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देहरादून पुलिस के शिकंजे में फर्जी IPS अधिकारी,, RAW, CRPF और सेना का वरिष्ठ अफसर बनकर करता था करोड़ों की ठगी, एसएसपी की सटीक रणनीति से यशोवर्धन गिरफ्तार,, फर्जी आईडी, वर्दियां, विजिटिंग कार्ड, वायरलेस सेट और पुलिस-आर्मी के लोगो बरामद, कई और मामलों के खुलासे की उम्मीद

देहरादून पुलिस के शिकंजे में फर्जी IPS अधिकारी,,

RAW, CRPF और सेना का वरिष्ठ अफसर बनकर करता था करोड़ों की ठगी, एसएसपी की सटीक रणनीति से यशोवर्धन गिरफ्तार,,

फर्जी आईडी, वर्दियां, विजिटिंग कार्ड, वायरलेस सेट और पुलिस-आर्मी के लोगो बरामद, कई और मामलों के खुलासे की उम्मीद

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग का पर्दाफाश किया है, जिसने खुद को कभी भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का अधिकारी, कभी RAW एजेंट, कभी CRPF का वरिष्ठ अफसर और कभी सेना का अधिकारी बताकर लोगों को अपने प्रभाव में लिया और लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। देहरादून पुलिस की सटीक रणनीति के तहत मसूरी रोड स्थित सीएसआई तिराहे से आरोपी यशोवर्धन को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी यशोवर्धन एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी का पुत्र है। उसका सपना भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित होकर वर्दी पहनने का था। उसने UPSC परीक्षा की तैयारी भी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अधिकारी बनने का सपना टूटने के बाद उसने गलत रास्ता चुन लिया और खुद को फर्जी IPS अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर लोगों को ठगना शुरू कर दिया।

कभी IPS तो कभी RAW एजेंट बनकर जमाता था रौब

पूछताछ में सामने आया कि आरोपी लोगों को प्रभावित करने के लिए अलग-अलग विभागों का वरिष्ठ अधिकारी बनकर अपना परिचय देता था। वह कभी खुद को IPS अधिकारी बताता, कभी RAW का एजेंट, कभी CRPF का वरिष्ठ अधिकारी तो कभी सेना का उच्च अधिकारी। अपनी बातों और फर्जी दस्तावेजों के दम पर वह लोगों का विश्वास जीत लेता और फिर नौकरी दिलाने, सरकारी टेंडर दिलाने, बड़े अधिकारियों से संपर्क कराने तथा सरकारी काम करवाने का झांसा देकर मोटी रकम ऐंठ लेता था।

दो बड़े धोखाधड़ी मामलों में हुई गिरफ्तारी

पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ 15 लाख रुपये और 4.60 लाख रुपये की धोखाधड़ी के दो मामले दर्ज हैं। इन मामलों की जांच के दौरान पुलिस को आरोपी की गतिविधियों की जानकारी मिली। एसएसपी देहरादून के निर्देशन में विशेष रणनीति तैयार की गई और पुलिस टीम ने आरोपी को मसूरी रोड स्थित सीएसआई तिराहे से गिरफ्तार कर लिया।

फर्जी पहचान बनाकर करता था लोगों को गुमराह

गिरफ्तार आरोपी ने खुद को प्रभावशाली अधिकारी साबित करने के लिए कई फर्जी दस्तावेज तैयार कर रखे थे। पुलिस ने उसके कब्जे से विभिन्न एजेंसियों के 5 फर्जी पहचान पत्र, 8 फर्जी विजिटिंग कार्ड, 3 वर्दियां, वायरलेस सेट, लैपटॉप तथा पुलिस और सेना से जुड़े 25 लोगो बरामद किए हैं। इन्हीं सामानों का उपयोग कर वह लोगों के बीच अपनी झूठी पहचान स्थापित करता था और आसानी से उन्हें अपने झांसे में ले लेता था।

करोड़ों की ठगी की आशंका

देहरादून पुलिस का मानना है कि आरोपी ने केवल दो मामलों में ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों से भी इसी तरह ठगी की हो सकती है। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप, बैंक खातों, सोशल मीडिया गतिविधियों और संपर्कों की गहन जांच कर रही है ताकि उसके नेटवर्क और अन्य पीड़ितों का पता लगाया जा सके।

सोशल मीडिया और फर्जी पहचान का उठाया फायदा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करता था। वह फर्जी विजिटिंग कार्ड, पहचान पत्र और वर्दी के जरिए खुद को प्रभावशाली अधिकारी साबित करता था। कई बार वह सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी अधिकारी जैसी वर्दी पहनकर पहुंचता था, जिससे लोग उसकी बातों पर आसानी से विश्वास कर लेते थे।

एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोभाल की रणनीति से मिली बड़ी सफलता

देहरादून पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से पुलिस की निगरानी में था। पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई को देहरादून पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि आरोपी लंबे समय से फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को ठग रहा था।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि नौकरी, सरकारी टेंडर, ट्रांसफर, नियुक्ति या किसी सरकारी कार्य के नाम पर यदि कोई व्यक्ति खुद को बड़ा अधिकारी बताकर धन की मांग करता है, तो उसकी पहचान और दावों का सत्यापन अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या फर्जी अधिकारी की सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस हेल्पलाइन पर दें।

देहरादून पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और पूछताछ के आधार पर अन्य पीड़ितों तथा संभावित सहयोगियों की भी तलाश की जा रही है। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

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