राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय का महाकुंभ, 2252 मामलों का ऐतिहासिक निस्तारण… 6.42 करोड़ की समझौता राशि पर लगी मुहर!,, मुख्य जिला न्यायाधीश नरेन्द्र दत्त और सचिव सिमरनजीत कौर के नेतृत्व में हरिद्वार में गूंजा “सुलह से समाधान” का संदेश,, राष्ट्रीय लोक अदालत में वर्षों पुराने विवाद हंसी-खुशी खत्म, हजारों लोगों को मिली राहत

इन्तजार रजा हरिद्वार- राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय का महाकुंभ, 2252 मामलों का ऐतिहासिक निस्तारण… 6.42 करोड़ की समझौता राशि पर लगी मुहर!,,
मुख्य जिला न्यायाधीश नरेन्द्र दत्त और सचिव सिमरनजीत कौर के नेतृत्व में हरिद्वार में गूंजा “सुलह से समाधान” का संदेश,,
राष्ट्रीय लोक अदालत में वर्षों पुराने विवाद हंसी-खुशी खत्म, हजारों लोगों को मिली राहत
हरिद्वार: न्याय को सरल, सस्ता और त्वरित बनाने की दिशा में शनिवार को हरिद्वार जनपद में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय व्यवस्था की बड़ी सफलता बनकर सामने आई। माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के निर्देशानुसार एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तराखण्ड के तत्वावधान में आयोजित इस वर्ष की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत में हजारों लोगों को वर्षों पुराने विवादों से राहत मिली।
जिला न्यायालय परिसर रोशनाबाद में आयोजित इस विशेष लोक अदालत का संचालन जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार श्री नरेन्द्र दत्त के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार की सचिव श्रीमती सिमरनजीत कौर ने पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए लोक अदालत को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
पूरे जनपद में न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए जिला न्यायालय रोशनाबाद में 10 बेंच, बाह्य न्यायालय रुड़की में 07 बेंच तथा न्यायालय लक्सर में 03 विशेष बेंचों का गठन किया गया। इन सभी बेंचों में दिनभर मामलों की सुनवाई कर आपसी सुलह-समझौते के आधार पर रिकॉर्ड संख्या में मुकदमों का निस्तारण किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना क्लेम, पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, बैंक रिकवरी, बिजली-पानी के बिल, सिविल वाद एवं अन्य शमनीय प्रकृति के मामलों को प्राथमिकता के साथ सुना गया। कई ऐसे मामले, जो वर्षों से अदालतों में लंबित पड़े थे और जिनकी वजह से पक्षकार मानसिक तनाव व आर्थिक परेशानी झेल रहे थे, आज सौहार्दपूर्ण माहौल में समाप्त हो गए।
लोक अदालत के दौरान जिला न्यायालय परिसर में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। जहां सामान्य दिनों में अदालतों में तनाव और कानूनी बहस का माहौल रहता है, वहीं शनिवार को कई परिवार और पक्षकार मुस्कुराते हुए अपने विवाद खत्म कर बाहर निकलते दिखाई दिए।लोक अदालत के आंकड़े इस आयोजन की ऐतिहासिक सफलता की गवाही दे रहे हैं। न्यायालयों में लंबित कुल 2252 वादों एवं 132 प्री-लिटिगेशन मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल ₹6,42,88,111/- की समझौता राशि पर सहमति बनी। एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में मामलों का समाधान न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
नरेन्द्र दत्त, मुख्य जिला न्यायाधीश, जिला न्यायालय हरिद्वार
मुख्य जिला न्यायाधीश श्री नरेन्द्र दत्त ने कहा कि लोक अदालत आम जनता को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से न केवल अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम होता है, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और विश्वास को भी मजबूती मिलती है।“राष्ट्रीय लोक अदालत आम जनता को त्वरित, सस्ता और सरल न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है। आपसी सहमति से मामलों का निस्तारण होने से वर्षों पुरानी कटुता समाप्त होती है और समाज में सकारात्मक वातावरण बनता है।”
वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार की सचिव श्रीमती सिमरनजीत कौर पूरे आयोजन के दौरान सक्रिय नजर आईं। उन्होंने विभिन्न बेंचों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और पक्षकारों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत केवल मामलों के निस्तारण का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता को मजबूत करने का माध्यम भी है।
सिमरनजीत कौर, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार
“लोक अदालत के माध्यम से लोग बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया और अतिरिक्त खर्च के अपने मामलों का समाधान प्राप्त करते हैं। वर्षों पुराने विवाद समाप्त होने से समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव का वातावरण बनता है। यह व्यवस्था आमजन के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है।”
सिमरनजीत कौर ने आयोजन को सफल बनाने में न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं एवं वादकारियों की भूमिका की सराहना करते हुए सभी का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों तक विधिक सहायता और त्वरित न्याय की सुविधा पहुंचाई जाए।
हरिद्वार में आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यदि दोनों पक्ष संवाद और समझदारी का रास्ता अपनाएं तो बड़े से बड़े विवाद का समाधान भी आसानी से संभव है। इससे अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम होती है और आम लोगों को शीघ्र न्याय मिलता है।
दिनभर चले इस विशेष आयोजन के बाद जिला न्यायालय परिसर में संतोष और राहत का माहौल देखने को मिला। अपने मामलों का समाधान होने के बाद कई पक्षकारों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वर्षों से चल रहे विवाद आज खत्म होने से उन्हें मानसिक शांति मिली है।
राष्ट्रीय लोक अदालत की इस बड़ी सफलता ने यह संदेश भी दिया कि न्याय केवल अदालतों की दीवारों तक सीमित नहीं, बल्कि आपसी सहमति, संवाद और समझदारी के जरिए समाज में स्थायी शांति स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है।



