उत्तराखंड में बड़ा खुलासा: 371 परिवारों की नहीं मिली पुरानी फैमिली हिस्ट्री,, 🟡 जसपुर ब्लॉक में जांच के दौरान सामने आया मामला, पंचायत रिकॉर्ड पर उठे सवाल,, 🟢 प्रशासन सख्त—परिवारों को नोटिस, दस्तावेज पेश करने के निर्देश

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 उत्तराखंड में बड़ा खुलासा: 371 परिवारों की नहीं मिली पुरानी फैमिली हिस्ट्री,,
🟡 जसपुर ब्लॉक में जांच के दौरान सामने आया मामला, पंचायत रिकॉर्ड पर उठे सवाल,,
🟢 प्रशासन सख्त—परिवारों को नोटिस, दस्तावेज पेश करने के निर्देश
उत्तराखंड के जसपुर ब्लॉक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रशासनिक जांच के दौरान 371 परिवारों का वर्ष 2005 से पहले का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इस खुलासे के बाद पंचायत अभिलेखों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।
🔶 जांच में बड़ा खुलासा, 1766 लोगों की एंट्री संदिग्ध
प्रशासन द्वारा किए गए सत्यापन अभियान में यह पाया गया कि इन 371 परिवारों में कुल 1766 व्यक्तियों के नाम परिवार रजिस्टर में दर्ज हैं, लेकिन इनके 2005 से पहले के कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि कई प्रविष्टियां बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के दर्ज की गई थीं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं नियमों को दरकिनार कर नाम जोड़े गए हों।
🔶 सरकारी निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई
यह पूरा मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद चलाए जा रहे बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन अभियान के दौरान सामने आया।
एसडीएम राहुल शाह के नेतृत्व में वर्ष 2005 के बाद के दस्तावेजों की गहन जांच की गई, जिसमें यह गड़बड़ी उजागर हुई। अब प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
🔶 परिवारों को नोटिस, दस्तावेज पेश करना होगा अनिवार्य
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी 371 परिवारों के मुखियाओं को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
इन परिवारों को अपने पक्ष में—
- पहचान संबंधी दस्तावेज
- निवास प्रमाण
- अन्य वैध साक्ष्य
पेश करने होंगे। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि कोई प्रविष्टि अवैध पाई जाती है, तो उसे परिवार रजिस्टर से हटाया जाएगा।
🔶 क्या है परिवार रजिस्टर में नाम जुड़ने की प्रक्रिया?
एसडीएम के अनुसार, परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की एक तय प्रक्रिया होती है—
- ग्राम पंचायत में आवेदन दिया जाता है
- खुली बैठक में प्रस्ताव रखा जाता है
- प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद एडीओ पंचायत जांच करता है
- सत्यापन के बाद ही नाम दर्ज किया जाता है
इस मामले में इसी प्रक्रिया के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।
🔚 प्रशासन का सख्त रुख, पारदर्शिता पर जोर
प्रशासन का कहना है कि अभिलेखों की शुद्धता और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसी के चलते यह जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा।
👉 फिलहाल यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर सतर्कता और जागरूकता भी बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।



