दो साल से धूल फांक रहे ‘खुर्रे’ के मामले! दाखिल-खारिज में देरी पर मंडलायुक्त दीपक रावत सख्त,, पटवारियों से तहसीलदार तक मांगा स्पष्टीकरण, धारा-143 के मामलों को 10 दिन में निपटाने के निर्देश

दो साल से धूल फांक रहे ‘खुर्रे’ के मामले! दाखिल-खारिज में देरी पर मंडलायुक्त दीपक रावत सख्त,,
पटवारियों से तहसीलदार तक मांगा स्पष्टीकरण, धारा-143 के मामलों को 10 दिन में निपटाने के निर्देश

रामनगर। तहसील कार्यालय रामनगर के निरीक्षण में लंबे समय से लंबित राजस्व मामलों की फाइलें खुलीं तो मंडलायुक्त कुमाऊं दीपक रावत का रुख सख्त नजर आया। न्यायालयीन वादों, दाखिल-खारिज, धारा-143 और आमजन से जुड़े अन्य राजस्व प्रकरणों की समीक्षा के दौरान उन्होंने अधिकारियों को लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए।
सबसे ज्यादा नाराजगी दाखिल-खारिज की पत्रावलियों के 35वें दिन निरस्त होने के मामलों को लेकर सामने आई। मंडलायुक्त ने इस संबंध में तहसीलदार से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज के मामलों का नियमानुसार परीक्षण कर निर्धारित समयसीमा में निस्तारण किया जाए।
वहीं दो वर्ष से अधिक समय से लंबित ‘खुर्रे’ से जुड़े मामलों की समीक्षा में मंडलायुक्त ने संबंधित पटवारियों से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। उन्होंने उप जिलाधिकारी को तहसील स्तर पर लंबित सभी प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा।
धारा-143 के लंबित मामलों पर भी एक्शन, मंडलायुक्त ने सभी प्रकरणों का नियमानुसार 10 दिन के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों में पारदर्शिता, नियमबद्धता और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाए।
न्यायालय में लंबित वादों की समीक्षा के दौरान उन्होंने नियमित सुनवाई और नियमानुसार समय पर निर्णय लेने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि लंबित प्रकरणों की लगातार समीक्षा हो, ताकि आम लोगों को अपने मामलों के लिए अनावश्यक रूप से तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें।
निरीक्षण के दौरान अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने भी मंडलायुक्त से मुलाकात की। अधिवक्ताओं ने तहसील में अहलमद की तैनाती की मांग रखी, जिस पर मंडलायुक्त ने प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने अधिवक्ताओं से म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में आमजन को जागरूक करने में सहयोग की अपील की।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान, तहसीलदार मनीषा मकराना समेत तहसील के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
अब सवाल जवाबदेही का…
वर्षों से लंबित मामलों पर मंडलायुक्त की सख्ती के बाद संबंधित पटवारियों और अधिकारियों से मांगे गए स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण हो गए हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि वर्षों से लंबित फाइलें कब तक आगे बढ़ती हैं और जिम्मेदारी तय होने के बाद कार्रवाई कितनी तेज होती है।



