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सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा पर सख्ती,, बेसिक शिक्षा निदेशक प्रकरण के बाद धामी सरकार का बड़ा निर्णय,, बिना अपॉइंटमेंट नहीं होगी मुलाकात, डिजिटल विजिटर सिस्टम और अलार्म अनिवार्य,, दुर्व्यवहार पर तत्काल दर्ज होगा मुकदमा, ज्वलनशील वस्तुओं पर प्रतिबंध,, एक बार में सीमित संख्या में ही होगी मुलाकात

इन्तजार रजा हरिद्वार- सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा पर सख्ती,,

बेसिक शिक्षा निदेशक प्रकरण के बाद धामी सरकार का बड़ा निर्णय,,

बिना अपॉइंटमेंट नहीं होगी मुलाकात, डिजिटल विजिटर सिस्टम और अलार्म अनिवार्य,,

दुर्व्यवहार पर तत्काल दर्ज होगा मुकदमा, ज्वलनशील वस्तुओं पर प्रतिबंध,,

एक बार में सीमित संख्या में ही होगी मुलाकात

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। हाल ही में के बेसिक शिक्षा निदेशक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद सरकार ने सभी सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। इस नए आदेश के तहत अब बिना पूर्व अनुमति और अपॉइंटमेंट के किसी भी अधिकारी से मिलना संभव नहीं होगा।

सरकार ने साफ किया है कि अधिकारियों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल की घटना ने प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया था, जिसके बाद यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

अपॉइंटमेंट और डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य

नई एसओपी के अनुसार अब किसी भी अधिकारी से मिलने से पहले संबंधित व्यक्ति को अपॉइंटमेंट लेना अनिवार्य होगा। बिना समय लिए दफ्तर में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके साथ ही सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों में डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया जाएगा।

इस प्रणाली के तहत दफ्तर में आने वाले हर आगंतुक का पूरा विवरण डिजिटल रूप से दर्ज होगा। प्रवेश और निकास का समय रिकॉर्ड किया जाएगा, जिससे किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत जानकारी उपलब्ध हो सके। इसके अलावा कार्यालयों में अलार्म सिस्टम भी लगाए जाएंगे, ताकि आपात स्थिति में तुरंत सुरक्षा बलों को सूचना दी जा सके।

एक बार में सीमित संख्या में ही होगी मुलाकात

सरकार ने अधिकारियों से मिलने वालों की संख्या पर भी स्पष्ट सीमा तय कर दी है। अब एक बार में दो से अधिक लोग किसी अधिकारी से नहीं मिल पाएंगे। यदि कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि अधिकारी से मिलने आता है, तो उसके साथ अधिकतम तीन लोग ही प्रवेश कर सकेंगे।

विशेष बात यह है कि वीआईपी भी अपने साथ निजी सुरक्षाकर्मी को अधिकारी के कक्ष तक नहीं ले जा पाएंगे। सुरक्षाकर्मी को बाहर निर्धारित स्थान पर ही रुकना होगा। इससे दफ्तर के भीतर अनावश्यक भीड़ और दबाव की स्थिति से बचाव होगा।

दुर्व्यवहार पर तत्काल मुकदमा, ज्वलनशील वस्तुओं पर प्रतिबंध

एसओपी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी दफ्तर में दुर्व्यवहार, मारपीट या अभद्रता करता है, तो उसके खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

कार्यालय परिसर में ज्वलनशील पदार्थ, हथियार, लाठी-डंडा या किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक वस्तु लाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रवेश द्वार पर सख्त जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

निजी सुरक्षा गार्ड की तैनाती पर भी नियंत्रण

सरकार ने यह भी तय किया है कि किसी भी कार्यालय में निजी एजेंसियों के सुरक्षा गार्ड की तैनाती अब सचिव स्तर की अनुमति के बाद ही की जाएगी। इसका उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित और जवाबदेह बनाना है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह कदम अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ कार्यालयों में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। स्पष्ट है कि हाल की घटना के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। अब सरकारी दफ्तरों में प्रवेश और मुलाकात की प्रक्रिया पहले से अधिक नियंत्रित और व्यवस्थित होगी, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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