उत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरें

हलाला प्रकरण पर गरमाई सियासत और सामाजिक बहस! मुफ़्ती शमून क़ासमी का बड़ा बयान — “महिलाओं के सम्मान के खिलाफ कुप्रथाओं पर अब निर्णायक प्रहार”,, “उत्तराखण्ड के पहले हलाला केस की पीड़िता के घर पहुंचे मदरसा बोर्ड अध्यक्ष — समान नागरिक संहिता को बताया सामाजिक न्याय और महिला सम्मान की नई इबारत”,, “सीएम धामी की खुलकर सराहना, बोले — ‘यह इस्लाम विरोधी नहीं, बल्कि महिलाओं को अधिकार और सम्मान दिलाने की पहल’… बाद में अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलोरी को सम्मान मिलने पर दी बधाई”

इन्तजार रजा हरिद्वार- हलाला प्रकरण पर गरमाई सियासत और सामाजिक बहस! मुफ़्ती शमून क़ासमी का बड़ा बयान — “महिलाओं के सम्मान के खिलाफ कुप्रथाओं पर अब निर्णायक प्रहार”,,

“उत्तराखण्ड के पहले हलाला केस की पीड़िता के घर पहुंचे मदरसा बोर्ड अध्यक्ष — समान नागरिक संहिता को बताया सामाजिक न्याय और महिला सम्मान की नई इबारत”,,

“सीएम धामी की खुलकर सराहना, बोले — ‘यह इस्लाम विरोधी नहीं, बल्कि महिलाओं को अधिकार और सम्मान दिलाने की पहल’… बाद में अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलोरी को सम्मान मिलने पर दी बधाई”

रुड़की/हरिद्वार। उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद दर्ज हुए हलाला के पहले मामले को लेकर अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस और तेज होती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में उत्तराखण्ड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष और राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त मुफ़्ती शमून क़ासमी ने हरिद्वार जनपद के ग्राम बंदरजूड पहुंचकर हलाला प्रकरण की पीड़िता के परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता, महिलाओं के अधिकार और धार्मिक कुप्रथाओं पर नए सिरे से चर्चा छेड़ दी है।

ग्राम बंदरजूड में पीड़िता के परिजनों से बातचीत करते हुए मुफ़्ती शमून क़ासमी ने उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में हरसंभव सहयोग और संवैधानिक अधिकारों के प्रति आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला के सम्मान, सुरक्षा और न्याय से समझौता नहीं किया जा सकता और समाज को ऐसी कुप्रथाओं के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी चाहिए।मुफ़्ती शमून क़ासमी ने समान नागरिक संहिता को महिलाओं की गरिमा, समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में “ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा कि उत्तराखण्ड सरकार ने एक साहसिक निर्णय लेकर सामाजिक सुधार की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए समाज में मौजूद उन व्यवस्थाओं को चुनौती दी है, जिन पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “समान नागरिक संहिता इस्लाम विरोधी नहीं है। इस्लाम महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, न्याय और गरिमा प्रदान करने की शिक्षा देता है। हलाला और तत्काल तीन तलाक जैसी कुप्रथाएं महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ हैं।” उनके इस बयान को सामाजिक और धार्मिक हलकों में अहम माना जा रहा है क्योंकि अक्सर समान नागरिक संहिता को लेकर अलग-अलग धारणाएं सामने आती रही हैं।

मुफ़्ती क़ासमी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केवल प्रशासनिक फैसले नहीं ले रहे, बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय, भेदभाव और कुप्रथाओं के खिलाफ एक व्यापक सामाजिक जागरण की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार का उद्देश्य संविधान की मूल भावना के अनुरूप सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान न्याय सुनिश्चित करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि धर्म के नाम पर यदि कोई व्यवस्था शोषण, अन्याय या महिलाओं के सम्मान के खिलाफ खड़ी दिखाई देती है तो उसके खिलाफ समाज को एकजुट होना चाहिए। उनके बयान के बाद क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई कि सामाजिक सुधारों को लेकर धार्मिक संस्थाओं और नेतृत्व की भूमिका भविष्य में और महत्वपूर्ण हो सकती है।

दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी मुफ़्ती शमून क़ासमी का स्वागत किया। क्षेत्र के सामाजिक और शैक्षिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने ग्रामीणों से शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड सामाजिक परिवर्तन के नए दौर की ओर बढ़ रहा है।

इसके बाद मुफ़्ती शमून क़ासमी रुड़की पहुंचे, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलोरी के आवास पर पहुंचकर उन्हें उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किए जाने पर बधाई दी और उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड नागरिक सम्मान समिति के सचिव सलमान फरीदी, इमरान देशभक्त, सयैद नफीसुल हसन और बिट्टन त्यागी सहित कई लोग मौजूद रहे।

राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में अब इस दौरे को केवल एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं बल्कि सामाजिक संदेश और संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट रुख के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और चर्चा का विषय बन सकता है।

Related Articles

Back to top button