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कोर्ट में फर्जी जमानत का खेल बेनकाब,, हरिद्वार में 04 पेशेवर जमानती गिरफ्तार, झूठे शपथपत्र देकर कर रहे थे अदालत को गुमराह,, एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर का सख्त संदेश – कानून के साथ छल करने वालों को नहीं मिलेगी कोई रियायत

इन्तजार रजा हरिद्वार- कोर्ट में फर्जी जमानत का खेल बेनकाब,,

हरिद्वार में 04 पेशेवर जमानती गिरफ्तार, झूठे शपथपत्र देकर कर रहे थे अदालत को गुमराह,,

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर का सख्त संदेश – कानून के साथ छल करने वालों को नहीं मिलेगी कोई रियायत

हरिद्वार। हरिद्वार में अदालत के भीतर चल रहे फर्जी जमानत के संगठित खेल का बड़ा खुलासा हुआ है। जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान चार ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है जो अलग-अलग मामलों में पैसा लेकर पेशेवर जमानती बनने का काम करते थे। अदालत के समक्ष झूठा शपथपत्र देकर आरोपियों को जमानत दिलाने की कोशिश करने वाले इन लोगों के खिलाफ थाना सिडकुल में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

हरिद्वार पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई उस समय हुई जब रोशनाबाद स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान न्यायालय को संदेह हुआ कि पेश किए गए जमानती पेशेवर तरीके से विभिन्न मामलों में जमानत लेते रहे हैं। मामले की जांच में सामने आया कि जमानत के लिए आए लोगों ने अपने शपथपत्र में पूर्व में ली गई जमानतों की जानकारी छिपाई थी। इसे न्यायालय को गुमराह करने और कानून के साथ छल करने की गंभीर कोशिश माना गया।

जमानत दिलाने पहुंचे थे चार पेशेवर जमानती

मामला 23 मार्च 2026 का है, जब थाना सिडकुल क्षेत्र के अंतर्गत रोशनाबाद स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय हरिद्वार में सरकार बनाम रोशन लाल प्रकरण की सुनवाई चल रही थी। इस दौरान कई अभियुक्तों की ओर से जमानती अदालत में पेश हुए।

सुनवाई के दौरान ACJM न्यायालय के समक्ष विभिन्न अभियुक्तों के लिए जमानती के रूप में चार व्यक्ति प्रस्तुत हुए। इनमें अभियुक्त मुकेश कुमार उर्फ मोनू की ओर से उज्ज्वल सिंह निवासी ग्राम परखे रेलवे स्टेशन पोस्ट अब्दुल्ला हरिद्वार जमानती बना।

इसी तरह अभियुक्त रोशन लाल की ओर से नरेश प्रताप बहुगुणा निवासी ग्राम परखे रेलवे स्टेशन पोस्ट अब्दुल्ला हरिद्वार और नरेश पुत्र चंद्रमण निवासी सेक्टर-1 बीएचईएल हरिद्वार जमानती बने।

वहीं अभियुक्त राजेश कुमार की ओर से कमलेश पुत्र देवी सिंह निवासी ग्राम परखे रेलवे स्टेशन पोस्ट अब्दुल्ला हरिद्वार जमानती के रूप में अदालत में उपस्थित हुआ।

प्रारंभिक तौर पर सभी जमानती खुद को स्थानीय निवासी बताते हुए सामान्य प्रक्रिया के तहत जमानत देने पहुंचे थे। लेकिन अदालत को उनके दस्तावेजों और शपथपत्रों में कई संदिग्ध तथ्य नजर आए, जिसके बाद विस्तृत जांच कराई गई।

कंप्यूटर रिकॉर्ड में खुला फर्जीवाड़े का राज

जांच के दौरान न्यायालय में उपलब्ध कंप्यूटर रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। इसमें सामने आया कि ये सभी जमानती पहले भी कई अलग-अलग मामलों में जमानत ले चुके हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह पाई गई कि इन लोगों ने अदालत में दिए गए अपने शपथपत्र में पहले ली गई जमानतों का कोई उल्लेख नहीं किया था। जबकि नियमों के अनुसार जमानती को यह जानकारी देना अनिवार्य होता है कि उसने पहले कितने मामलों में जमानत ली है।

अदालत के रिकॉर्ड और जांच से यह स्पष्ट हुआ कि ये सभी व्यक्ति पेशेवर जमानती के रूप में कार्य कर रहे थे। यानी वे अलग-अलग मामलों में पैसे लेकर आरोपियों की जमानत लेने का काम करते थे।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बार-बार अलग-अलग मामलों में जमानत देता है और अपनी पूर्व जमानतों की जानकारी छिपाता है तो यह न्यायालय को गुमराह करने और न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की श्रेणी में आता है।

इसी आधार पर अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित कार्रवाई के निर्देश दिए।

थाना सिडकुल में दर्ज हुआ मुकदमा

अदालत के निर्देश के बाद पूरे मामले की सूचना थाना सिडकुल पुलिस को दी गई। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कमलेश, उज्ज्वल सिंह, नरेश प्रताप बहुगुणा और अन्य के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन पेशेवर जमानतियों का कोई संगठित गिरोह है जो लंबे समय से अदालतों में इसी तरह जमानत दिलाने का काम कर रहा था।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन लोगों ने अब तक कितने मामलों में जमानत ली और इसके बदले कितनी रकम ली गई।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर का सख्त संदेश

मामले को लेकर हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून के साथ छल करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने कहा कि अदालत की प्रक्रिया को प्रभावित करने या न्याय व्यवस्था को गुमराह करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।एसएसपी ने यह भी कहा कि पेशेवर जमानतियों का यह नेटवर्क न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे मामलों पर पुलिस लगातार नजर रख रही है और भविष्य में भी इस तरह के फर्जीवाड़े पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने की गंभीर साजिश

विशेषज्ञों के अनुसार पेशेवर जमानती न्याय प्रणाली के लिए एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। कई मामलों में अपराधी पैसे देकर ऐसे लोगों को जमानत के लिए तैयार कर लेते हैं, जिससे अदालत को यह भरोसा दिलाया जाता है कि आरोपी जिम्मेदार व्यक्ति की निगरानी में रहेगा।

लेकिन जब जमानती ही पेशेवर तरीके से काम कर रहे हों तो यह पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।हरिद्वार में सामने आया यह मामला इसी तरह की गतिविधियों का उदाहरण माना जा रहा है। पुलिस और न्यायालय दोनों अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई कर रहे हैं।फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

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