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वायरल वीडियो पर घमासान: साध्वी कंचन गिरी के जवाब के बाद अब पुलिस जांच की मांग…. एडवोकेट अरुण भदोरिया ने SSP हरिद्वार को सौंपा प्रार्थना पत्र—वीडियो में महिला कौन? किसने बनाया और पत्रकारों तक किस नंबर से पहुंचा वीडियो, जांच से खुलेगा राज

वायरल वीडियो पर घमासान: साध्वी कंचन गिरी के जवाब के बाद अब पुलिस जांच की मांग….

एडवोकेट अरुण भदोरिया ने SSP हरिद्वार को सौंपा प्रार्थना पत्र—वीडियो में महिला कौन? किसने बनाया और पत्रकारों तक किस नंबर से पहुंचा वीडियो, जांच से खुलेगा राज

हरिद्वार। साध्वी कंचन गिरी उर्फ साध्वी कंचन सिन्हा से जुड़े कथित वायरल वीडियो का विवाद अब पुलिस जांच की मांग तक पहुंच गया है। मामले में हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदोरिया ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर को प्रार्थना पत्र देकर पूरे प्रकरण की गहन जांच कराने की मांग की है। अधिवक्ता ने वीडियो के स्रोत, उसमें दिखाई दे रही महिला, वीडियो बनाने वाले व्यक्ति और उसे पत्रकारों तक पहुंचाने वाले मोबाइल नंबर की पड़ताल कराने की मांग उठाई है।

मामले में नया मोड़ उस समय आया जब साध्वी कंचन सिन्हा की ओर से कानूनी नोटिस का लिखित जवाब दिया गया। जवाब में कथित वायरल वीडियो को बनाने और वायरल करने से इनकार किया गया है। साथ ही यह कहा गया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने कथित तौर पर वीडियो को झूठे तरीके से तैयार कर वायरल किया है।

15 सितंबर को भेजा गया था कानूनी नोटिस, अधिवक्ता के जरिए आया जवाब

अरुण भदोरिया की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, उन्होंने साध्वी कंचन गिरी उर्फ साध्वी कंचन सिन्हा को कथित वायरल वीडियो के संबंध में कानूनी नोटिस भेजा था। पत्र में बताया गया है कि नोटिस 15 सितंबर 2026 को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजा गया था।

नोटिस के जवाब में साध्वी कंचन सिन्हा की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार गडवाल, गाजियाबाद के माध्यम से लिखित जवाब दिया गया। प्रार्थना पत्र में उल्लेख है कि जवाब पर साध्वी कंचन सिन्हा के हस्ताक्षर भी हैं।लिखित जवाब में साध्वी कंचन सिन्हा ने कथित तौर पर साफ किया कि उन्होंने न तो उक्त वीडियो बनाया और न ही उसे वायरल किया। जवाब में यह भी कहा गया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने वीडियो को झूठा बनाकर वायरल किया है। यहीं से मामला और पेचीदा हो गया है। क्योंकि यदि वीडियो वास्तव में किसी अज्ञात व्यक्ति ने तैयार कर वायरल किया है, तो उसकी पहचान और वीडियो के मूल स्रोत का पता लगाना अब पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

वीडियो में महिला कौन? मोबाइल नंबर से लेकर पहली बार वायरल होने तक जांच की मांग

अधिवक्ता अरुण भदोरिया ने SSP को दिए प्रार्थना पत्र में जांच के कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए केवल वीडियो को देखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसकी डिजिटल और तकनीकी कड़ी की जांच जरूरी है।

प्रार्थना पत्र में मुख्य रूप से यह पता लगाने की मांग की गई है कि—

  • वायरल वीडियो में दिखाई दे रही महिला वास्तव में कौन है?
  • वीडियो किस व्यक्ति ने बनाया?
  • वीडियो बनाने के लिए किस उपकरण अथवा माध्यम का इस्तेमाल किया गया?
  • वीडियो सबसे पहले किस मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया अकाउंट से वायरल हुआ?
  • हरिद्वार के पत्रकारों तक वीडियो किस नंबर से पहुंचाया गया?
  • वीडियो सबसे पहले किस व्यक्ति ने पत्रकारों को भेजा?
  • वीडियो वायरल करने की शुरुआत कहां से हुई?
  • वीडियो का मूल स्रोत क्या है?
  • वीडियो में कही गई बातों की वास्तविकता क्या है?

अधिवक्ता का कहना है कि इन सभी बिंदुओं की जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो के संबंध में कौन सा पक्ष सही तथ्य सामने रख रहा है।

संतों के संबंध में कही गई कथित बातों की भी जांच की मांग

प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि साध्वी कंचन सिन्हा ने अपने कानूनी जवाब में गुरुदेव गुरु निरंजन पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद जी महाराज, श्री रवींद्र पुरी महाराज, अध्यक्ष अखाड़ा परिषद तथा श्री हरि गिरि जी महाराज, सचिव जूना अखाड़ा के प्रति सम्मान की बात कही है। वहीं, वायरल वीडियो में इन संतों से संबंधित कथित टिप्पणियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसी वजह से अधिवक्ता ने पुलिस से यह जांच कराने की मांग की है कि वीडियो में दिखाई देने वाली महिला कौन है और वीडियो में कही गई कथित बातें वास्तव में किसने कही हैं।

फर्जी वीडियो का दावा, लेकिन अज्ञात व्यक्ति पर कार्रवाई का सवाल

मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि लिखित जवाब में वीडियो को फर्जी बताते हुए किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा तैयार कर वायरल किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में अधिवक्ता ने पुलिस के समक्ष सवाल उठाया है कि यदि वीडियो किसी अज्ञात व्यक्ति ने बनाया और वायरल किया है तो उसकी पहचान के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई?इसी बिंदु को लेकर उन्होंने SSP हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर से पूरे मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने जांच पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर के माध्यम से कराए जाने की मांग की है। अब पुलिस जांच में वीडियो की वास्तविकता, उसके मूल स्रोत, महिला की पहचान, मोबाइल नंबर और वीडियो के शुरुआती प्रसार की कड़ी सामने आती है या नहीं, यह महत्वपूर्ण होगा।

जांच के बाद ही साफ होगी वायरल वीडियो की पूरी कहानी

इस पूरे मामले में फिलहाल दोनों पक्षों से जुड़े दावों को जांच के आधार पर ही देखा जाना होगा। एक ओर कानूनी जवाब में वीडियो बनाने और वायरल करने से इनकार किया गया है, वहीं दूसरी ओर अधिवक्ता ने वीडियो के स्रोत और प्रसार की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है। ऐसे में अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। वीडियो किसने बनाया, उसमें महिला कौन है, वीडियो पहली बार किस नंबर से वायरल हुआ और हरिद्वार के पत्रकारों तक इसे किसने पहुंचाया—इन सवालों के जवाब ही इस विवाद की असली तस्वीर सामने ला सकते हैं।

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