हरिद्वार में ‘समाधान मिशन’ की बड़ी तैयारी! सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत 2026 से पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कसी कमर,, हरिद्वार जनपद से सर्वोच्च न्यायालय में “54 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य” — सचिव सिमरनजीत कौर ने मध्यस्थ अधिवक्ताओं को दिए सुलह-समझौते के जरिए विवाद खत्म कराने के निर्देश,, “महंगे और लंबे मुकदमों से राहत की तैयारी” — विशेष प्री-मीटिंग, संवाद और मध्यस्थता के जरिए आम जनता को मिलेगा त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- हरिद्वार में ‘समाधान मिशन’ की बड़ी तैयारी! सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत 2026 से पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कसी कमर,,
हरिद्वार जनपद से सर्वोच्च न्यायालय में “54 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य” — सचिव सिमरनजीत कौर ने मध्यस्थ अधिवक्ताओं को दिए सुलह-समझौते के जरिए विवाद खत्म कराने के निर्देश,,
“महंगे और लंबे मुकदमों से राहत की तैयारी” — विशेष प्री-मीटिंग, संवाद और मध्यस्थता के जरिए आम जनता को मिलेगा त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय,,

हरिद्वार। न्याय व्यवस्था को अधिक सरल, तेज और जनहितकारी बनाने की दिशा में हरिद्वार में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हो चुकी है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा आगामी 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को आयोजित किए जाने वाले ‘समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) 2026’ की तैयारियों को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरिद्वार ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में गुरुवार शाम 4:00 बजे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सभागार भवन में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के सभी मध्यस्थ अधिवक्ताओं ने भाग लिया।
बैठक की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरिद्वार की सचिव श्रीमती सिमरनजीत कौर ने की। बैठक में आगामी विशेष लोक अदालत की रणनीति, लंबित मामलों के निस्तारण और मध्यस्थता की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान सचिव सिमरनजीत कौर ने बताया कि हरिद्वार जनपद के कुल 54 मामले वर्तमान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में विशेष लोक अदालत के लिए चिन्हित किए गए हैं। इन मामलों को आपसी सुलह और सहमति के माध्यम से हल कराने के लिए व्यापक प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने उपस्थित मध्यस्थ अधिवक्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन मामलों से जुड़े पक्षकारों के साथ संवाद बढ़ाया जाए और उन्हें मध्यस्थता की प्रक्रिया के लाभों के बारे में जागरूक किया जाए, ताकि अधिक से अधिक मामले आपसी समझौते के आधार पर सुलझ सकें।
बैठक में यह भी तय किया गया कि आगामी विशेष लोक अदालत से पहले विशेष प्री-मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों के माध्यम से पक्षकारों को एक मंच पर लाकर विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। उद्देश्य यह रहेगा कि अदालतों में वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों को आपसी सहमति से जल्दी और प्रभावी तरीके से समाप्त किया जा सके।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि लोक अदालतें न केवल न्याय प्रक्रिया को सरल बनाती हैं, बल्कि आम नागरिकों को समय, धन और मानसिक तनाव से भी राहत देती हैं। विशेष लोक अदालत जैसे मंच विवादों के समाधान का ऐसा विकल्प बनकर उभर रहे हैं, जहां अदालत की जटिल प्रक्रिया के बजाय संवाद और समझौते को प्राथमिकता दी जाती है।
अब सभी की निगाहें अगस्त 2026 में आयोजित होने वाले इस विशेष समाधान समारोह पर टिक गई हैं, जहां हरिद्वार से जुड़े कई मामलों के समाधान की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। यदि यह पहल सफल रही तो यह न्याय व्यवस्था को और अधिक जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।



