हरिद्वार में डेंगू पर ‘वार’ की तैयारी! मानसून से पहले अलर्ट मोड में जिला प्रशासन, डीएम मयूर दीक्षित ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश,, “जलभराव बिल्कुल बर्दाश्त नहीं — नालियां साफ हों, झाड़ियां कटें और हर विभाग मिशन मोड में करे काम: डीएम मयूर दीक्षित” “डेंगू से एक भी मौत नहीं होनी चाहिए! प्लेटलेट्स से लेकर अस्पतालों की तैयारी तक मजबूत करने के आदेश, स्कूलों के जरिए चलेगा जागरूकता अभियान”

इन्तजार रजा हरिद्वार- हरिद्वार में डेंगू पर ‘वार’ की तैयारी! मानसून से पहले अलर्ट मोड में जिला प्रशासन, डीएम मयूर दीक्षित ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश,,
“जलभराव बिल्कुल बर्दाश्त नहीं — नालियां साफ हों, झाड़ियां कटें और हर विभाग मिशन मोड में करे काम: डीएम मयूर दीक्षित”
“डेंगू से एक भी मौत नहीं होनी चाहिए! प्लेटलेट्स से लेकर अस्पतालों की तैयारी तक मजबूत करने के आदेश, स्कूलों के जरिए चलेगा जागरूकता अभियान”
हरिद्वार में आगामी मानसून और डेंगू के संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। राष्ट्रीय डेंगू दिवस के अवसर पर जिला कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में जिला, विकासखंड और तहसील स्तर के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से भी जुड़े रहे।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने साफ शब्दों में कहा कि आगामी मानसून को देखते हुए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा, ताकि जनपद में डेंगू का प्रकोप फैलने से पहले ही प्रभावी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत, पंचायतीराज विभाग, खंड विकास अधिकारी, शिक्षा विभाग और बाल विकास विभाग को स्वास्थ्य विभाग के साथ तालमेल बनाकर व्यापक स्तर पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
डीएम ने विशेष रूप से जलभराव की समस्या पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी क्षेत्र में पानी जमा होने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय रहते जल निकासी के मजबूत इंतजाम किए जाएं, नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए तथा झाड़ियों की कटान और विशेष सफाई अभियान चलाए जाएं। उनका कहना था कि डेंगू के मच्छरों का सबसे बड़ा कारण पानी का ठहराव होता है और इसे समाप्त करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने जिला चिकित्सा अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी को सख्त निर्देश दिए कि जनपद में डेंगू से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं होनी चाहिए। इसके लिए अस्पतालों में पर्याप्त जांच व्यवस्था, मरीजों के लिए अलग वार्ड, ब्लड बैंक में पर्याप्त प्लेटलेट्स की उपलब्धता और आवश्यक दवाइयों का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम मयूर दीक्षित ने शिक्षा विभाग को भी अहम जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि विद्यालयों के माध्यम से अभिभावकों को जागरूक किया जाए। बच्चों को पूर्ण आस्तीन के कपड़े पहनाकर स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जाए और स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर छात्र-छात्राओं को डेंगू से बचाव के उपाय बताए जाएं।
बैठक के दौरान व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से ही डेंगू को नियंत्रित नहीं किया जा सकता, बल्कि आमजन की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति सप्ताह में कम से कम एक घंटा अपने घर और आसपास की सफाई के लिए जरूर निकाले, ताकि कहीं भी पानी जमा न हो और मच्छरों के पनपने की संभावना खत्म की जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते प्रशासनिक तैयारी और जनजागरूकता अभियान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हरिद्वार जिला प्रशासन की यह पहल आने वाले समय में डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, एसपी ट्रैफिक निशा यादव, जिला मलेरिया अधिकारी चंद्रमोहन कंसवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अब देखने वाली बात यह होगी कि बैठक में दिए गए निर्देश धरातल पर कितनी तेजी और गंभीरता के साथ लागू किए जाते हैं।



