कांग्रेस में मनोज धनगर की घर वापसी से रानीपुर में सियासी तापमान बढ़ा,, “पार्टी ने चाहा तो रानीपुर से लड़ूंगा चुनाव” – खुद को बताया कांग्रेस का सिपाही कार्यकर्ता,, धनगर समाज की एकजुटता से बदल गऐ रानीपुर विधानसभा के चुनावी समीकरण

इन्तजार रजा हरिद्वार- कांग्रेस में मनोज धनगर की घर वापसी से रानीपुर में सियासी तापमान बढ़ा,,
“पार्टी ने चाहा तो रानीपुर से लड़ूंगा चुनाव” – खुद को बताया कांग्रेस का सिपाही कार्यकर्ता,,
धनगर समाज की एकजुटता से बदल गऐ रानीपुर विधानसभा के चुनावी समीकरण
हरिद्वार (इन्तजार रजा)। लंबे समय से चल रही सियासी अटकलों पर विराम लगाते हुए मनोज धनगर ने आखिरकार में घर वापसी कर ली है। लक्सर स्थित जिलाध्यक्ष कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर रहा और नारेबाजी के बीच उनका भव्य स्वागत किया गया। इस बार मनोज धनगर ने किसी तरह की टिप्पणी से बचने के बजाय खुलकर अपनी राजनीतिक मंशा जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कांग्रेस के सिपाही कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे और यदि पार्टी ने चाहा तो रानीपुर विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
“मैं कांग्रेस का सिपाही हूं, पार्टी जहां कहेगी वहीं काम करूंगा”…..मनोज धनगर
सदस्यता ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में मनोज धनगर ने कहा,
“मैं कांग्रेस का सिपाही कार्यकर्ता हूं। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी, उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा। अगर संगठन ने रानीपुर विधानसभा से मुझे उम्मीदवार बनाया तो मैं चुनाव मैदान में उतरूंगा और पूरी ताकत से लड़ूंगा।”
उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। रानीपुर विधानसभा क्षेत्र में पहले से ही सियासी हलचल तेज है और ऐसे में धनगर का खुला दावा कई समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।बताया जा रहा है कि प्रारंभिक योजना के अनुसार वे प्रदेश मुख्यालय में सदस्यता लेने वाले थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ मतभेदों के चलते कार्यक्रम स्थल बदलना पड़ा। हालांकि, अंततः जिलाध्यक्ष कार्यालय में हुए कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि धनगर की वापसी पूरी तरह औपचारिक और संगठित है।
धनगर समाज को एकजुट करने में कामयाब रहे मनोज धनगर
मनोज धनगर पिछले कुछ समय से सामाजिक स्तर पर सक्रिय रहे हैं और धनगर समाज को संगठित करने की दिशा में लगातार प्रयासरत थे। वे ऑल इंडिया धनगर महासभा (उत्तराखंड) के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि धनगर समाज संगठित रूप से किसी एक दल के साथ खड़ा होता है तो रानीपुर विधानसभा सीट पर बड़ा असर पड़ सकता है। क्षेत्र में धनगर समाज की अच्छी खासी संख्या है और उनका वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभा सकता है। सदस्यता के बाद अपने पैतृक गांव ब्रह्मपुरी पहुंचने पर समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी ने यह संकेत दे दिया कि उनकी जमीनी पकड़ अभी भी मजबूत है। समर्थकों ने इसे “घर वापसी” करार देते हुए कहा कि अब समाज एक मंच पर आकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाएगा।
रानीपुर में बदल सकते हैं ऐतिहासिक समीकरण
रानीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से सियासी दृष्टि से महत्वपूर्ण रही है। यहां पर जातीय और सामाजिक समीकरणों का सीधा प्रभाव चुनावी परिणामों पर पड़ता रहा है।
अगर कांग्रेस ने धनगर समाज को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई और मनोज धनगर को उम्मीदवार बनाया, तो यह कदम ऐतिहासिक साबित हो सकता है। इससे न केवल धनगर समाज बल्कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मतदाताओं में भी सकारात्मक संदेश जा सकता है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फैसला भाजपा और अन्य दलों की रणनीति को भी प्रभावित करेगा। रानीपुर में पहले से ही मुकाबला कड़ा माना जाता है और ऐसे में एक संगठित समाज का समर्थन चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है।
स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने मनोज धनगर की वापसी का स्वागत किया है। उनका कहना है कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में धनगर की भूमिका अहम साबित होगी। कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने कहा कि पार्टी में ऐसे कार्यकर्ताओं की जरूरत है जो समाज को जोड़ने का काम करें। मनोज धनगर का अनुभव और सामाजिक पकड़ कांग्रेस को लाभ पहुंचाएगी।

अब निगाहें कांग्रेस हाईकमान के निर्णय पर टिकी हैं। यदि पार्टी ने रानीपुर से धनगर समाज पर दांव खेला, तो यह कदम ऐतिहासिक बदलाव का कारण बन सकता है।स्पष्ट है कि मनोज धनगर की कांग्रेस में वापसी ने हरिद्वार की राजनीति में नई ऊर्जा और नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी चाल किस दिशा में जाती है और रानीपुर का चुनावी रण किस करवट बैठता है।



