उत्तराखंड की नौकरशाही में ‘सुपर एक्टिव अफसरों’ की एंट्री! धामी सरकार के कुछ चेहरे बने प्रशासनिक चर्चाओं का नया केंद्र,, “फील्ड में अचानक निरीक्षण, जनता से सीधा संवाद और तेज फैसलों की शैली ने बढ़ाई लोकप्रियता — कई जिलों में कामकाज के तरीके पर हो रही चर्चा,,” “दफ्तरों की फाइलों से बाहर निकला प्रशासन! जमीनी हकीकत जानने वाले अफसरों की कार्यशैली ने खींचा सबका ध्यान”

इन्तजार रजा हरिद्वार- उत्तराखंड की नौकरशाही में ‘सुपर एक्टिव अफसरों’ की एंट्री! धामी सरकार के कुछ चेहरे बने प्रशासनिक चर्चाओं का नया केंद्र,,
“फील्ड में अचानक निरीक्षण, जनता से सीधा संवाद और तेज फैसलों की शैली ने बढ़ाई लोकप्रियता — कई जिलों में कामकाज के तरीके पर हो रही चर्चा,,”
“दफ्तरों की फाइलों से बाहर निकला प्रशासन! जमीनी हकीकत जानने वाले अफसरों की कार्यशैली ने खींचा सबका ध्यान”
उत्तराखंड में इन दिनों प्रशासनिक हलकों से लेकर आम लोगों के बीच कुछ अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर चर्चाएं तेजी से चल रही हैं। कहा जा रहा है कि राज्य में प्रशासन का एक नया चेहरा उभरकर सामने आया है, जहां कुछ अधिकारी केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सीधे फील्ड में पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लेने और समस्याओं के समाधान पर फोकस कर रहे हैं।
नितिन, मयूर, प्रशांत, ललित और विशाल जैसे नाम इन चर्चाओं के केंद्र में बताए जा रहे हैं। इन अधिकारियों को लेकर यह चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि इन्होंने कार्यशैली में पारंपरिक ढांचे से अलग रास्ता अपनाने की कोशिश की है। अचानक निरीक्षण, विभागीय जवाबदेही और जन समस्याओं पर त्वरित निर्णय लेने की शैली को इनकी प्रमुख पहचान माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कई जगह विकास कार्यों की निगरानी, कानून-व्यवस्था की समीक्षा और जनता की शिकायतों के त्वरित निस्तारण को लेकर इन अधिकारियों की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। फील्ड विजिट और सीधे हालात की समीक्षा करने की आदत ने इन्हें अन्य अधिकारियों से अलग खड़ा किया है।
प्रशासनिक जानकार मानते हैं कि वर्तमान दौर में केवल कार्यालयों में बैठकर काम करने से जनता की अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं। लोग ऐसे अधिकारियों को ज्यादा महत्व देते हैं जो जमीनी स्तर पर मौजूद रहकर वास्तविक स्थिति को समझते हैं। यही कारण है कि इन अधिकारियों के काम करने के तरीके को लेकर नौकरशाही के भीतर भी चर्चा बढ़ रही है।
हालांकि प्रशासनिक सेवा में किसी भी अधिकारी की वास्तविक पहचान उसके लंबे समय के काम और परिणामों से तय होती है, लेकिन फिलहाल इन अधिकारियों की कार्यशैली ने उत्तराखंड के प्रशासनिक माहौल में नई ऊर्जा और नई बहस दोनों पैदा कर दी हैं।



