धामी का अफसरों पर सियासी शिकंजा! टूटी सड़कें बनीं सरकार की साख का सवाल, लापरवाही पर कार्रवाई का अल्टीमेटम…एक नवंबर की डेडलाइन, बहानेबाजी पर ब्रेक!….. चार घंटे की मैराथन बैठक से धामी ने दिया सख्त संदेश—अब फाइलों का विकास नहीं, जमीन पर दिखाना होगा काम; एक नवंबर तक खोदी गई सड़कें दुरुस्त करने की डेडलाइन, कुंभ-2027 और कानून-व्यवस्था पर भी सरकार का फोकस

धामी का अफसरों पर सियासी शिकंजा! टूटी सड़कें बनीं सरकार की साख का सवाल, लापरवाही पर कार्रवाई का अल्टीमेटम…एक नवंबर की डेडलाइन, बहानेबाजी पर ब्रेक!…..
चार घंटे की मैराथन बैठक से धामी ने दिया सख्त संदेश—अब फाइलों का विकास नहीं, जमीन पर दिखाना होगा काम; एक नवंबर तक खोदी गई सड़कें दुरुस्त करने की डेडलाइन, कुंभ-2027 और कानून-व्यवस्था पर भी सरकार का फोकस
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर प्रशासनिक मशीनरी को सख्त संदेश दिया है। मुख्यमंत्री आवास पर देर रात तक चली करीब चार घंटे की मैराथन बैठक को केवल समीक्षा बैठक नहीं, बल्कि अफसरशाही की जवाबदेही तय करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। विकास कार्यों में देरी, सड़कों की बदहाली, कानून-व्यवस्था और जनसमस्याओं के समाधान जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री का कड़ा रुख साफ संकेत दे रहा है कि सरकार अब अपनी कार्यशैली को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं चाहती।प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के सामने धामी ने स्पष्ट कर दिया कि सरकारी योजनाओं की सफलता कागजों पर तैयार रिपोर्टों से नहीं, बल्कि जनता को मिलने वाली सुविधाओं से तय होगी। राजनीतिक नजरिये से देखें तो यह बैठक सरकार की प्रशासनिक साख मजबूत करने और जनता के बीच जवाबदेह शासन का संदेश देने की कोशिश भी है।
सड़कें बनीं सरकार की साख का इम्तिहान!
उत्तराखंड में टूटी सड़कों और जगह-जगह खुदाई से परेशान जनता की शिकायतों के बीच मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को खुद मैदान में उतरने के निर्देश दिए। गड्ढामुक्त सड़क अभियान को तेज करने और लंबित मरम्मत कार्य समय पर पूरा करने को कहा गया।धामी ने संकेत दिया कि वह स्वयं सड़क मार्ग से प्रदेश का दौरा करेंगे। ऐसे में सड़कों की वास्तविक स्थिति अधिकारियों के दावों की परीक्षा बन सकती है। यदि निरीक्षण के दौरान खामियां मिलीं तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।यह संदेश राजनीतिक रूप से भी अहम है। सड़क, बिजली, पानी और सफाई जैसे मुद्दे सीधे आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े हैं। इन मोर्चों पर लापरवाही का असर सरकार की छवि पर पड़ता है। ऐसे में मुख्यमंत्री का सख्त रुख प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ सरकार की जनविश्वास संबंधी चुनौती से भी जुड़ा है।
एक नवंबर की डेडलाइन, बहानेबाजी पर ब्रेक!
सीवर और पेयजल पाइपलाइन के नाम पर खोदी गई सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को एक नवंबर तक काम पूरा करने और सड़कों की मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। त्योहारों के दौरान बाजारों और रिहायशी इलाकों में लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए सफाई और आवागमन की व्यवस्था दुरुस्त रखने पर भी जोर दिया गया।सरकार के सामने चुनौती अब इस समयसीमा को धरातल पर लागू कराने की है। विभागों के बीच तालमेल की कमी या ठेकेदारों की लापरवाही से यदि सड़कें अधूरी रहती हैं, तो जनता के सवालों का सामना प्रशासन को करना पड़ेगा।
अफसरशाही को संदेश—काम करो या जवाब दो!
बैठक में राजस्व मामलों के समयबद्ध निस्तारण, जिला योजना के कार्यों को गति देने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की निगरानी पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पटवारी और तहसीलदार अपने स्तर पर नियमानुसार मामलों का निस्तारण करें, ताकि आम नागरिकों को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।प्रभारी सचिवों को हर 15 दिन में आवंटित जिलों का दौरा कर विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए। इस व्यवस्था का उद्देश्य राजधानी में बैठकर मिलने वाली रिपोर्टों के बजाय जिलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है।धामी का संदेश साफ है—ईमानदारी और तत्परता से काम करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कानून-व्यवस्था पर भी सरकार का कड़ा रुख
अपराध नियंत्रण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने संज्ञेय अपराधों में नियमानुसार तत्काल एफआईआर दर्ज करने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नवरात्र और दीपावली को देखते हुए सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ धार्मिक स्थलों, पर्यटन क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने की बात कही गई। ऑपरेशन कालनेमि और सत्यापन अभियानों को भी आगामी त्योहारों तथा कुंभ-2027 की तैयारियों के अनुरूप प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।राजनीतिक दृष्टि से कानून-व्यवस्था सरकार के लिए अहम मुद्दा है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को जवाबदेह बनाने की कोशिश का सीधा संबंध जनता में सुरक्षा के भरोसे को मजबूत करने से है।
कुंभ-2027: तैयारी में चूक हुई तो बढ़ेंगी मुश्किलें
हरिद्वार कुंभ-2027 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए। यातायात, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की तैयारियों को समय रहते आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।इसके साथ ही मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों के लिए अग्रिम ट्रैफिक प्लान तैयार करने को कहा गया। सरकार की कोशिश है कि पर्यटन सीजन और धार्मिक आयोजनों के दौरान जाम तथा अव्यवस्था की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
सियासी संदेश साफ—जवाबदेही से ही बनेगी सरकार की साख
आपदा प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने, पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और आबादी के आसपास वन्यजीवों से होने वाली घटनाओं पर नियंत्रण के लिए भी अधिकारियों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए।
कुल मिलाकर, धामी की इस मैराथन बैठक का राजनीतिक संदेश स्पष्ट है—सरकार विकास और सुशासन के दावों को जमीन पर साबित करना चाहती है। सड़कों की मरम्मत के लिए तय समयसीमा, जिलों के नियमित निरीक्षण और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई के संकेत इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
अब असली परीक्षा आदेशों की नहीं, उनके अमल की होगी। एक नवंबर तक सड़कें कितनी दुरुस्त होती हैं, जनसमस्याओं का समाधान कितनी तेजी से होता है और कुंभ-2027 की तैयारियां किस रफ्तार से आगे बढ़ती हैं—इन्हीं नतीजों से तय होगा कि मुख्यमंत्री का यह अल्टीमेटम अफसरशाही में वास्तविक बदलाव लाता है या फिर सरकारी बैठकों तक ही सीमित रह जाता है।



