पिरान कलियर शरीफ दरगाह की व्यवस्थाओं पर पत्रकार इन्तजार रजा ने उठाई आवाज! साबिर पाक के नाम पर गरीबों के लिए अस्पताल और कॉलेज क्यों नहीं? जायरीनों की सुविधाओं पर खर्च हों दरगाह के संसाधन….. दरगाह की आय-व्यय का सार्वजनिक ऑडिट कराने की मांग, गरीबों के इलाज, बच्चों की मुफ्त तालीम और जायरीनों के लिए आधुनिक रैन बसेरे की उठाई आवाज; शासन-प्रशासन और वक्फ बोर्ड से मांगा जवाब…

पिरान कलियर/हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध पिरान कलियर शरीफ स्थित हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक की दरगाह में हर साल देश-विदेश से लाखों जायरीन अपनी मन्नतें और दुआएं लेकर पहुंचते हैं। कोई अपने परिवार की सलामती की दुआ मांगता है, तो कोई बीमारी से निजात और बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर यहां आता है। जायरीन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दरगाह में नजराना भी पेश करते हैं। लेकिन अब दरगाह की व्यवस्थाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर पत्रकार इन्तजार रजा ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।
पत्रकार इन्तजार रजा का कहना है कि दरगाह से जुड़े संसाधनों और आमदनी का लाभ गरीबों, जरूरतमंदों और जायरीनों तक किस तरह पहुंच रहा है, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। यह सवाल किसी की धार्मिक आस्था या दरगाह की परंपराओं के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जनसेवा के विस्तार को लेकर है।
सवाल नंबर-1: दरगाह की आय-व्यय का पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं?
पत्रकार इन्तजार रजा ने मांग की है कि पिरान कलियर शरीफ दरगाह की वार्षिक आय-व्यय का विवरण और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। दरगाह की व्यवस्था, रखरखाव, कर्मचारियों, विकास कार्यों और जायरीनों की सुविधाओं पर कितना खर्च किया जाता है, इसकी जानकारी आम जनता को मिलनी चाहिए।
सवाल नंबर-2: साबिर पाक के नाम पर बड़ा धर्मार्थ अस्पताल क्यों नहीं?
पिरान कलियर में देश के अलग-अलग राज्यों से बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और गरीब परिवार जियारत के लिए पहुंचते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और आपातकालीन परिस्थितियों में उन्हें बेहतर उपचार की आवश्यकता होती है।
इन्तजार रजा ने सवाल उठाया कि हजरत साबिर पाक के नाम पर एक बड़ा धर्मार्थ अस्पताल स्थापित करने की दिशा में पहल क्यों नहीं की जाती? यहां गरीबों के लिए मुफ्त इलाज, एंबुलेंस, आपातकालीन चिकित्सा और महिला एवं बाल चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
सवाल नंबर-3: गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए कॉलेज और स्कूल कब बनेगा?
पत्रकार इन्तजार रजा का कहना है कि साबिर पाक के नाम पर स्कूल, कॉलेज और तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने की योजना बनाई जानी चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा, छात्रवृत्ति और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि शिक्षा के माध्यम से उनका भविष्य बेहतर बन सके।
सवाल नंबर-4: जायरीनों के लिए आधुनिक रैन बसेरे और बेहतर सुविधाएं कब?
उर्स और विशेष धार्मिक अवसरों पर पिरान कलियर में जायरीनों की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में ठहरने, पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई और चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था बेहद जरूरी है।
इन्तजार रजा ने आधुनिक रैन बसेरे, महिलाओं के लिए सुरक्षित विश्राम स्थल, स्वच्छ शौचालय, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
सवाल नंबर-5: जनकल्याण के लिए ठोस कार्ययोजना क्यों नहीं?
पत्रकार इन्तजार रजा ने कहा कि देश में अनेक धार्मिक संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और जरूरतमंदों की सहायता के लिए बड़े स्तर पर सेवाएं संचालित कर रही हैं। ऐसे में पिरान कलियर शरीफ जैसी ऐतिहासिक दरगाह से भी जनकल्याण की बड़ी मिसाल कायम होनी चाहिए।
दरगाह प्रबंधन, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड और जिला प्रशासन को मिलकर ऐसी कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए, जिससे उपलब्ध संसाधनों का उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों के हित में किया जा सके।
पत्रकार इन्तजार रजा की प्रमुख मांगें
- दरगाह की वार्षिक आय-व्यय और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- साबिर पाक के नाम पर बड़ा धर्मार्थ अस्पताल स्थापित किया जाए।
- गरीब बच्चों के लिए स्कूल, कॉलेज और तकनीकी शिक्षा केंद्र खोले जाएं।
- जायरीनों के लिए आधुनिक रैन बसेरे, पेयजल और स्वच्छता की व्यवस्था हो।
- जरूरतमंदों के लिए नियमित भोजन, चिकित्सा और शिक्षा सहायता कार्यक्रम शुरू किए जाएं।
- दरगाह की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
आस्था के साथ इंसानियत की खिदमत भी जरूरी
इन्तजार रजा का कहना है कि पिरान कलियर शरीफ की पहचान मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत के पैगाम से जुड़ी है। यहां आने वाला हर जायरीन बेहतर व्यवस्था और सम्मानजनक सुविधाओं की उम्मीद करता है।
उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाने का विषय नहीं, बल्कि जनहित में पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्थाओं की मांग है। दरगाह से जुड़े संसाधनों के माध्यम से गरीबों के इलाज, बच्चों की शिक्षा और जायरीनों की सुविधाओं के लिए स्थायी संस्थान विकसित किए जाने चाहिए।
अब देखना होगा कि उत्तराखंड सरकार, वक्फ बोर्ड और दरगाह प्रबंधन इन महत्वपूर्ण सवालों पर क्या कदम उठाते हैं। आखिर साबिर पाक की दरगाह से जुड़ी आस्था को गरीबों की सेवा, शिक्षा और चिकित्सा की बड़ी मिसाल में बदलने की पहल कब होगी?
नोट: दरगाह की आय अथवा खर्च से संबंधित किसी अपुष्ट आंकड़े का उल्लेख नहीं किया गया है। वास्तविक स्थिति आधिकारिक आय-व्यय और ऑडिट विवरण सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।




