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सोलर लाइट की फाइल में लाइट… जमीन पर अंधेरा! “अगर लाइट नहीं लगी थी, तो फाइल को रोशनी किसने दिखाई?” कागजों में जल रही थी रोशनी, जमीन पर अंधेरा! ₹1.48 लाख का भुगतान, अधिकारी निलंबित भुगतान करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई के बाद अब निगाहें उन हाथों पर, जिनसे गुजरी थी पूरी फाइल,, तत्कालीन DPRO मौ मुस्तफा खान पर भुगतान के दबाव का आरोप

“क्या शहीदवाला ग्रांट सिर्फ ट्रेलर है… पूरी फिल्म अभी बाकी है?” DPRO अतुल प्रताप सिंह की वापसी के बाद खुली फाइल? 21 सितंबर का शासनादेश, 25 सितंबर की जांच—चार दिन में कार्रवाई ने बढ़ाई हलचल

सोलर लाइट की फाइल में लाइट… जमीन पर अंधेरा!

“अगर लाइट नहीं लगी थी, तो फाइल को रोशनी किसने दिखाई?”

कागजों में जल रही थी रोशनी, जमीन पर अंधेरा! ₹1.48 लाख का भुगतान, अधिकारी निलंबित भुगतान करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई के बाद अब निगाहें उन हाथों पर, जिनसे गुजरी थी पूरी फाइल,,

तत्कालीन DPRO मौ मुस्तफा खान पर भुगतान के दबाव का आरोप

इन्तजार रजा हरिद्वार..सरकारी फाइलों में सब कुछ दुरुस्त था… लाइट लगी थी, बिल बना था और ₹1.48 लाख का भुगतान भी हो चुका था।लेकिन जब जांच टीम गांव पहुंची तो कहानी ने अचानक टर्न ले लिया। जिस सोलर स्ट्रीट लाइट के नाम पर भुगतान हुआ, मौके पर उसकी मौजूदगी ही सवाल बन गई।बस यहीं से शुरू हुई हरिद्वार की सोलर लाइट फाइल की असली कहानी…और अब यह कहानी एक पंचायत की चारदीवारी से निकलकर कई ग्राम पंचायतों तक पहुंचती दिखाई दे रही है।

फाइल बोली—लाइट लग चुकी है… मौके ने कहा—कहां है लाइट?

24 सितंबर की शिकायत, 25 सितंबर की जांच और फिर खुला ₹1.48 लाख के भुगतान का राज

ग्राम पंचायत शहीदवाला ग्रांट, विकासखंड भगवानपुर में सोलर स्ट्रीट लाइट को लेकर शिकायत सामने आई।24 सितंबर को शिकायत पहुंची और अगले ही दिन 25 सितंबर को DPRO अतुल प्रताप सिंह खुद जांच के लिए मौके पर पहुंच गए। जांच टीम ने रिकॉर्ड खंगाले। फाइल देखी। भुगतान देखा। और फिर जमीन पर पहुंचकर हकीकत देखी। विभागीय प्रेस नोट के मुताबिक सामने आया कि सोलर स्ट्रीट लाइट लगाए बिना ही बाहरी फर्म द्वारा लाइट स्थापित करना दर्शाया गया और ग्राम पंचायत से ₹1,48,000 का भुगतान कर दिया गया।

यानी सवाल सीधा है—जब लाइट जमीन पर नहीं थी तो भुगतान की फाइल में वह पहुंची कैसे?यही वह सवाल है जिसने पूरे मामले को गरमा दिया है।

दबाव में हुआ भुगतान’—ब्यान ने बदल दी पूरी कहानी!

ग्राम विकास अधिकारी ने लगाया पूर्व DPRO पर भुगतान के दबाव का आरोप—अब जांच में खुलेगी पूरी ‘चेन’

जांच के दौरान भुगतान को लेकर पूछताछ हुई तो ग्राम पंचायत विकास अधिकारी अनुज शर्मा की ओर से विभागीय रिकॉर्ड में एक गंभीर आरोप दर्ज हुआ। विभागीय सुत्रो के मुताबिक उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी मौ. मुस्तफा खान के बार-बार दबाव के कारण भुगतान किया गया।

अब कहानी में एक नया किरदार जुड़ गया।लेकिन यहां असली सवाल आरोप से भी बड़ा है—क्या सचमुच भुगतान पर दबाव था? अगर था तो किस स्तर से? और अगर दबाव नहीं था तो फिर ₹1.48 लाख का भुगतान किस प्रक्रिया के तहत हुआ?इन सवालों का जवाब जांच में ही सामने आएगा।पूर्व DPRO पर लगाया गया यह आरोप फिलहाल आरोप मात्र है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।

निलंबन की गाज… लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं!

भुगतान करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई के बाद अब निगाहें उन हाथों पर, जिनसे गुजरी थी पूरी फाइल

मामले में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी अनुज शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कहानी सिर्फ भुगतान करने वाले अधिकारी तक खत्म होगी? या फिर जांच यह भी देखेगी कि—खरीद किसने तय की?
फर्म कौन थी? दर किसने तय की? बिल किसने लगाया? सत्यापन किसने किया? फाइल किसने आगे बढ़ाई? भुगतान किसने स्वीकृत किया?क्योंकि सरकारी भुगतान की फाइल आमतौर पर एक टेबल से दूसरी टेबल तक जाती है। तो फिर सवाल भी एक ही है—

“अगर लाइट नहीं लगी थी, तो फाइल में रोशनी किसने दिखाई?”

अब ‘एक पंचायत’ नहीं… पूरे हरिद्वार की सोलर फाइलों पर नजर!

विभागीय सुत्रो के अनुसार कई पंचायतों से अधिक कीमत और बिना लाइट भुगतान की शिकायतों का जिक्र

मामले का सबसे बड़ा ट्विस्ट यहां आता है।विभागीय प्रेस नोट के मुताबिक जनपद की कई ग्राम पंचायतों में अधिक मूल्य की सोलर स्ट्रीट लाइट लगाए जाने और कुछ स्थानों पर बिना लाइट लगाए भुगतान किए जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

अब यही लाइन पूरे मामले को बड़ा बना देती है।क्योंकि अगर शिकायतें कई पंचायतों से हैं तो सवाल भी कई होंगे—कहां-कहां लाइट लगी? कहां-कहां सिर्फ बिल लगा?किस फर्म को कितना भुगतान हुआ? एक ही फर्म कितनी पंचायतों में पहुंची? दर बाजार मूल्य से कितनी अलग थी?भौतिक सत्यापन किसने किया?और सबसे बड़ा सवाल—

“क्या शहीदवाला ग्रांट सिर्फ ट्रेलर है… पूरी फिल्म अभी बाकी है?”

DPRO अतुल प्रताप सिंह की वापसी के बाद खुली फाइल?

21 सितंबर का शासनादेश, 25 सितंबर की जांच—चार दिन में कार्रवाई ने बढ़ाई हलचल

इस कहानी का एक और अहम अध्याय है। 21 सितंबर 2026 को शासन ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अतुल प्रताप सिंह को जिला पंचायत राज अधिकारी हरिद्वार के पद पर पूर्व की भांति यथावत रखने का निर्णय लिया।इसके बाद 25 सितंबर को शहीदवाला ग्रांट में सोलर लाइट प्रकरण की जांच सामने आई। DPRO अतुल प्रताप सिंह ने विभागीय प्रेस नोट में मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की बात कही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के लिए निदेशक पंचायतीराज को पत्र भेजे जाने की बात भी सामने आई है। अब निगाहें इसी जांच पर हैं।

क्लाइमेक्स अभी बाकी है!

₹1.48 लाख से शुरू हुई कहानी अब कई पंचायतों के करोड़ों के हिसाब तक पहुंच सकती है?

एक शिकायत आई।—फिर मौके पर जांच हुई।–फाइल खुली।–भुगतान सामने आया।–लाइट गायब मिली।—निलंबन हुआ।पूर्व DPRO मौ मुस्तफा खान के दबाव का आरोप सामने आया।और अब कई पंचायतों से जुड़ी शिकायतों का जिक्र सामने आ चुका है।

लेकिन असली राज अभी फाइलों में बंद है।अगर जांच सिर्फ एक भुगतान तक सीमित रहती है तो कहानी यहीं खत्म हो जाएगी।लेकिन अगर जांच ने हर पंचायत की खरीद, हर बिल, हर भुगतान, हर फर्म और हर भौतिक सत्यापन की परत खोल दी… तो सोलर लाइट की यह कहानी हरिद्वार के पंचायती राज सिस्टम का बड़ा ऑडिट बन सकती है।

क्योंकि सवाल सिर्फ ₹1.48 लाख का नहीं है…सवाल यह है कि सरकारी पैसे से खरीदी गई रोशनी जमीन पर चमकी भी थी या सरकारी फाइलों में ही चमकती रही?अब अगला सीन जांच रिपोर्ट लिखेगी… और इस कहानी का असली क्लाइमेक्स उसी रिपोर्ट में छिपा है।

Note- तत्कालीन DPRO मौ मुस्तफा खान का पक्ष और ब्यान सहित अन्य विभागीय जानकारी अपडेट होने या आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा

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