सशक्त पंचायतों से बनेगा विकसित उत्तराखण्ड! हरिद्वार में पुष्कर सिंह धामी का ‘गांव कनेक्ट’ मिशन, 60 हजार पंचायत प्रतिनिधियों को दिया विकास का मंत्र…. सीएम धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों को दिखाया विकास का रोडमैप—‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ के साथ मैदान में उतरने का आह्वान, बोले- पंचायत का पैसा जनता का पैसा, एक-एक पाई का हिसाब देना होगा
मंच पर दिखी पूरी सरकारी मशीनरी कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, रानीपुर विधायक आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल, आदेश सैनी, ब्लॉक प्रमुख बहादराबाद आशा नेगी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी प्रशासन जितेंद्र कुमार, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। धामी का संदेश साफ—कागज नहीं, जमीन पर दिखे विकास

सशक्त पंचायतों से बनेगा विकसित उत्तराखण्ड! हरिद्वार में पुष्कर सिंह धामी का ‘गांव कनेक्ट’ मिशन, 60 हजार पंचायत प्रतिनिधियों को दिया विकास का मंत्र….
सीएम धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों को दिखाया विकास का रोडमैप—‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ के साथ मैदान में उतरने का आह्वान, बोले- पंचायत का पैसा जनता का पैसा, एक-एक पाई का हिसाब देना होगा

हरिद्वार। उत्तराखण्ड के गांवों की तस्वीर बदलने की पटकथा अब पंचायतों के आंगन में लिखने की तैयारी है। गुरुवार को हरिद्वार में आयोजित त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं क्षमता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों को विकास का सीधा मंत्र दिया—“मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी।”
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सशक्त पंचायतें ही विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव हैं। प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ना गांवों के विकास को नई दिशा देने वाला बड़ा कदम है।
गांव की सरकार को मिला सीधा ‘एक्शन प्लान’
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों को लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच मजबूत सेतु हैं। गांव की असली जरूरत को सबसे करीब से पंचायत प्रतिनिधि ही समझते हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनकी भूमिका निर्णायक है।
उन्होंने प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे केवल योजनाएं बनाने तक सीमित न रहें, बल्कि योजना जमीन पर उतरी या नहीं, उसका लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं—इसकी जिम्मेदारी भी लें।मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत विकास योजनाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जनभागीदारी और स्थानीय जरूरतों के आधार पर तैयार होनी चाहिए। ग्राम सभा में लोगों की राय ली जाए और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और परिणाम तय किए जाएं।
पानी, सड़क, सफाई, शिक्षा और स्वास्थ्य—गांव की पहली प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने पंचायतों को विकास का स्पष्ट एजेंडा देते हुए कहा कि प्रत्येक पंचायत की योजना में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि विकास का मतलब केवल बड़ी-बड़ी योजनाएं नहीं, बल्कि ग्रामीणों के रोजमर्रा के जीवन में वास्तविक बदलाव है। जिस सड़क से ग्रामीण गुजरते हैं, उसकी गुणवत्ता कैसी है? जिस पेयजल योजना पर पैसा खर्च हुआ, उससे कितने घरों को पानी मिल रहा है? पंचायत भवन में ग्रामीणों को कौन-कौन सी सेवाएं मिल रही हैं? इन सवालों का जवाब पंचायत प्रतिनिधियों को तलाशना होगा।
‘पंचायत का पैसा जनता का पैसा’—धामी का दो टूक संदेश
मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर बेहद स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और उसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति और विकास कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री ने डिजिटल पंचायत व्यवस्था को पारदर्शिता और प्रभावी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि विकास कार्यों की संख्या गिनाने से ज्यादा जरूरी यह देखना है कि उस काम का असर गांव के लोगों की जिंदगी पर कितना पड़ा।
56 हजार प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण, 5,972 पंचायत भवन बने ग्राम सचिवालय
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रदेश की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं।पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 भवनों की मरम्मत की गई है। वहीं एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी किया जा चुका है।सरकार का लक्ष्य पंचायतों को केवल स्थानीय निकाय नहीं, बल्कि गांव के विकास की प्रभावी नेतृत्वकारी संस्था बनाना है।
स्वच्छ गांव की जिम्मेदारी भी पंचायतों के कंधों पर
मुख्यमंत्री ने स्वच्छता को विकास का अभिन्न हिस्सा बताते हुए पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों में नियमित सफाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया।ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिला पंचायतों को ग्रामीण मोटर मार्गों और स्थानीय बाजारों की सफाई के लिए कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। विकासखंड स्तर पर भी विशेष मशीनों की व्यवस्था की गई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल मशीनें देने से गांव साफ नहीं होंगे। स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ना होगा।
महिला, किसान और स्थानीय उत्पाद—गांव की अर्थव्यवस्था का नया इंजन
धामी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पाद और पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि गांव में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सहित कई कदम उठाए गए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ-साथ गांवों की सांस्कृतिक विरासत को बचाना भी जरूरी है।
मदन कौशिक बोले—पंचायतें मजबूत होंगी तो गांव बदलेगा
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में पंचायतों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सड़क, बिजली, पंचायत भवन, विद्यालय और अन्य विकास योजनाओं का लाभ पंचायतों के माध्यम से लोगों तक पहुंचता है।उन्होंने कहा कि पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व और सक्रियता बढ़ने से गांवों में बड़ा बदलाव आएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चल रहे सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से भी गांवों में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
मंच पर दिखी पूरी सरकारी मशीनरी
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, रानीपुर विधायक आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल, आदेश सैनी, ब्लॉक प्रमुख बहादराबाद आशा नेगी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी प्रशासन जितेंद्र कुमार, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
धामी का संदेश साफ—कागज नहीं, जमीन पर दिखे विकास
हरिद्वार के इस पंचायत प्रशिक्षण कार्यक्रम से मुख्यमंत्री धामी ने साफ संकेत दिया कि अब गांवों के विकास की कसौटी फाइलों में दर्ज आंकड़े नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला बदलाव होगा।
पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देकर सरकार ने जिम्मेदारी उनके कंधों पर रख दी है। अब बारी गांव की सरकार की है—योजनाएं बनें, काम हों, गुणवत्ता दिखे, पैसा बचे और सबसे अहम… हर पात्र ग्रामीण तक विकास का लाभ पहुंचे।
यही ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ का असली इम्तिहान होगा और इसी से विकसित उत्तराखण्ड की अगली तस्वीर तय होगी।



