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पिरान कलियर में जायरीनों की जेब पर बोझ क्यों? मुफ्त सुविधाओं की मांग लेकर DM से PM तक पहुंची आवाज….. टॉयलेट, जूता घर और मेडिकल सेवा के लिए शुल्क पर रोक लगाने की मांग; निजाम साबरी अल-मदद ट्रस्ट सचिव नजराना साबरी ने DM मयूर दीक्षित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा ज्ञापन, अस्पताल-मेडिकल कॉलेज व विश्वविद्यालय बनाने की भी उठाई मांग

पिरान कलियर में जायरीनों की जेब पर बोझ क्यों? मुफ्त सुविधाओं की मांग लेकर DM से PM तक पहुंची आवाज…..

टॉयलेट, जूता घर और मेडिकल सेवा के लिए शुल्क पर रोक लगाने की मांग; निजाम साबरी अल-मदद ट्रस्ट सचिव नजराना साबरी ने DM मयूर दीक्षित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा ज्ञापन, अस्पताल-मेडिकल कॉलेज व विश्वविद्यालय बनाने की भी उठाई मांग

 

हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर शरीफ में जियारत के लिए पहुंचने वाले जायरीनों की बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा अब जिला प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। सवाल सीधा है—क्या इबादत और जियारत के लिए आने वाले जायरीनों को टॉयलेट, जूता घर और प्राथमिक चिकित्सा जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ेगा? निजाम साबरी अल-मदद ट्रस्ट ने इस मुद्दे पर आवाज बुलंद करते हुए जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर सुविधाओं को निशुल्क उपलब्ध कराने तथा क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा के बड़े संस्थान स्थापित करने की मांग की है।

ट्रस्ट की सचिव नजराना साबरी ने ज्ञापन के माध्यम से मांग उठाई है कि पिरान कलियर शरीफ में आने वाले जायरीनों के लिए बुनियादी सुविधाओं की ऐसी व्यवस्था हो, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। ट्रस्ट ने सुविधाओं के नाम पर होने वाली कथित वसूली की व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

DM मयूर दीक्षित और PM मोदी के सामने उठाया मुद्दा

निजाम साबरी अल-मदद ट्रस्ट की ओर से भेजे गए ज्ञापन में पिरान कलियर की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है। ट्रस्ट का कहना है कि देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह में जियारत के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में उनके लिए स्वच्छ शौचालय, जूता घर, चिकित्सा सहायता और अन्य जरूरी सुविधाएं सुलभ होना बेहद आवश्यक है।

नजराना साबरी ने मांग की है कि जिलाधिकारी स्तर पर व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाई गई मांगों पर भी गंभीरता से विचार किया जाए। ट्रस्ट चाहता है कि जायरीनों की सुविधा को केवल अस्थायी इंतजाम तक सीमित न रखा जाए, बल्कि स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए।

टॉयलेट और जूता घर के लिए शुल्क क्यों?

ज्ञापन का सबसे अहम मुद्दा जायरीनों को बुनियादी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराने का है। ट्रस्ट ने मांग की है कि सार्वजनिक शौचालय, जूता घर और प्राथमिक चिकित्सा जैसी जरूरी सेवाओं के लिए जायरीनों से शुल्क लेने की व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।

ट्रस्ट का तर्क है कि जियारत के लिए दूर-दराज से आने वाले लोगों में बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी शामिल होते हैं। ऐसे में छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें परेशानी उठानी पड़े तो यह व्यवस्था की समीक्षा का विषय बनता है।

ट्रस्ट ने यह भी मांग की है कि जायरीनों से चढ़ावे और अन्य मदों में प्राप्त धन के उपयोग तथा जनसुविधाओं की उपलब्धता को लेकर पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि सुविधाओं के विकास का लाभ आम लोगों तक पहुंच सके।

हालांकि, शुल्क वसूली और मौजूदा व्यवस्थाओं से संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में संबंधित विभागों का पक्ष और प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी।

सिर्फ अस्थायी इंतजाम नहीं, स्थायी सुविधाएं चाहिए

पिरान कलियर में जायरीनों की आवाजाही को देखते हुए स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सहायता और सार्वजनिक सुविधाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ट्रस्ट की मांग है कि प्रशासन ऐसी व्यवस्था करे, जिससे लोगों को जरूरी सुविधाओं के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।

जायरीनों की सुविधा के लिए साफ-सुथरे शौचालय, व्यवस्थित जूता घर और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही क्षेत्र में सुविधाओं के संचालन और रखरखाव की नियमित निगरानी की मांग भी अहम है।

अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय की मांग

ट्रस्ट ने केवल टॉयलेट और जूता घर तक अपनी मांग सीमित नहीं रखी है। ज्ञापन में पिरान कलियर और आसपास के क्षेत्र में अस्पताल, मेडिकल कॉलेज तथा विश्वविद्यालय के निर्माण की मांग भी उठाई गई है।

ट्रस्ट का कहना है कि बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा संस्थानों से स्थानीय आबादी को लाभ मिलेगा। अस्पताल और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से आपातकालीन परिस्थितियों में उपचार की उपलब्धता बेहतर हो सकती है, जबकि मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय से युवाओं को उच्च शिक्षा के अवसर मिल सकते हैं।

इन परियोजनाओं के लिए भूमि, बजट, व्यवहार्यता और संबंधित विभागों की स्वीकृति जैसे पहलुओं पर निर्णय लेना होगा। फिलहाल ट्रस्ट ने इन मांगों को सरकार और जिला प्रशासन के सामने रखा है।

अब प्रशासन की परीक्षा, मांगों पर कार्रवाई कब?

पिरान कलियर शरीफ में जायरीनों की बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा अब ज्ञापन से आगे बढ़कर कार्रवाई की मांग कर रहा है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए ज्ञापन के जरिए ट्रस्ट ने साफ संदेश दिया है कि जायरीनों की सुविधा, स्वास्थ्य और सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

अब निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर हैं कि वे मौजूदा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर क्या कदम उठाते हैं। क्या जायरीनों को बुनियादी सुविधाएं निशुल्क मिलेंगी? क्या कथित शुल्क वसूली की जांच होगी? और क्या अस्पताल, मेडिकल कॉलेज व विश्वविद्यालय की मांग पर कोई ठोस पहल की जाएगी?

ट्रस्ट ने मांगों का दरवाजा खटखटा दिया है। अब सवाल कार्रवाई का है—पिरान कलियर आने वाले जायरीनों को राहत कब मिलेगी?

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