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‘नॉन-RTO’ स्कूटी के खेल पर परिवहन विभाग का शिकंजा! दो इलेक्ट्रिक स्कूटियां जब्त—स्पीड और मोटर पावर में गड़बड़ी का शक स्पीड-मोटर की खुलने लगी पोल—अब विक्रेताओं की बारी….. ‘बिना लाइसेंस-बिना रजिस्ट्रेशन’ के नाम पर धड़ल्ले से बिक्री का आरोप, तकनीकी जांच में खुलेगा राज; विक्रेताओं से मांगा जवाब—गलती साबित हुई तो मोटर व्हीकल एक्ट में होगी कड़ी कार्रवाई

बिना रजिस्ट्रेशन-बिना लाइसेंस के नाम पर बिक्री का मामला गरमाया, तकनीकी जांच में सामने आएगी असली कहानी; डीएम मयूर दीक्षित के निर्देश पर नेहा झा-निखिल शर्मा की टीम ने कसा शिकंजा

‘नॉन-RTO’ स्कूटी के खेल पर परिवहन विभाग का शिकंजा! दो इलेक्ट्रिक स्कूटियां जब्त—स्पीड और मोटर पावर में गड़बड़ी का शक स्पीड-मोटर की खुलने लगी पोल—अब विक्रेताओं की बारी…..

‘बिना लाइसेंस-बिना रजिस्ट्रेशन’ के नाम पर धड़ल्ले से बिक्री का आरोप, तकनीकी जांच में खुलेगा राज; विक्रेताओं से मांगा जवाब—गलती साबित हुई तो मोटर व्हीकल एक्ट में होगी कड़ी कार्रवाई

हरिद्वार, 06 अक्टूबर 2026।
हरिद्वार में ‘नॉन-RTO’ के नाम पर बिक रही इलेक्ट्रिक स्कूटियों के खेल ने परिवहन विभाग की नींद उड़ा दी है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर परिवहन विभाग ने ऐसी इलेक्ट्रिक स्कूटियों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है, जिन्हें विक्रेताओं द्वारा बिना आरटीओ पंजीकरण और बिना लाइसेंस के चलने योग्य बताकर बेचा जा रहा है। कार्रवाई के दौरान दो इलेक्ट्रिक स्कूटियां तकनीकी परीक्षण के लिए जब्त की गई हैं।

स्पीड का खेल या नियमों की धज्जियां? अब मशीन खोलकर होगा सच का टेस्ट

सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन नेहा झा और सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन निखिल शर्मा के संयुक्त नेतृत्व में चलाए गए अभियान में इलेक्ट्रिक स्कूटियों की तकनीकी स्थिति की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में कुछ वाहनों में पंजीकरण से छूट वाली श्रेणी के लिए निर्धारित गति और मोटर पावर से जुड़े मानकों के उल्लंघन के संकेत मिले।इसके बाद विभाग ने दो स्कूटियों को कब्जे में लेकर विस्तृत तकनीकी जांच के लिए भेज दिया। अब इन वाहनों की अधिकतम स्पीड, मोटर पावर, मॉडल का परीक्षण प्रमाणपत्र और प्रमाणित तकनीकी specifications का मिलान किया जाएगा।

यही नहीं, यह भी खंगाला जाएगा कि कहीं स्कूटी की रफ्तार बढ़ाने के लिए उसके मोटर, कंट्रोलर या अन्य तकनीकी उपकरणों में कोई अनधिकृत बदलाव तो नहीं किया गया।

‘इलेक्ट्रिक है तो नॉन-RTO है’—यह फॉर्मूला नहीं चलेगा! विक्रेताओं से मांगा स्पष्टीकरण

परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि केवल इलेक्ट्रिक वाहन होने या दुकानदार द्वारा उसे ‘नॉन-RTO’ बताए जाने से पंजीकरण से छूट नहीं मिल जाती। इसके लिए निर्धारित तकनीकी शर्तों को पूरा करना और अधिकृत परीक्षण संस्था से आवश्यक प्रमाणन होना जरूरी है।

जिन स्कूटियों की वास्तविक तकनीकी क्षमता निर्धारित सीमा से अधिक पाई जाती है, उन पर सामान्य मोटर वाहन नियम लागू हो सकते हैं। ऐसे मामलों में पंजीकरण, उपयुक्त ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा और अन्य वैधानिक आवश्यकताओं का पालन जरूरी होगा।

विभाग ने संबंधित विक्रेताओं से भी स्पष्टीकरण मांगा है। यानी अब सिर्फ दुकान पर खड़ी स्कूटी नहीं, बल्कि उसके पीछे का दस्तावेजी और तकनीकी पूरा खेल जांच के दायरे में है।

‘बिना लाइसेंस चलाओ’ का लालच पड़ सकता है भारी! बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल

सबसे बड़ा खतरा उन खरीदारों के लिए है जो विज्ञापन या दुकानदार के मौखिक आश्वासन पर ऐसी स्कूटी खरीद लेते हैं और उसे कम गति वाला वाहन समझकर चला देते हैं। खासकर नाबालिग और अनुभवहीन चालकों के हाथों में यदि वाहन की वास्तविक गति अधिक निकली तो अचानक ब्रेक, मोड़ या आपात स्थिति में नियंत्रण खोने का खतरा बढ़ सकता है।

विभाग ने अभिभावकों और खरीदारों से अपील की है कि वे स्कूटी खरीदने से पहले उसके अधिकतम गति मानक, मोटर पावर, अधिकृत परीक्षण प्रमाणपत्र और पंजीकरण से छूट का आधार जरूर जांचें।

अब होगी ‘स्पीड टेस्ट’ की असली परीक्षा

तकनीकी जांच में यदि यह साबित होता है कि किसी वाहन को निर्धारित क्षमता से अधिक गति देने के लिए उसमें छेड़छाड़ की गई है या ग्राहक को पंजीकरण एवं लाइसेंस के नियमों को लेकर भ्रामक जानकारी दी गई है, तो संबंधित विक्रेता और अन्य जिम्मेदार लोगों पर मोटर यान अधिनियम, 1988 और लागू नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

परिवहन विभाग की यह कार्रवाई साफ संकेत दे रही है कि ‘नॉन-RTO’ के नाम पर नियमों से बचने का खेल अब आसानी से नहीं चलेगा। दो स्कूटियां जब्त हो चुकी हैं, तकनीकी जांच शुरू है और विक्रेताओं के जवाब का इंतजार है। अब असली पर्दा तकनीकी रिपोर्ट उठाएगी—स्कूटी सच में नियमों के दायरे में है या ‘नॉन-RTO’ के नाम पर ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा था।

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