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SIR पर हरिद्वार में कांग्रेस का हल्ला बोल, तेलूराम प्रधान के नेतृत्व में उमड़ा काफिला…. राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर मतदाता सूची पर उठाए सवाल और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्यवाही की मांग की , फॉर्म-7 का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग; ‘पात्र का नाम न कटे, अपात्र का नाम न जुड़े’ पर जोर

SIR पर हरिद्वार में कांग्रेस का हल्ला बोल, तेलूराम प्रधान के नेतृत्व में उमड़ा काफिला….

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर मतदाता सूची पर उठाए सवाल,और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्यवाही की मांग की,, फॉर्म-7 का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग; ‘पात्र का नाम न कटे, अपात्र का नाम न जुड़े’ पर जोर

हरिद्वार। उत्तराखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर हरिद्वार में कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस नेता तेलूराम प्रधान करीब 300 लोगों के काफिले के साथ प्रदर्शन में पहुंचे। हाथों में कांग्रेस के झंडे, नारेबाजी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बीच कांग्रेस नेताओं ने SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई।और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्यवाही की मांग की

कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रशासन को सौंपते हुए मतदाता सूची के पुनरीक्षण, फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने मांग की कि पात्र मतदाताओं का नाम किसी भी स्थिति में न हटे और नाम हटाने से पहले नियमानुसार सत्यापन एवं सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

300 लोगों के काफिले के साथ पहुंचे तेलूराम प्रधान, सड़क पर दिखा कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन

SIR के विरोध में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस नेता तेलूराम प्रधान के नेतृत्व में करीब 300 लोगों का काफिला पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग को लेकर आवाज बुलंद की।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा। तस्वीरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बैरिकेडिंग के पास मौजूदगी दिखाई दे रही है। प्रदर्शनकारियों की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने और अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखने की प्रक्रिया भी हुई।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि SIR जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं के सामने आंकड़े स्पष्ट होने चाहिए। उनका कहना है कि फॉर्म-7 के कितने आवेदन आए, कितने स्वीकार किए गए और कितने मामलों में नाम हटाने की कार्रवाई हुई, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

तेलूराम प्रधान बोले—पात्र मतदाता का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए

कांग्रेस नेता तेलूराम प्रधान ने कहा कि SIR में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार कांग्रेस किसी वैध प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रही, लेकिन किसी पात्र नागरिक के नाम को केवल आपत्ति के आधार पर हटाया जाना उचित नहीं होना चाहिए।

प्रधान ने कहा, “हम किसी पात्र मतदाता का अधिकार छिनने नहीं देंगे। SIR में जो भी प्रक्रिया चल रही है, उसमें पारदर्शिता जरूरी है। हमारा सवाल है कि कितने फॉर्म-7 आए, कितने स्वीकार हुए और कितने मामलों में नाम हटाने की कार्रवाई हुई—इसका पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि किसी तरह की आशंका न रहे।”उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में भी मतदाता सूची को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चुनाव से पहले सूची का शुद्ध एवं पारदर्शी होना जरूरी है।

1.73 लाख फॉर्म-7 आवेदन, 95 हजार से ज्यादा ‘इनएलिजिबल’

SIR को लेकर बहस के बीच उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के हवाले से सामने आए आंकड़ों ने भी चर्चा तेज कर दी है। इंडियन एक्सप्रेस की 25 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में SIR के दौरान करीब 1.73 लाख फॉर्म-7 आवेदन दाखिल हुए, जिनमें 95 हजार से अधिक मामलों को ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में रखा गया।

CEO कार्यालय के अनुसार ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में ऐसे मामले शामिल हैं, जहां संबंधित मतदाता ने मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए अथवा स्वयं या परिवार के किसी सदस्य के माध्यम से सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ। ऐसे मामलों में ERO/AERO द्वारा ऑनलाइन सिस्टम पर संबंधित मतदाता को ‘इनएलिजिबल’ दर्ज किए जाने के बाद फॉर्म-7 स्वतः जनरेट होने की प्रक्रिया बताई गई है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में शामिल होना अपने आप में मतदाता के लिए आगे नाम शामिल कराने का रास्ता बंद नहीं करता। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार ऐसे मतदाता निर्धारित दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का अनुरोध कर सकते हैं।

कांग्रेस का सवाल—फॉर्म-7 का पूरा हिसाब जनता के सामने आए

तेलूराम प्रधान और कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि फॉर्म-7 के आंकड़े केवल कुल संख्या तक सीमित न रहें, बल्कि उनका विधानसभा क्षेत्रवार विवरण भी सार्वजनिक किया जाए।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार जनता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि किस विधानसभा क्षेत्र में कितने फॉर्म-7 दाखिल हुए, कितने मामलों में सत्यापन हुआ, कितनी आपत्तियां स्वीकार या अस्वीकार हुईं और कितने नामों पर आगे की कार्रवाई की गई।

कांग्रेस का कहना है कि इससे SIR को लेकर उठ रहे सवालों और आशंकाओं का तथ्यात्मक जवाब मिल सकेगा।

‘पात्र का नाम न कटे, अपात्र का नाम न जुड़े’

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने बार-बार मतदाता सूची की शुद्धता पर जोर दिया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और इसलिए नाम जोड़ने अथवा हटाने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन होना चाहिए।

तेलूराम प्रधान ने कहा कि “आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का शुद्ध और निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है। हमारा विरोध किसी वैध प्रक्रिया से नहीं है, लेकिन हर प्रक्रिया कानून और पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। किसी भी पात्र मतदाता को केवल कागजी आपत्ति के आधार पर अपने मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।”

कांग्रेस ने यह भी कहा कि जहां किसी मतदाता के नाम को लेकर आपत्ति हो, वहां संबंधित व्यक्ति को अपनी बात रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए।

हरिद्वार में पहले से चल रही SIR की समीक्षा

हरिद्वार जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR से संबंधित बैठकों, निरीक्षणों और राजनीतिक दलों के साथ संवाद की जानकारी उपलब्ध है। प्रशासन के अनुसार राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें आयोजित की गई हैं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने भी SIR कार्यों की समीक्षा की है और बूथ स्तर पर चल रही गतिविधियों का निरीक्षण किया है।

जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन अब 3 अक्टूबर 2026 को किया जाना है। इससे पहले दावों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की जानी है।

SIR पर सियासी गर्मी बढ़ी, अब अंतिम सूची पर नजर

हरिद्वार में तेलूराम प्रधान के नेतृत्व में पहुंचे करीब 300 लोगों के काफिले और कांग्रेस के प्रदर्शन ने SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को स्थानीय स्तर पर और तेज कर दिया है। कांग्रेस जहां फॉर्म-7 और मतदाता सूची की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रही है, वहीं निर्वाचन तंत्र का कहना है कि SIR नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें की जा रही हैं।

अब निगाहें 3 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर रहेंगी। इसके बाद सामने आने वाले आंकड़ों से यह स्पष्ट होगा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कितने नाम बरकरार रहे, कितने नए नाम जुड़े और किन मामलों में आगे सुधार अथवा समावेशन की प्रक्रिया की जरूरत पड़ी।

हरिद्वार में कांग्रेस के प्रदर्शन ने एक संदेश जरूर दिया है—SIR को लेकर राजनीतिक सवाल अब सड़क से प्रशासनिक और चुनावी बहस के केंद्र तक पहुंच चुके हैं।

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