NEET विवाद के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: छात्र राजनीति से केंद्र सरकार के शीर्ष मंत्री तक का सफर, जानिए कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान? 35 दिन के छात्र आंदोलन के बीच बड़ा फैसला, शिक्षा मंत्री पद से धर्मेन्द्र प्रधान ने दिया इस्तीफा; ओडिशा से दिल्ली तक बनाई मजबूत राजनीतिक पहचान,, ABVP से शुरू हुआ राजनीतिक सफर, पेट्रोलियम, इस्पात, कौशल विकास और शिक्षा मंत्रालय संभाल चुके धर्मेंद्र प्रधान अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में

NEET विवाद के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: छात्र राजनीति से केंद्र सरकार के शीर्ष मंत्री तक का सफर, जानिए कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान?
35 दिन के छात्र आंदोलन के बीच बड़ा फैसला, शिक्षा मंत्री पद से धर्मेन्द्र प्रधान ने दिया इस्तीफा; ओडिशा से दिल्ली तक बनाई मजबूत राजनीतिक पहचान,,
ABVP से शुरू हुआ राजनीतिक सफर, पेट्रोलियम, इस्पात, कौशल विकास और शिक्षा मंत्रालय संभाल चुके धर्मेंद्र प्रधान अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में
नई दिल्ली। देशभर में NEET-UG परीक्षा विवाद, पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की घोषणा उन्होंने सोशल मीडिया पर करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता सर्वोपरि है। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं।
कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान के पुत्र हैं। उन्होंने भुवनेश्वर स्थित उत्कल विश्वविद्यालय से मानवशास्त्र (Anthropology) में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन में ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई।राजनीतिक सक्रियता के चलते वे पहले छात्र संघ के पदाधिकारी बने, फिर भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। वर्ष 2000 में ओडिशा विधानसभा के लिए चुने गए। इसके बाद 2004 में लोकसभा पहुंचे और बाद में बिहार तथा मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य भी रहे। वर्ष 2024 में वे ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए।
मोदी सरकार के भरोसेमंद चेहरों में रही गिनती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में वर्ष 2014 में उन्हें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। बाद में उन्होंने इस्पात मंत्रालय, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का भी नेतृत्व किया। जुलाई 2021 में उन्हें देश का केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया। नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन और शिक्षा क्षेत्र के कई बड़े सुधारों की जिम्मेदारी उनके पास रही।
NEET विवाद बना सबसे बड़ी चुनौती
हाल के महीनों में NEET-UG परीक्षा को लेकर विवाद, कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों ने शिक्षा मंत्रालय को कठघरे में ला दिया। देशभर में छात्रों का आंदोलन तेज हुआ और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग लगातार उठती रही। आखिरकार 35 दिनों तक चले विरोध-प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़ने का फैसला किया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की कमान किसे सौंपेगी। साथ ही छात्रों की मांगों—परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर कठोर कानून और भर्ती प्रक्रिया में सुधार—को लेकर सरकार क्या नए फैसले लेती है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। राजनीतिक जानकार इसे केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के सामने खड़ी बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं।



