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पशु बलि की कुप्रथा पर रोक लगाने की मांग, हरिद्वार के भदौरिया अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दाखिल की याचिका,, विभिन्न अवसरों पर होने वाली पशु बलि पर प्रतिबंध की मांग, पशु क्रूरता निवारण कानून के सख्त पालन की उठाई आवाज

पशु बलि की कुप्रथा पर रोक लगाने की मांग, हरिद्वार के भदौरिया अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दाखिल की याचिका,,

विभिन्न अवसरों पर होने वाली पशु बलि पर प्रतिबंध की मांग, पशु क्रूरता निवारण कानून के सख्त पालन की उठाई आवाज

हरिद्वार। देशभर में पशु एवं पक्षियों की बलि की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर हरिद्वार के अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), नई दिल्ली का दरवाजा खटखटाया है। अधिवक्ता अरुण भदौरिया, कमल भदौरिया, श्रीमती सुमेधा भदौरिया एडवोकेट तथा चेतन भदौरिया (एलएलबी अध्ययनरत) ने प्रमुख सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार को पक्षकार बनाते हुए एक याचिका दाखिल की है।

याचिका में दावा किया गया है कि देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों, मेलों, उत्सवों तथा अन्य अवसरों पर पशु-पक्षियों की बलि की परंपरा आज भी जारी है, जिससे पशुओं को अनावश्यक पीड़ा और यातना सहनी पड़ती है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि किसी भी देवी-देवता या ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए पशु बलि का कोई औचित्य नहीं है और इस प्रकार की प्रथा करुणा तथा अहिंसा की भारतीय संस्कृति के विपरीत है।

याचिका में भारत के संविधान के अनुच्छेद 48ए तथा 51ए (जी) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य सभी जीवों के प्रति करुणा रखना है। साथ ही पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का हवाला देते हुए कहा गया कि कानून का उद्देश्य पशुओं को अनावश्यक कष्ट और यातना से बचाना है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि सार्वजनिक रूप से होने वाली पशु बलि से समाज में हिंसा और क्रूरता की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है तथा बच्चों और युवाओं पर भी इसका नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रथा पशु कल्याण और संवैधानिक मूल्यों के भी विपरीत है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की गई प्रमुख मांगों में देशभर में पशु बलि की प्रथा पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को आवश्यक अनुशंसाएं जारी करना, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराना, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करना तथा पशुओं के प्रति करुणा और संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाना शामिल है।

याचिकाकर्ताओं ने आयोग से आग्रह किया है कि इस विषय को मानवता, पशु कल्याण और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए शीघ्र आवश्यक आदेश पारित किए जाएं, ताकि देशभर में पशु बलि की प्रथा पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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