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Uttarakhand Land Pooling Policy 2025,, हरिद्वार में तीन नए शहरों बनाने को लेकर विकास का रास्ता साफ, प्रोपर्टी बाजार में आई नई रफ्तार,, लैंड पुलिंग नियमावली से बदलेगा शहरी स्वरूप, किसानों-भूमि मालिकों को मिलेगा सीधा लाभ,हरिद्वार के विकास और प्रोपर्टी बाजार को मिलेगी नई उड़ान

उत्तराखंड सरकार की नई लैंड पुलिंग नीति 2025 ने हरिद्वार के शहरी विकास की दिशा ही बदल दी है। इस नीति के लागू होने के साथ ही हरिद्वार में तीन नए शहरों के विकास का रास्ता साफ हो गया है। सरकार के इस बड़े फैसले के बाद न केवल योजनाबद्ध शहरी विस्तार को गति मिलेगी, बल्कि प्रोपर्टी बाजार में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। रियल एस्टेट से जुड़े निवेशकों, बिल्डरों और जमीन मालिकों में नई उम्मीद जगी है। सरकार का दावा है कि यह नीति भूमि अधिग्रहण की पुरानी विवादास्पद प्रक्रिया को पीछे छोड़ते हुए, आपसी सहमति और साझेदारी के मॉडल पर आधारित है। इससे विकास भी होगा और जमीन मालिकों के हित भी सुरक्षित रहेंगे। क्या है उत्तराखंड की नई लैंड पुलिंग नीति 2025

इन्तजार रजा हरिद्वार Uttarakhand Land Pooling Policy 2025,,

हरिद्वार में तीन नए शहरों बनाने को लेकर विकास का रास्ता साफ, प्रोपर्टी बाजार में आई नई रफ्तार,,

लैंड पुलिंग नियमावली से बदलेगा शहरी स्वरूप, किसानों-भूमि मालिकों को मिलेगा सीधा लाभ,,

हरिद्वार के विकास और प्रोपर्टी बाजार को मिलेगी नई उड़ान

हरिद्वार।
उत्तराखंड सरकार की नई लैंड पुलिंग नीति 2025 ने हरिद्वार के शहरी विकास की दिशा ही बदल दी है। इस नीति के लागू होने के साथ ही हरिद्वार में तीन नए शहरों के विकास का रास्ता साफ हो गया है। सरकार के इस बड़े फैसले के बाद न केवल योजनाबद्ध शहरी विस्तार को गति मिलेगी, बल्कि प्रोपर्टी बाजार में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। रियल एस्टेट से जुड़े निवेशकों, बिल्डरों और जमीन मालिकों में नई उम्मीद जगी है।

सरकार का दावा है कि यह नीति भूमि अधिग्रहण की पुरानी विवादास्पद प्रक्रिया को पीछे छोड़ते हुए, आपसी सहमति और साझेदारी के मॉडल पर आधारित है। इससे विकास भी होगा और जमीन मालिकों के हित भी सुरक्षित रहेंगे।

क्या है उत्तराखंड की नई लैंड पुलिंग नीति 2025

नई लैंड पुलिंग स्कीम के तहत प्राधिकरण जमीन मालिकों से आपसी सहमति से भूमि लेगा। इसके बदले जमीन देने वालों को उसी क्षेत्र में विकसित प्लॉट लौटाए जाएंगे। यानी जमीन भी आपकी, विकास भी आपके हिस्से में।

नीति के अनुसार—

  • जमीन मालिकों को उनकी भूमि के बदले 24 प्रतिशत तक विकसित रिहायशी प्लॉट दिए जाएंगे।
  • इसके साथ 7 प्रतिशत विकसित कॉमर्शियल प्लॉट भी मिलेगा।
  • यदि कोई जमीन मालिक कॉमर्शियल प्लॉट नहीं लेना चाहता, तो उसे इसके बदले 14 प्रतिशत अतिरिक्त रिहायशी प्लॉट दिए जाएंगे।

सरकार ने उन लोगों के लिए भी विकल्प रखा है, जो विकसित प्लॉट लेने की बजाय नकद मुआवजा चाहते हैं।

  • रिहायशी प्लॉट न मिलने की स्थिति में सर्किल रेट का दोगुना मुआवजा
  • कॉमर्शियल प्लॉट के बदले सर्किल रेट का तीन गुना भुगतान किया जाएगा।

यह व्यवस्था जमीन मालिकों को आर्थिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित बनाती है।

विशेष श्रेणी की जमीन और छोटे भूमि मालिकों को राहत

नीति में उन जमीनों का भी विशेष ध्यान रखा गया है, जिन्हें कानूनी रूप से किसी अन्य के नाम ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

  • ऐसी भूमि के मालिकों को 22 प्रतिशत विकसित रिहायशी और 6 प्रतिशत विकसित कॉमर्शियल जमीन दी जाएगी।

वहीं छोटे भूमि मालिकों के लिए सरकार ने अलग प्रावधान किया है—

  • जिनके पास 250 वर्गमीटर से कम भूमि है, उन्हें जमीन के बदले सर्किल रेट के अनुसार नकद मुआवजा मिलेगा।
    यह प्रावधान छोटे किसानों और सीमांत भूमि धारकों को नुकसान से बचाने के लिए अहम माना जा रहा है।

आजीविका भत्ता और तय समयसीमा में पूरी होगी प्रक्रिया

लैंड पुलिंग नीति के तहत जमीन देने वाले लोगों को आजीविका भत्ता भी दिया जाएगा—

  • गैर कृषि भूमि पर 12 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रतिमाह
  • कृषि भूमि पर 6 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रतिमाह

यह भत्ता अधिकतम तीन वर्षों तक मिलेगा और इसका भुगतान तीन वार्षिक किस्तों में किया जाएगा।

  • कुल राशि का 25 से 30 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किया जाएगा, जिससे भूमि मालिकों को तुरंत राहत मिलेगी।

नीति के तहत पूरी प्रक्रिया को 13 चरणों में बांटा गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे—

  • 90 दिनों में बेस मैप और ड्राफ्ट लेआउट तैयार होगा
  • 15 दिनों में आपत्तियों की सुनवाई
  • 15 दिनों में अंतिम लेआउट का प्रकाशन
  • 30 दिनों में अधिग्रहित भूमि का हस्तांतरण

सभी रिकॉर्ड अपडेट करने और पुनर्गठित प्लॉट जारी करने की जिम्मेदारी पूरी तरह प्राधिकरण की होगी, जिससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

हरिद्वार के विकास और प्रोपर्टी बाजार को मिलेगी नई उड़ान

विशेषज्ञों का मानना है कि लैंड पुलिंग नीति से हरिद्वार में योजनाबद्ध शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा। अव्यवस्थित कॉलोनियों, संकरी सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी। नए शहरों में चौड़ी सड़कें, पार्क, व्यावसायिक केंद्र, स्कूल-अस्पताल जैसी सुविधाएं पहले से नियोजित होंगी।

इस नीति के बाद हरिद्वार का रियल एस्टेट बाजार पहले ही सक्रिय हो गया है। जमीनों के दाम बढ़ने लगे हैं और निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, Uttarakhand Land Pooling Policy 2025 हरिद्वार के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि भविष्य के स्मार्ट और सुव्यवस्थित शहरों की नींव साबित होती नजर आ रही है। यह नीति विकास, निवेश और विश्वास—तीनों का मजबूत संदेश लेकर आई है।

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