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उत्तराखंड में मदरसा मान्यता की नई व्यवस्था, 452 में अब तक सिर्फ 7 को मिली मंजूरी,, 30 सितंबर तक मानक पूरे करने की समय सीमा, हरिद्वार में 18 में से 7 मदरसे मान्यता प्राप्त

उत्तराखंड में मदरसा मान्यता की नई व्यवस्था, 452 में अब तक सिर्फ 7 को मिली मंजूरी,,

30 सितंबर तक मानक पूरे करने की समय सीमा, हरिद्वार में 18 में से 7 मदरसे मान्यता प्राप्त

देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव लागू हो चुका है। एक जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड समाप्त कर दिया गया है और उसकी जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से मदरसों की मान्यता और पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। राज्य में करीब 452 पंजीकृत मदरसे हैं, जिन्हें नई व्यवस्था के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप मान्यता हासिल करनी होगी।

नई व्यवस्था का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, गणित और आधुनिक शिक्षा से जोड़ना तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया है। सरकार द्वारा लागू व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को निर्धारित शैक्षणिक मानकों का पालन करना अनिवार्य किया गया है।

जांच से दूरी बनाने वाले संस्थान भी निगरानी के दायरे में

मान्यता की प्रक्रिया के दौरान प्राधिकरण और संबंधित विभागों की ओर से मदरसों का निरीक्षण एवं दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जानकारी के मुताबिक कुछ मदरसों ने जांच प्रक्रिया में अपेक्षित सहयोग नहीं किया, जबकि कुछ संस्थानों की ओर से जांच टीम को जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

ऐसे संस्थानों के लिए मान्यता की प्रक्रिया पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्राधिकरण की ओर से निर्धारित मानकों को पूरा करने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

ऊधमसिंह नगर में 11 आवेदन निरस्त

मान्यता प्रक्रिया में ऊधमसिंह नगर जिले में 11 आवेदन मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण निरस्त किए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि नई व्यवस्था में केवल आवेदन करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संस्थानों को निर्धारित शैक्षणिक, प्रशासनिक और आधारभूत मानकों को भी पूरा करना होगा।

हरिद्वार में 18 में से 7 मदरसों को मान्यता

हरिद्वार में भी मदरसों की मान्यता प्रक्रिया जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 18 आवेदनों में से 7 मदरसों को मान्यता मिल चुकी है, जबकि अन्य संस्थानों की जांच और प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

हालांकि, जुलाई में हुई एक समीक्षा बैठक में हरिद्वार के जिले में संचालित मदरसों की संख्या और आवेदन की स्थिति इससे अलग बताई गई थी। इसलिए अंतिम आंकड़ों के लिए प्राधिकरण की नवीनतम आधिकारिक सूची को आधार माना जाना जरूरी होगा।

देहरादून और नैनीताल में प्रक्रिया बाकी

देहरादून और नैनीताल में भी मान्यता प्रक्रिया अभी आगे बढ़ाई जानी है। प्राधिकरण की ओर से मदरसों को निर्धारित नियमों और मानकों को पूरा करने के लिए समय दिया गया है।

30 सितंबर 2026 तक मानकों को पूरा करने की समय सीमा तय की गई है। इसके बाद जो संस्थान निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके संबंध में प्राधिकरण की ओर से शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

आधुनिक शिक्षा पर सरकार का जोर

सरकार की नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य मदरसा विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। इससे पहले भी सरकार ने कहा था कि नई व्यवस्था का उद्देश्य किसी समुदाय की पहचान या परंपरा को प्रभावित करना नहीं, बल्कि बच्चों को बेहतर और समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है।

नई व्यवस्था में उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड के निर्धारित शैक्षणिक मानकों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने और विद्यार्थियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता पर जोर दिया गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल—कितने मदरसे बचा पाएंगे मान्यता?

मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद अब सभी संबंधित संस्थानों के सामने नई मान्यता व्यवस्था के मानकों को पूरा करने की चुनौती है। 452 मदरसों में से अभी तक केवल 7 को मान्यता मिलने की स्थिति में आने वाले डेढ़ महीने बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

अब सवाल यह है कि 30 सितंबर की समय सीमा तक बाकी मदरसे सभी निर्धारित मानक पूरे कर पाएंगे या नहीं? और जो संस्थान मानकों को पूरा नहीं कर पाएंगे, उनके खिलाफ शासन स्तर पर किस तरह की कार्रवाई होगी—इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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