अलर्टउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरें

बहादराबाद के दादुपुर-सलेमपुर में जहरीले धुएं का आतंक! अवैध प्लास्टिक गुल्ला यूनिट्स ने ग्रामीणों की सांसों पर लगाया पहरा, आखिर कब जागेगा प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड सिस्टम? रातभर धधकते कबाड़खाने, जहरीली हवा से बीमार हो रहे लोग; दर्जनों परिवार छोड़ चुके गांव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चुप्पी और अधूरी कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल , हवा में जहर घोल रहे यूनिट्स पर मुकदमे दर्ज क्यों नहीं,,  प्रदूषण बोर्ड ने लिखा पत्र, क्या अब बिजली विभाग पर भी उठे गंभीर सवाल, कैसे होगी जांच,,  अवैध यूनिट्स, लेकिन ‘वैध’ बिजली कनेक्शन—बड़ा विरोधाभास,,  कार्रवाई क्यों अधूरी? अवैध यूनिट्स, संदिग्ध बिजली कनेक्शन और प्रदूषण के नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज,,

बहादराबाद के दादुपुर-सलेमपुर में जहरीले धुएं का आतंक! अवैध प्लास्टिक गुल्ला यूनिट्स ने ग्रामीणों की सांसों पर लगाया पहरा, आखिर कब जागेगा प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड सिस्टम?

रातभर धधकते कबाड़खाने, जहरीली हवा से बीमार हो रहे लोग; दर्जनों परिवार छोड़ चुके गांव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चुप्पी और अधूरी कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल , हवा में जहर घोल रहे यूनिट्स पर मुकदमे दर्ज क्यों नहीं,,

🟡 प्रदूषण बोर्ड ने लिखा पत्र, क्या अब बिजली विभाग पर भी उठे गंभीर सवाल, कैसे होगी जांच,, ⚠️ अवैध यूनिट्स, लेकिन ‘वैध’ बिजली कनेक्शन—बड़ा विरोधाभास,, 🔵

कार्रवाई क्यों अधूरी? अवैध यूनिट्स, संदिग्ध बिजली कनेक्शन और प्रदूषण के नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज,,

इन्तजार रजा, हरिद्वार…हरिद्वार जनपद के बहादराबाद क्षेत्र के दादुपुर, गोविंदपुर और सलेमपुर गांव इन दिनों विकास नहीं बल्कि प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। क्षेत्र में संचालित दर्जनों कबाड़खाना, प्लास्टिक गुल्ला और रिसाइक्लिंग यूनिट्स ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनती जा रही हैं। आरोप है कि रात के अंधेरे में प्लास्टिक कचरा, रबर और अन्य अपशिष्ट जलाकर उत्पादन का खेल खेला जा रहा है, जबकि इसकी कीमत आसपास रहने वाले हजारों लोग अपनी सेहत से चुका रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही शाम ढलती है, कई यूनिट्स से उठने वाला काला और जहरीला धुआं पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेता है। घरों की खिड़कियां बंद करने के बाद भी धुएं की बदबू लोगों का पीछा नहीं छोड़ती। बच्चों को सांस लेने में परेशानी, बुजुर्गों को खांसी और महिलाओं को आंखों में जलन जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वर्षों से यह प्रदूषण जारी है तो आखिर संबंधित विभाग क्या कर रहे थे? क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा?

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चुप्पी से ग्रामीणों में आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को कई बार शिकायतें भेजी गईं। स्थानीय स्तर पर ज्ञापन दिए गए, फोन किए गए और अधिकारियों को मौके की स्थिति बताई गई, लेकिन कार्रवाई नाम मात्र की हुई।

लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि कुछ यूनिट्स के खिलाफ नोटिस जारी हुए भी तो फिर वे आज तक कैसे संचालित हो रही हैं? यदि प्रदूषण फैलाने वाले प्रतिष्ठानों की पहचान हो चुकी थी तो उन्हें सील क्यों नहीं किया गया? यदि निरीक्षण हुए तो उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय हरिद्वार की ढीली कार्यशैली और अधूरी कार्रवाई के कारण ही प्रदूषण फैलाने वालों के हौसले बुलंद हैं। लोगों का आरोप है कि कार्रवाई का शोर ज्यादा और परिणाम बहुत कम दिखाई दे रहे ह


धर्मनगरी हरिद्वार में अवैध रूप से संचालित प्लास्टिक और कबाड़खाना यूनिट्स पर कार्रवाई के बीच अब एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—जब ये यूनिट्स अवैध थीं, तो इन्हें बिजली कनेक्शन किस आधार पर और किसकी अनुमति से दिया गया?

🟡 प्रदूषण बोर्ड ने लिखा पत्र, क्या अब बिजली विभाग पर भी उठे गंभीर सवाल, कैसे होगी जांच,,

⚠️ अवैध यूनिट्स, लेकिन ‘वैध’ बिजली कनेक्शन—बड़ा विरोधाभास,,

उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) द्वारा बिजली विभाग को इन अवैध इकाइयों के कनेक्शन काटने के लिए पत्र लिखे जाने के बाद अब पूरा मामला और भी गंभीर हो गया है। यह सिर्फ अवैध संचालन का मामला नहीं रह गया, बल्कि अब यह प्रशासनिक लापरवाही या संभावित मिलीभगत की जांच तक पहुंच गया है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने पत्र में साफ कहा है कि कई प्लास्टिक रिसाइक्लिंग और कबाड़खाना यूनिट्स बिना वैध अनुमति के संचालित हो रही हैं। इन यूनिट्स के पास न तो ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ (स्थापना की अनुमति) है और न ही ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (संचालन की अनुमति)।

इसके बावजूद ये यूनिट्स लंबे समय से बिजली का उपयोग कर रही थीं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब ये इकाइयां अवैध थीं, तो बिजली विभाग ने इन्हें कनेक्शन कैसे जारी कर दिया? यह पूरा मामला खासतौर पर विद्युत वितरण खंड बहादराबाद से जुड़ा हुआ सामने आ रहा है, जहां क्षैत्र में कई संदिग्ध

कुछ समय पहले जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को औचक निरीक्षण और रात में छापेमारी के निर्देश दिए थे। इसके बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब अवैध यूनिट्स पर बड़ी कार्रवाई होगी। लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि हालात में अभी भी अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा। कई स्थानों पर रात के समय धुआं उठने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर डीएम के निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना पालन हुआ?

अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिट्स और बिजली कनेक्शन का भी बड़ा सवाल

क्षेत्र में संचालित कई यूनिट्स को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं कि यदि उनके पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैध अनुमति नहीं थी तो उन्हें बिजली कनेक्शन किस आधार पर मिले? आखिर किन दस्तावेजों के आधार पर उत्पादन गतिविधियां संचालित होती रहीं? ग्रामीणों का कहना है कि केवल यूनिट्स पर कार्रवाई काफी नहीं होगी, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि उन्हें संरक्षण किसने दिया, किस विभाग ने आंखें मूंदे रखीं और नियमों की अनदेखी किस स्तर पर हुई।

दर्जनों परिवारों ने छोड़ा क्षेत्र, अब और पलायन का खतरा

स्थानीय लोगों के अनुसार लगातार प्रदूषण के कारण कई परिवार क्षेत्र छोड़कर अन्य स्थानों पर बस चुके हैं। जिनके पास जाने का विकल्प नहीं है, वे मजबूरी में जहरीली हवा के बीच जीवन जी रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में यह पूरा क्षेत्र गंभीर स्वास्थ्य संकट की चपेट में आ सकता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि लंबे समय तक प्लास्टिक और रबर जलने से निकलने वाले धुएं के संपर्क में रहना फेफड़ों, आंखों और त्वचा के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।

ग्रामीणों ने डीएम मयूर दीक्षित से लगाई अंतिम गुहार

दादुपुर, गोविंदपुर और सलेमपुर के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित से मांग की है कि संयुक्त टीम गठित कर रात्रिकालीन छापेमारी कराई जाए, सभी संदिग्ध यूनिट्स का भौतिक सत्यापन कराया जाए, अवैध इकाइयों को तत्काल सील किया जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों और संचालकों की जवाबदेही तय की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं बल्कि परिणाम चाहिए। लोगों की मांग है कि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हों, बिजली कनेक्शन काटे जाएं और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

अब प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अग्निपरीक्षा

बहादराबाद का यह मामला अब केवल पर्यावरण प्रदूषण का नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी कार्यप्रणाली पर भरोसे का सवाल बन चुका है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें जिलाधिकारी कार्यालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर टिकी हैं।

लोगों का स्पष्ट संदेश है— “हमें नोटिस नहीं, कार्रवाई चाहिए। हमें रिपोर्ट नहीं, स्वच्छ हवा चाहिए। और यदि दोषी कोई भी हो, उसे बचाया नहीं जाना चाहिए।”

Related Articles

Back to top button