26 साल बाद उत्तराखंड पुलिस की नई पहचान! राष्ट्रपति निशान से अलंकृत हुआ पुलिस बल, अमित शाह ने सौंपा सर्वोच्च सम्मान; ‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ की जगह अब ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ होगा नया ध्येय वाक्य…. हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई चारों धर्मों की परंपराओं के साथ हुआ राष्ट्रपति पुलिस निशान का पूजन और फातहा, हिमालय, गंगा और शौर्य की झलक से सजा नया प्रतीक चिह्न; राष्ट्रपति निशान पाने वाला देश का 16वां पुलिस बल बना उत्तराखंड, 206 वीर जवानों के बलिदान को किया गया नमन….

26 साल बाद उत्तराखंड पुलिस की नई पहचान! राष्ट्रपति निशान से अलंकृत हुआ पुलिस बल, अमित शाह ने सौंपा सर्वोच्च सम्मान; ‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ की जगह अब ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ होगा नया ध्येय वाक्य….
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई चारों धर्मों की परंपराओं के साथ हुआ राष्ट्रपति पुलिस निशान का पूजन और फातहा, हिमालय, गंगा और शौर्य की झलक से सजा नया प्रतीक चिह्न; राष्ट्रपति निशान पाने वाला देश का 16वां पुलिस बल बना उत्तराखंड, 206 वीर जवानों के बलिदान को किया गया नमन….
देहरादून। उत्तराखंड पुलिस के गौरवशाली इतिहास में शनिवार का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित भव्य राष्ट्रपति पुलिस निशान अलंकरण समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान प्रदान किया। राज्य गठन के 26वें वर्ष में मिली इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने प्रदेश के पुलिस बल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त करने वाला उत्तराखंड देश का 16वां पुलिस बल बन गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्य सचिव आनंद वर्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी और पुलिस परिवारों के सदस्य मौजूद रहे।
समारोह की सबसे खास बात यह रही कि राष्ट्रपति निशान को चार प्रमुख धर्मों की परंपराओं के अनुसार पवित्र किया गया। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मगुरुओं ने अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार प्रार्थना, पाठ और अरदास कर उत्तराखंड पुलिस की सुख-शांति, समृद्धि और जनसेवा के संकल्प की कामना की। इस अनूठे आयोजन ने सर्वधर्म समभाव, धार्मिक सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
26 साल पुरानी पहचान में बड़ा बदलाव, अब ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ होगा उत्तराखंड पुलिस का नया ध्येय वाक्य
राष्ट्रपति निशान अलंकरण समारोह के साथ उत्तराखंड पुलिस ने अपनी पहचान में भी ऐतिहासिक बदलाव किया। पुलिस का पुराना ध्येय वाक्य ‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ अब बदलकर ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ कर दिया गया है। इसके साथ ही पुलिस के नए प्रतीक चिह्न का भी अनावरण किया गया। नए लोगो में हिमालय की ऊंची चोटियों, नदी और शौर्य के प्रतीकों के माध्यम से देवभूमि की भौगोलिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और पुलिस के साहसिक चरित्र को प्रदर्शित किया गया है।
नए प्रतीक चिह्न और ध्येय वाक्य को तैयार करने के लिए गठित समिति में एडीजी एपी अंशुमन, आईजी बरिंदरजीत सिंह, एसपी अमित श्रीवास्तव, एसएसपी श्वेता चौबे, अपर पुलिस अधीक्षक जूही मनराल, पुलिस उपाधीक्षक मनीष कुमार जायसवाल और निरीक्षक राजीव रावत शामिल रहे। समिति के सामूहिक प्रयासों से पुलिस को नई पहचान प्रदान की गई।
भव्य परेड, जनरल सैल्यूट और पाइप बैंड ने बांधा समां
समारोह की शुरुआत पुलिस लाइन में भव्य अलंकरण परेड के साथ हुई। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के आगमन पर पुलिस जवानों ने जनरल सैल्यूट देकर सम्मान प्रकट किया। इसके बाद मुख्य अतिथि अमित शाह का सेरेमोनियल हेड पहनाकर स्वागत किया गया। परेड कमांडर पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर के नेतृत्व में दस प्लाटूनों ने अनुशासन, साहस और शानदार तालमेल का प्रदर्शन किया।
31वीं वाहिनी पीएसी के महिला पाइप बैंड ने अपनी शानदार प्रस्तुति से समारोह की गरिमा बढ़ाई। वर्ष 2017 में गठित उत्तराखंड पुलिस के इस प्रथम महिला पाइप बैंड की धुनों और ड्रम की विशेष पाइल फॉर्मेशन के बीच राष्ट्रपति निशान को निर्धारित स्थान पर सुशोभित किया गया।
इसके बाद राष्ट्रपति निशान से आवरण हटाया गया और उसे विधिवत सम्मान प्रदान किया गया। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हजारों लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उत्तराखंड पुलिस के गौरव का अभिनंदन किया। इसके पश्चात चार धर्मगुरुओं ने पवित्र पाठ, फातहा, अरदास और विशेष प्रार्थनाओं के माध्यम से निशान को आशीर्वाद प्रदान किया।
अमित शाह बोले- उत्तराखंड पुलिस की सेवा, शौर्य और अनुशासन का राष्ट्रीय सम्मान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति निशान मिलने पर बधाई देते हुए कहा कि यह केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि 25 वर्षों की सेवा, त्याग, अनुशासन और शौर्य का राष्ट्रीय अनुमोदन है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पुलिस ने कम समय में अपनी कार्यक्षमता और पेशेवर दक्षता से देश में विशिष्ट पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पुलिस के 206 वीर जवानों ने कर्तव्य पालन के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इन वीर जवानों की साधना, अनुशासन और शौर्य के साथ वर्तमान में कार्यरत पुलिसकर्मियों की सेवा और समर्पण के कारण ही यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है।
गृह मंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय उत्तराखंड पुलिस में लगभग 13 हजार जवान थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 26 हजार से अधिक हो गई है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों, प्राकृतिक आपदाओं, चारधाम यात्रा, कुंभ मेला और लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी उत्तराखंड पुलिस बखूबी निभा रही है।
उन्होंने केदारनाथ आपदा, सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान, धराली, थराली और अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस के साहसिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में दुर्गम स्थानों पर सबसे पहले पहुंचने वाले जवानों में उत्तराखंड पुलिस के जवान भी शामिल होते हैं।
नशे के खिलाफ अभियान और न्याय संहिता लागू करने में उत्तराखंड की सराहना
अमित शाह ने नशे के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए बताया कि ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के तहत पिछले चार वर्षों में सात हजार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 307 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए।
उन्होंने नई आपराधिक न्याय संहिताओं को लागू करने में उत्तराखंड पुलिस के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि तकनीक, फॉरेंसिक साइंस और डिजिटल पुलिसिंग के माध्यम से न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में प्रदेश पुलिस ने उल्लेखनीय कार्य किया है।
गृह मंत्री ने नशामुक्त भारत के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि 31 मार्च 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने उत्तराखंड पुलिस से इस अभियान में अपनी भूमिका और मजबूत करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री धामी बोले- पुलिस का सम्मान पूरे उत्तराखंड का गौरव
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राष्ट्रपति पुलिस निशान मिलना उत्तराखंड पुलिस की सेवा, समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का राष्ट्रीय सम्मान है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय पुलिस के पास लगभग 13 हजार जवान, 96 थाने और 42 चौकियां थीं। आज पुलिस बल 26 हजार से अधिक जवानों के साथ प्रदेश की सुरक्षा में जुटा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, प्राकृतिक आपदाओं और वर्षभर आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा का दायित्व निभाती है। चारधाम यात्रा, कुंभ मेला और कांवड़ यात्रा जैसे विशाल आयोजनों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है।
उन्होंने बताया कि ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के तहत पिछले चार वर्षों में सात हजार से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी और 307 करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थों की बरामदगी प्रदेश पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ऑपरेशन स्माइल और ऑपरेशन मुक्ति के माध्यम से बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य भी किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं और नरेंद्र नगर स्थित पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है।
डीजीपी दीपम सेठ ने जताया आभार, शहीदों और पुलिस परिवारों को दिया श्रेय
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने स्वागत संबोधन में कहा कि राष्ट्रपति पुलिस निशान उत्तराखंड पुलिस के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के परिश्रम, त्याग, अनुशासन और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह सम्मान अतीत के परिश्रम का सम्मान, वर्तमान के दायित्वों का स्मरण और भविष्य में उत्कृष्टता हासिल करने का संकल्प है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां और प्राकृतिक चुनौतियां पुलिस के सामने अलग तरह की जिम्मेदारियां प्रस्तुत करती हैं। हिमालय के दुर्गम क्षेत्र, सीमावर्ती गांव, प्राकृतिक आपदाएं और धार्मिक आयोजनों में लाखों लोगों की सुरक्षा के बीच पुलिसकर्मी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डीजीपी ने सेवारत और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के साथ-साथ उन पुलिस परिवारों का भी आभार जताया, जिनके त्याग और सहयोग से जवान अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर पाते हैं। उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए संकल्प लिया कि उत्तराखंड पुलिस ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ के ध्येय वाक्य को आत्मसात कर प्रदेशवासियों की सुरक्षा और जनसेवा के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करती रहेगी।
पुलिस पदकों से सम्मानित हुए अधिकारी, विशेष डाक कवर का भी हुआ अनावरण
समारोह में राष्ट्रपति पुलिस पदक और सराहनीय सेवा पुलिस पदक से सम्मानित होने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। विशिष्ट सेवा के लिए नारायण सिंह नपचियाल और वंश बहादुर यादव को राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया गया। इसके अलावा जगदीश चंद, प्रतिमा भट्ट और सहकार कुंडीर को सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।
इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए भारतीय डाक विभाग की ओर से उत्तराखंड पुलिस के राष्ट्रपति निशान पर विशेष डाक कवर जारी किया गया। साथ ही उत्तराखंड पुलिस पत्रिका का विमोचन भी किया गया।
समारोह का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम्, राष्ट्रगान और भारत माता के जयघोष के साथ हुआ। राष्ट्रपति निशान के साथ नई पहचान और नए ध्येय वाक्य को अपनाकर उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले समय में उसका संकल्प केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सत्य, कर्म, साहस और जनसेवा के नए मानक स्थापित करना भी होगा।




