दरगाह कलियर में हलवा पराठा/सोहन हलवा और विवादित शीरमाल आदेश….. ठेका ‘फ्रेंचाइजी मॉडल’ पर बड़ा सवाल, आखिर कार्रवाई कब? एक दुकान के ठेके पर आधा दर्जन दुकानों से कारोबार की चर्चा, दरगाह प्रशासन की चुप्पी से उठ रहे गंभीर सवाल,, शीरमाल आदेश विवाद और अब ठेका व्यवस्था, ‘फ्रेंचाइजी मॉडल’ राजस्व और नियमों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज,, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की निगरानी और कार्यवाही का wait……

दरगाह कलियर में हलवा पराठा/सोहन हलवा और विवादित शीरमाल आदेश….. ठेका ‘फ्रेंचाइजी मॉडल’ पर बड़ा सवाल, आखिर कार्रवाई कब?
एक दुकान के ठेके पर आधा दर्जन दुकानों से कारोबार की चर्चा, दरगाह प्रशासन की चुप्पी से उठ रहे गंभीर सवाल,,
शीरमाल आदेश विवाद और अब ठेका व्यवस्था, ‘फ्रेंचाइजी मॉडल’ राजस्व और नियमों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज,,
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की निगरानी और कार्यवाही का wait……

इन्तजार रजा, पिरान कलियर/हरिद्वार…. विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत साबिर पाक कलियर में सोहन हलवा, हलवा परांठा और शीरमाल से जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की द्वारा स्पष्ट किए जाने के बावजूद कि किसी भी ठेकेदार को दूसरे दुकानदारों की शीरमाल बिक्री रोकने का अधिकार नहीं है, अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि स्थिति स्पष्ट है तो पूरे मामले में अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मामला अब केवल शीरमाल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरी ठेका व्यवस्था की पारदर्शिता, नियमों के पालन और दरगाह के राजस्व से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है।
सबसे अधिक चर्चा उस दावे को लेकर है जिसमें कहा जा रहा है कि जिस ठेके का आवंटन केवल दुकान संख्या-6 के लिए किया गया था, उसी के नाम पर कथित रूप से कई अन्य स्थानों से भी कारोबार संचालित किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इसे ‘फ्रेंचाइजी मॉडल’ के रूप में संचालित किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इस दावे की अभी तक किसी सक्षम अधिकारी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
यही वह बिंदु है जिस पर व्यापारी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यह चर्चा निराधार है तो प्रशासन इसे सार्वजनिक रूप से खारिज करे और यदि इसमें सच्चाई है तो फिर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या एक दुकान के ठेके के आधार पर अन्य स्थानों से कारोबार की अनुमति दी गई है। यदि अनुमति दी गई है तो उसका आदेश सार्वजनिक किया जाए और यदि अनुमति नहीं है तो कथित अतिरिक्त संचालन पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

छोटे दुकानदारों का आरोप है कि वर्षों से वे अपनी रोजी-रोटी इसी कारोबार से चला रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी एक पक्ष को अनुचित लाभ मिलता है तो इसका सीधा असर दर्जनों परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से समान नियम लागू करने और किसी भी प्रकार के कथित सिंडिकेट या अवैध दबाव की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब स्थानीय लोगों की निगाहें मुख्य प्रशासक, दरगाह प्रबंधन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। उनका कहना है कि इस पूरे विवाद को केवल मौखिक बयानों तक सीमित रखने के बजाय दस्तावेजों, ठेका शर्तों और वास्तविक संचालन की जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।
दरगाह पिरान कलियर जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक संस्था में ठेका व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होना आवश्यक है। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है तो प्रशासन को जांच कर सभी आशंकाओं का अंत करना चाहिए। वहीं यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। यही कदम दरगाह की व्यवस्था, राजस्व और आम व्यापारियों के विश्वास को मजबूत करेगा।



