिना संचालन हुआ तो कार्रवाई भी तय है।

मान्यता नहीं तो मदरसा होगा सील! डॉ. सुरजीत सिंह गांधी की अगुवाई में बहादराबाद में औचक निरीक्षण, एक सप्ताह की मोहलत,,
शिक्षा विभाग की मान्यता मिली, लेकिन प्राधिकरण की मान्यता गायब! धार्मिक शिक्षा पर रोक नहीं, मगर नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं; 452 मदरसों का तैयार हो रहा रिपोर्ट कार्ड

इन्तजार रजा हरिद्वार 24 सितंबर। उत्तराखंड में मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था को लेकर अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। हरिद्वार के बहादराबाद ब्लॉक में गुरुवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी अचानक मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के निरीक्षण के लिए पहुंच गए।
निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा। संस्थानों की मान्यता, संचालन और बच्चों की शिक्षा से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई। जांच के दौरान दो संस्थानों में ऐसी स्थिति सामने आई, जहां शिक्षा विभाग की मान्यता तो मिली हुई थी, लेकिन अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की मान्यता नहीं थी। दोनों संस्थानों में धार्मिक शिक्षा संचालित किए जाने के चलते प्राधिकरण ने तत्काल आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। प्राधिकरण अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने साफ कर दिया कि बिना मान्यता धार्मिक शिक्षा का संचालन स्वीकार नहीं किया जाएगा। संबंधित संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक मान्यता प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। नियमों का पालन नहीं हुआ तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
औचक निरीक्षण में खुली मान्यता की तस्वीर
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी की अगुवाई में हुई कार्रवाई के दौरान मदरसा इस्लामिया तालीमुल कुरान, भारापुर भोरी रुड़की तथा फलाहे दारैन मॉडर्न स्कूल, भोरी रुड़की की स्थिति की जांच की गई। निरीक्षण में दोनों संस्थानों के पास शिक्षा विभाग की मान्यता पाई गई, लेकिन अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता नहीं थी। दोनों जगह धार्मिक शिक्षा संचालित किए जाने के मद्देनजर प्राधिकरण ने संचालकों को आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया के तहत मान्यता प्राप्त करने के निर्देश दिए।
संदेश स्पष्ट था—जिस संस्थान में धार्मिक शिक्षा संचालित हो रही है, उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राधिकरण की मान्यता भी लेनी होगी।
एक सप्ताह की मोहलत, फिर सख्ती
प्राधिकरण ने संबंधित संस्थानों को सुधार और मान्यता प्रक्रिया के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। अब गेंद पूरी तरह संस्थान संचालकों के पाले में है। निर्धारित अवधि में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसा नहीं हुआ तो नियमानुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यानी बहादराबाद के निरीक्षण से यह साफ हो गया कि आने वाले दिनों में सिर्फ कागजों पर मान्यता होना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। संस्थान किस उद्देश्य से संचालित हो रहा है और वहां किस प्रकार की शिक्षा दी जा रही है, इसकी भी पड़ताल होगी।
डॉ. गांधी की दो टूक—धार्मिक शिक्षा पर रोक नहीं
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण की कार्रवाई किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा पर रोक नहीं है, लेकिन उसे निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप संचालित करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाए। डॉ. गांधी के मुताबिक प्राधिकरण की प्राथमिकता बच्चों के शैक्षिक हितों की रक्षा करना और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना है।
भारापुर भौंरी, बढ़ेगी गढ़मीरपुर और दादूपुर गोविंदपुर , सलेमपुर में भी हुई जांच
निरीक्षण का दायरा केवल दो संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। गढ़मीरपुर और दादूपुर गोविंदपुर क्षेत्र के अन्य मदरसों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।इस दौरान बंद हो चुके संस्थानों में अध्ययनरत बच्चों की स्थिति की जानकारी भी ली गई। खास तौर पर यह देखा गया कि वहां पढ़ने वाले बच्चों को दूसरे मान्यता प्राप्त विद्यालयों या मदरसों में स्थानांतरित किया गया है या नहीं।प्राधिकरण का फोकस साफ है—किसी भी कार्रवाई का असर बच्चों की पढ़ाई पर नहीं पड़ना चाहिए।
एक संस्था ने खुद सरेंडर की मान्यता
निरीक्षण के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि एक संस्था ने अपनी मान्यता स्वेच्छा से सरेंडर कर दी है, जबकि एक अन्य संस्था ने शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन किया है।प्राधिकरण का कहना है कि संस्थानों की स्थिति के अनुसार नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

मकतब भी अब निगरानी के दायरे में
मदरसों के साथ-साथ ऐसे मकतब और धार्मिक शिक्षण संस्थान भी प्राधिकरण की निगरानी के दायरे में हैं, जहां बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही है।प्राधिकरण यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ मुख्यधारा की शिक्षा भी मिले और संस्थान निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हों।यानी अब निगरानी का दायरा सिर्फ बड़े मदरसों तक सीमित नहीं रहेगा। जहां भी संगठित रूप से शिक्षा दी जा रही है, वहां मान्यता और नियमों के पालन को लेकर जांच हो सकती है।
452 मदरसों का बन रहा रिपोर्ट कार्ड
उत्तराखंड में मदरसों की स्थिति को लेकर व्यापक स्तर पर प्रक्रिया जारी है। प्रदेश के 452 मदरसों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है।इसमें संस्थानों की मान्यता, संचालन और विद्यार्थियों की शिक्षा से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।प्राधिकरण की इस कवायद का उद्देश्य संस्थानों की वास्तविक स्थिति सामने लाना और शिक्षा व्यवस्था को निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थित करना बताया गया है।
200 आवेदन पहुंचे, 35 को मान्यता
मान्यता प्रक्रिया को लेकर भी प्राधिकरण ने आंकड़े साझा किए हैं। इन्वेस्टमेंट पोर्टल पर करीब 200 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 35 संस्थानों को मान्यता मिल चुकी है।बाकी आवेदनों की जांच और प्रक्रिया जारी है। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को नियमानुसार मान्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
“नई पहचान, नया सम्मान” के साथ आधुनिक शिक्षा पर जोर
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि “नई पहचान, नया सम्मान” की भावना के साथ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक-सक्षम शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।उन्होंने कहा कि आज का बच्चा ही भविष्य के उत्तराखंड का निर्माण करेगा। इसलिए शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो बच्चों को समय की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर दे।
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कार्रवाई संस्था के खिलाफ नहीं, बच्चों के भविष्य के लिए—डॉ. गांधी
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि प्राधिकरण की कार्रवाई किसी संस्था या समुदाय के विरुद्ध नहीं है। इसका उद्देश्य बच्चों के शैक्षिक अधिकार, संस्थानों की जवाबदेही और उनके बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करना है।उन्होंने साफ किया कि नियमों के दायरे में रहकर संचालित होने वाले संस्थानों को लेकर प्राधिकरण का रुख सकारात्मक रहेगा, लेकिन बिना आवश्यक मान्यता के धार्मिक शिक्षा संचालित करने वाले संस्थानों को नियमों के अनुरूप आना ही होगा।
बहादराबाद से पूरे प्रदेश में गया सख्त संदेश
बहादराबाद में हुए इस औचक निरीक्षण ने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड में मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता और संचालन को लेकर निगरानी अब और तेज होगी।एक तरफ 452 मदरसों का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो रहा है, दूसरी तरफ करीब 200 आवेदन प्रक्रिया में हैं और 35 संस्थानों को मान्यता मिल चुकी है। वहीं बहादराबाद में सामने आए मामलों में संबंधित संस्थानों को एक सप्ताह की मोहलत दी गई है।अब अगली नजर इस बात पर होगी कि संबंधित संस्थान निर्धारित समय के भीतर आवश्यक मान्यता प्रक्रिया पूरी करते हैं या नहीं।
फिलहाल डॉ. सुरजीत सिंह गांधी की अगुवाई में हुई कार्रवाई ने संदेश साफ कर दिया है—धार्मिक शिक्षा पर रोक नहीं, लेकिन नियमों से समझौता भी नहीं। बच्चों को शिक्षा मिलेगी, लेकिन शिक्षा व्यवस्था निर्धारित मानकों के भीतर होगी। और जहां नियमों का पालन नहीं होगा, वहां प्राधिकरण कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।



