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25 दिन, 600 घंटे की पड़ताल और 700 किलोमीटर का पीछा! हरिद्वार पुलिस ने सुलझाया ऐसा ब्लाइंड मर्डर, जिसने अनुभवी अफसरों को भी चौंका दिया,, SSP नवनीत सिंह भुल्लर ने किया सनसनीखेज खुलासा,, चेहरा सड़ा, पहचान मिट चुकी थी, कातिलों ने सोचा था कभी नहीं खुलेगा राज! लेकिन एसएसपी नवनीत सिंह की टीम ने तकनीक और जमीनी जांच से हत्यारों को पहुंचाया सलाखों के पीछे,, प्रेम प्रसंग, शादी का दबाव और मौत की साजिश— चंडी देवी दर्शन के बहाने हरिद्वार लाकर गला घोंटा, भाई और जीजा के साथ मिलकर युवक ने रची थी खौफनाक हत्या की पटकथा

25 दिन, 600 घंटे की पड़ताल और 700 किलोमीटर का पीछा! हरिद्वार पुलिस ने सुलझाया ऐसा ब्लाइंड मर्डर, जिसने अनुभवी अफसरों को भी चौंका दिया,, SSP नवनीत सिंह भुल्लर ने किया सनसनीखेज खुलासा,,

चेहरा सड़ा, पहचान मिट चुकी थी, कातिलों ने सोचा था कभी नहीं खुलेगा राज! लेकिन एसएसपी नवनीत सिंह की टीम ने तकनीक और जमीनी जांच से हत्यारों को पहुंचाया सलाखों के पीछे,,

प्रेम प्रसंग, शादी का दबाव और मौत की साजिश— चंडी देवी दर्शन के बहाने हरिद्वार लाकर गला घोंटा, भाई और जीजा के साथ मिलकर युवक ने रची थी खौफनाक हत्या की पटकथा

हरिद्वार। यह सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं था, बल्कि ऐसा ब्लाइंड मर्डर केस था जिसमें न मृतका की पहचान थी और न ही हत्यारों का कोई सुराग। शव इस हालत में मिला था कि पहचान कर पाना लगभग असंभव था। लेकिन हरिद्वार पुलिस ने धैर्य, तकनीक और लगातार 25 दिनों की अथक मेहनत से उस रहस्य से पर्दा उठा दिया जिसे कातिल हमेशा के लिए दफन समझ बैठे थे।

10 मई 2026 को चंडी देवी मंदिर रोपवे के पास टूटे हुए पैदल मार्ग के किनारे घनी झाड़ियों में एक महिला का निर्वस्त्र शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। शव कई दिन पुराना था। चेहरा पूरी तरह सड़ चुका था और शरीर पर कीड़े-मकोड़े लग चुके थे। पहली नजर में यह स्पष्ट था कि मामला हत्या का है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती थी मृतका की पहचान।

घटनास्थल से पुलिस को दो कुंडल, टूटा हुआ मंगलसूत्र, सफेद गमछा और महिला के गले में कसकर बंधा ब्लाउज मिला। शुरुआती जांच में गला घोंटकर हत्या किए जाने की आशंका मजबूत हुई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया और तत्काल विशेष टीम गठित की। पूरे प्रकरण की निगरानी की जिम्मेदारी एसपी क्राइम निशा यादव को सौंपी गई, जबकि तकनीकी विवेचना का जिम्मा सीआईयू को दिया गया।

पुलिस के सामने दो बड़ी चुनौतियां थीं— पहली मृतका की पहचान और दूसरी हत्यारों तक पहुंचना।

टैटू बने पहचान की पहली कड़ी

जब शव का चेहरा पहचानने लायक नहीं बचा था, तब पुलिस को मृतका के हाथों पर बने टैटू महत्वपूर्ण सुराग के रूप में मिले। दाहिने हाथ पर अंग्रेजी में “KAUSHILYA” और एक फूलदान बना था। बाएं हाथ पर दिल के आकार में K.R. और अलग से R अंकित था, जबकि हथेली के पीछे ॐ का निशान गुदा हुआ था।

यही निशान आगे चलकर इस जटिल पहेली को सुलझाने की पहली कड़ी बने।

पुलिस ने डीसीआरबी, एससीआरबी और एनसीआरबी समेत तमाम एजेंसियों से संपर्क किया, लेकिन शुरुआती 72 घंटे तक कोई सफलता नहीं मिली। पहचान नहीं होने पर शव का अंतिम संस्कार कराया गया और अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।

164 कौशल्या, 3540 रिकॉर्ड और लाखों नंबरों की जांच

मामले को सुलझाने के लिए पुलिस ने देशभर में दर्ज “कौशल्या” नाम की गुमशुदगी रिपोर्टों को खंगालना शुरू किया। जांच में वर्ष 2019 से अब तक कुल 164 कौशल्या नाम की महिलाओं की गुमशुदगी का डेटा सामने आया।

इतना ही नहीं, निर्वाचन रिकॉर्ड में दर्ज 3540 महिलाओं के विवरण भी खंगाले गए। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर कौशल्या नाम की महिलाओं से संबंधित जानकारी जुटाती रही।

इस दौरान पुलिस ने एसआईआर डाटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और तकनीकी विश्लेषण के जरिए करीब 1 लाख 64 हजार 605 मोबाइल नंबरों का अध्ययन किया। ट्रूकॉलर और अन्य तकनीकी माध्यमों से संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान का प्रयास जारी रहा।

600 घंटे की फुटेज ने खोला राज

मामले की जांच में सबसे बड़ी बाधा यह थी कि आंधी-तूफान के कारण आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरे क्षतिग्रस्त हो चुके थे। इसके बावजूद पुलिस ने 1 मई से 10 मई तक के लगभग 600 घंटे से अधिक फुटेज का विश्लेषण किया।

घटनास्थल के पांच किलोमीटर दायरे में मौजूद कैमरों, धर्मशालाओं, होटलों, आश्रमों और होमस्टे का सत्यापन किया गया।

आखिरकार 8 मई की सीमित फुटेज में एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। रात के समय तीन युवक और एक महिला चंडी देवी की ओर जाते दिखाई दिए। लेकिन लौटते समय महिला उनके साथ नहीं थी।

यहीं से जांच ने निर्णायक मोड़ ले लिया।

हरिद्वार से बुंदेलखंड तक पहुंची जांच

फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स के विश्लेषण के बाद पुलिस की नजर उत्तर प्रदेश के बांदा जिले पर जाकर ठहर गई।

लगभग 700 किलोमीटर दूर बुंदेलखंड क्षेत्र में पुलिस टीम पहुंची और वहां से तीन संदिग्धों— राकेश, रामप्रकाश उर्फ गोविंदा और छेदीलाल— को हिरासत में लिया गया।

सख्ती से पूछताछ करने पर पूरा हत्याकांड सामने आ गया।

प्रेम प्रसंग बना मौत की वजह

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि मृतका कौशल्या और आरोपी रामप्रकाश के बीच प्रेम संबंध थे। रामप्रकाश पहले से शादीशुदा था, लेकिन कौशल्या उस पर लगातार शादी करने का दबाव बना रही थी।

यही दबाव रामप्रकाश को अखरने लगा। उसने अपने भाई राकेश और जीजा छेदीलाल के साथ मिलकर कौशल्या को रास्ते से हटाने की साजिश रची।

योजना के तहत कौशल्या को चंडी देवी दर्शन कराने के बहाने हरिद्वार लाया गया। आरोपियों को लगा कि सैकड़ों किलोमीटर दूर अंजान शहर में हत्या कर शव फेंक देने से पहचान कभी नहीं हो पाएगी।

चंडी देवी क्षेत्र के सुनसान और प्रतिबंधित रास्ते पर ले जाकर तीनों ने मिलकर कौशल्या का गला घोंट दिया और शव झाड़ियों में फेंककर फरार हो गए।

लेकिन कातिल यह नहीं जानते थे कि हरिद्वार पुलिस उनकी इस साजिश को भी बेनकाब कर देगी।

एसएसपी नवनीत सिंह की रणनीति बनी सफलता की कुंजी

इस पूरे ऑपरेशन में तकनीकी विश्लेषण, मानव खुफिया तंत्र और फील्ड जांच का बेहतरीन समन्वय देखने को मिला।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में पुलिस टीम ने दिन-रात एक कर दिया। 25 दिनों तक लगातार जुटी टीम ने लाखों मोबाइल नंबरों, हजारों रिकॉर्ड और सैकड़ों घंटों की फुटेज खंगालकर आखिरकार ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा कर दिया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह हाल के वर्षों में हरिद्वार के सबसे चुनौतीपूर्ण हत्याकांडों में से एक था।

पुलिस टीम को मिला सम्मान

इस शानदार सफलता पर पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र ने पुलिस टीम को 5 हजार रुपये और एसएसपी हरिद्वार ने 2500 रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

पुलिस का कहना है कि यह सफलता तकनीकी विवेचना, धैर्य और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।

गिरफ्तार आरोपी

  • राकेश पुत्र राजा निवासी बांदा, उत्तर प्रदेश
  • रामप्रकाश उर्फ गोविंदा पुत्र राजा निवासी बांदा, उत्तर प्रदेश
  • छेदीलाल पुत्र ईशूरी प्रसाद निवासी बांदा, उत्तर प्रदेश

बरामदगी

  • 03 एंड्रॉयड मोबाइल फोन
  • 01 पिठ्ठू बैग

हरिद्वार पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से सबूत मिटाने की कोशिश कर लें, आधुनिक तकनीक, सतर्क जांच और मजबूत पुलिसिंग के सामने उनका बच निकलना आसान नहीं है। जिस हत्या को कातिलों ने “बिना पहचान और बिना सुराग” वाला अपराध समझा था, उसी मामले को हरिद्वार पुलिस ने देशभर में चर्चा का विषय बना दिया।

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