देहरादून में UTU पेपर लीक पर कांग्रेस का बड़ा हल्लाबोल: गणेश गोदियाल समेत कई दिग्गज नेता हिरासत में, पुलिस से धक्का-मुक्की के बीच गरमाई सियासत,, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर के बाहर सैकड़ों कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, पेपर लीक की SIT जांच और उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग,, कांग्रेस का आरोप- ‘युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही सरकार’, पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में तेज हुआ टकराव

देहरादून में UTU पेपर लीक पर कांग्रेस का बड़ा हल्लाबोल: गणेश गोदियाल समेत कई दिग्गज नेता हिरासत में, पुलिस से धक्का-मुक्की के बीच गरमाई सियासत,,
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर के बाहर सैकड़ों कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, पेपर लीक की SIT जांच और उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग,,
कांग्रेस का आरोप- ‘युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही सरकार’, पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में तेज हुआ टकराव
देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) के बीटेक पेपर लीक मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। शनिवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर कांग्रेस और एनएसयूआई ने देहरादून स्थित उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय कार्यालय, नंदा की चौकी के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई, जिसके बाद पुलिस ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, वरिष्ठ नेता एवं चकराता विधायक प्रीतम सिंह, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शन में लगभग 400 से 500 कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। विश्वविद्यालय परिसर के बाहर बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने युवाओं का भविष्य संकट में डाल दिया है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार भर्ती और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने में पूरी तरह विफल रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र लगातार मेहनत कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होना चाहिए। गणेश गोदियाल ने इस मामले में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए उनके इस्तीफे की भी मांग की। उन्होंने कहा कि जब बार-बार परीक्षा प्रणाली सवालों के घेरे में आ रही है तो सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।
विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इस आंदोलन को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया। प्रदर्शन में चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष एवं विधायक प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी गुंजन सिंह, एआईसीसी सचिव समा बानो, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, महिला कांग्रेस कार्यकर्ता, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल रहे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को विश्वविद्यालय परिसर की ओर बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई और माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर मौके से हटाया। बाद में क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में देशभर में पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है, जबकि सरकार केवल आश्वासन देने तक सीमित है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक कांग्रेस युवाओं की आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग भी की।
पेपर लीक प्रकरण को लेकर कांग्रेस के इस प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ आगे क्या कदम उठाती है।



