101 मिनी सचिवालय का सपना दिखाने वाले डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह मुख्यालय अटैच कोई पटकथा तो नहीं, पंचायत विभाग में छिड़ी नई बहस,, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर सख्ती के साथ पंचायतों को आधुनिक बनाने की पहल भी रही चर्चा में,, तबादले के बाद सवाल— क्या 101 ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय का अभियान और जवाबदेही की मुहिम जारी रहेगी?

101 मिनी सचिवालय का सपना दिखाने वाले डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह मुख्यालय अटैच कोई पटकथा तो नहीं, पंचायत विभाग में छिड़ी नई बहस,,
भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर सख्ती के साथ पंचायतों को आधुनिक बनाने की पहल भी रही चर्चा में,,
तबादले के बाद सवाल— क्या 101 ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय का अभियान और जवाबदेही की मुहिम जारी रहेगी?
हरिद्वार। हरिद्वार पंचायत विभाग में प्रशासनिक सख्ती और विकासात्मक पहलों के लिए चर्चा में रहे जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) अतुल प्रताप सिंह का स्थानांतरण कर उन्हें मुख्यालय से संबद्ध (अटैच) किए जाने के बाद पंचायत विभाग में नई बहस शुरू हो गई है।
अपने कार्यकाल के दौरान अतुल प्रताप सिंह ने पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से कई विभागीय कदम उठाए। फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र, वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी धन के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ उन्होंने हरिद्वार की 101 ग्राम पंचायतों में आधुनिक मिनी सचिवालय विकसित करने की पहल को भी प्राथमिकता दी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और पंचायत कार्यालयों को अधिक व्यवस्थित एवं सुविधासंपन्न बनाना बताया गया था।
विभागीय स्तर पर शुरू किए गए इन प्रयासों को पंचायत व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया। वहीं, कई मामलों में की गई कार्रवाई के कारण पंचायत विभाग लंबे समय तक चर्चा में भी रहा।
अब उनके मुख्यालय अटैच होने के बाद पंचायत विभाग में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या 101 मिनी सचिवालय की परिकल्पना और पंचायतों में जवाबदेही मजबूत करने की मुहिम पहले की तरह जारी रहेगी। कई लोग मानते हैं कि शुरू की गई विकासात्मक और प्रशासनिक पहलों की निरंतरता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना उनका आरंभ करना।
हालांकि शासन की ओर से जारी स्थानांतरण आदेश में किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए इस प्रशासनिक निर्णय के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
अब पंचायत विभाग से जुड़े लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि नई प्रशासनिक व्यवस्था में विकास कार्यों, मिनी सचिवालय योजना और अनियमितताओं के विरुद्ध चल रही कार्रवाई को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाता है।



