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ई-रिक्शा व्यवस्था पर प्रशासन का बड़ा एक्शन,, हरिद्वार शहर को पांच जोन में बांटने की तैयारी, अब अपने क्षेत्रौ से बाहर नहीं दौड़ेंगे ई-रिक्शा,, सत्यापन, स्टीकर और आईडी के बिना 21 फरवरी के बाद सड़कों पर उतरना होगा मुश्किल,, दो चरणों में लागू हो रही है सख्त SOP

इन्तजार रजा हरिद्वार- ई-रिक्शा व्यवस्था पर प्रशासन का बड़ा एक्शन,,
हरिद्वार शहर को पांच जोन में बांटने की तैयारी, अब अपने क्षेत्रौ से बाहर नहीं दौड़ेंगे ई-रिक्शा,,
सत्यापन, स्टीकर और आईडी के बिना 21 फरवरी के बाद सड़कों पर उतरना होगा मुश्किल,,

दो चरणों में लागू हो रही है सख्त SOP

हरिद्वार।
लगातार बिगड़ती यातायात व्यवस्था, अनियंत्रित ई-रिक्शा संचालन और सड़क सुरक्षा को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच अब जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा व्यवस्था पर निर्णायक शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। दिसंबर माह में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के क्रम में न केवल ई-रिक्शा संचालन के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है, बल्कि अब हरिद्वार शहर को पांच अलग-अलग जोन में विभाजित करने की ठोस योजना भी सामने आ गई है।
इस नई व्यवस्था के तहत अब ई-रिक्शा चालक मनमाने ढंग से पूरे शहर में संचालन नहीं कर सकेंगे। जिस क्षेत्र में ई-रिक्शा पंजीकृत होगा, वह उसी जोन तक सीमित रहेगा। जोन से बाहर संचालन के लिए विशेष अनुमति लेना अनिवार्य होगा। प्रशासन का साफ संदेश है—नियम मानो, वरना सड़क से हटो।

ई-रिक्शा यूनियनों को बुलाकर समझाया गया नियम
मंगलवार को सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), हरिद्वार कार्यालय में इस संबंध में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में नवोदय चौक, रानीपुर मोड़, बहादराबाद और लक्सर रोड क्षेत्र की ई-रिक्शा यूनियनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक की अध्यक्षता सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) श्री निखिल शर्मा ने की। उनके साथ सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) सुश्री नेहा झा और परिवहन कर अधिकारी (इंटरसेप्टर) सुश्री वरुणा सैनी भी उपस्थित रहीं। अधिकारियों ने यूनियन प्रतिनिधियों को स्पष्ट शब्दों में बता दिया कि यह केवल चेतावनी नहीं, बल्कि सिस्टम सुधारने का आखिरी मौका है।
दो चरणों में लागू हो रही है सख्त SOP
परिवहन विभाग द्वारा लागू SOP के तहत ई-रिक्शा संचालन को दो चरणों में नियंत्रित किया जा रहा है।
पहले चरण में 21 दिसंबर 2025 से 20 जनवरी 2026 तक सभी ई-रिक्शा वाहन स्वामियों और चालकों को अनिवार्य रूप से पुलिस सत्यापन कराना होगा।
अगर कोई चालक हरिद्वार जनपद के बाहर का निवासी है और यहां आकर ई-रिक्शा चला रहा है, तो उसे अपने मूल जनपद और हरिद्वार—दोनों जगह से पुलिस सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। प्रशासन का कहना है कि यह कदम शहर में सक्रिय अराजक और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है।
दूसरे चरण में 21 जनवरी 2026 से 20 फरवरी 2026 तक ई-रिक्शा वाहनों का दस्तावेज सत्यापन और भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान परिवहन विभाग कैंप लगाकर चरणबद्ध तरीके से ई-रिक्शाओं को कार्यालय बुलाएगा, जहां तकनीकी अधिकारी वाहनों की स्थिति और कागजात की जांच करेंगे।
स्टीकर और आईडी के बिना नहीं मिलेगा सड़क पर उतरने का अधिकार
SOP के तहत जिन ई-रिक्शा चालकों और मालिकों का पुलिस सत्यापन और भौतिक सत्यापन दोनों सफलतापूर्वक पूरा हो जाएगा, केवल उन्हीं को विशेष पहचान स्टीकर और चालक को आईडी कार्ड जारी किया जाएगा।
21 फरवरी 2026 के बाद जिन ई-रिक्शाओं के पास यह स्टीकर और आईडी कार्ड नहीं होगा, उनके खिलाफ प्रवर्तन की सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिना किसी रियायत के चालान, वाहन सीज और संचालन पर रोक लगाई जाएगी।
ड्राइवर बदला तो जिम्मेदारी मालिक की
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब “ड्राइवर बदल गया” कोई बहाना नहीं चलेगा। यदि मालिक वही रहता है और चालक बदला जाता है, तो नए चालक का पुलिस सत्यापन कराना मालिक की कानूनी जिम्मेदारी होगी। नियमों की अनदेखी करने पर मालिक पर भी कार्रवाई की जाएगी।
पांच जोन में बंटेगा हरिद्वार शहर
SOP के अगले और सबसे अहम चरण में हरिद्वार शहर को पांच जोन में विभाजित करने की तैयारी है। प्रस्तावित योजना के अनुसार—
ई-रिक्शा जिस पते पर पंजीकृत है,
वह उसी जोन और उसी निर्धारित रेडियस में संचालित हो सकेगा।
जोन से बाहर संचालन के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी, अन्यथा कार्रवाई तय है। इस कदम से ई-रिक्शाओं की अंधाधुंध आवाजाही रुकेगी और ट्रैफिक जाम की समस्या में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
12 हजार ई-रिक्शा, लेकिन सभी नहीं चल पाएंगे अव्यवस्थित

वर्तमान में हरिद्वार उपवाह क्षेत्र में करीब 12,000 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी ई-रिक्शाओं का सत्यापन हो, लेकिन जो चालक या वाहन नियमों का पालन नहीं करेंगे, वे अपने आप सड़कों से बाहर हो जाएंगे।
परिवहन विभाग का स्पष्ट मानना है कि सत्यापन के बाद ई-रिक्शाओं की संख्या नियंत्रित होगी और केवल वही वाहन सड़कों पर दिखेंगे, जो पूरी तरह वैध और सुरक्षित हैं।
अराजक तत्वों पर लगेगा पूर्ण विराम
अधिकारियों का कहना है कि अब तक कई शिकायतें मिलती रही हैं कि कुछ ई-रिक्शा चालक असामाजिक तत्वों से जुड़े हुए हैं या उनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। SOP लागू होने के बाद ऐसे किसी भी व्यक्ति को ई-रिक्शा संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
यूनियनों को चेतावनी और सहयोग की अपेक्षा
बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों की समस्याएं भी सुनी गईं, लेकिन अधिकारियों ने दो टूक कहा कि नियमों में ढील नहीं दी जाएगी। यूनियनों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने क्षेत्रों में सभी ई-रिक्शा चालकों और मालिकों को समय रहते सत्यापन कराने के लिए प्रेरित करें।

निखिल शर्मा, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), हरिद्वार ने कहा—
“ई-रिक्शा संचालन को सुरक्षित और नियंत्रित करना जरूरी हो गया है। पुलिस सत्यापन, भौतिक सत्यापन और जोन सिस्टम के जरिए व्यवस्था में सुधार होगा। नियमों का पालन करने वालों को कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है।”

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