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हरिद्वार में पंचायत क्रांति की नई कहानी! गांवों तक पहुंची आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था, मिनी सचिवालय बन रहे बदलाव के केंद्र,, डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह की अभिनव सोच से पंचायत भवनों का कायाकल्प, परिवार रजिस्टर हुए ऑनलाइन और गांवों में शुरू हुआ ‘राष्ट्र निर्माण केंद्र’ अभियान,, जनसुनवाई, डिजिटल सेवाएं, बच्चों के चरित्र निर्माण और भ्रष्टाचार पर सख्ती— पंचायत राज विभाग का मॉडल बना चर्चा का विषय,,

हरिद्वार में पंचायत क्रांति की नई कहानी! गांवों तक पहुंची आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था, मिनी सचिवालय बन रहे बदलाव के केंद्र,,

डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह की अभिनव सोच से पंचायत भवनों का कायाकल्प, परिवार रजिस्टर हुए ऑनलाइन और गांवों में शुरू हुआ ‘राष्ट्र निर्माण केंद्र’ अभियान,,

जनसुनवाई, डिजिटल सेवाएं, बच्चों के चरित्र निर्माण और भ्रष्टाचार पर सख्ती— पंचायत राज विभाग का मॉडल बना चर्चा का विषय,,

इन्तजार रजा हरिद्वार। अक्सर पंचायत भवनों को केवल बैठकों और सरकारी औपचारिकताओं तक सीमित माना जाता रहा है, लेकिन हरिद्वार में पंचायत राज विभाग ने इस सोच को बदलने की दिशा में एक नई शुरुआत की है। जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह के नेतृत्व में जनपद की पंचायतों में ऐसे प्रयोग किए गए हैं, जिनके परिणाम अब गांव-गांव में दिखाई देने लगे हैं।

ग्रामीण विकास को केवल सड़कों और भवनों तक सीमित न रखते हुए प्रशासनिक सेवाओं, डिजिटल सुविधाओं, जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। यही कारण है कि पंचायत राज विभाग की कई पहलें आज ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

जब पुराने पंचायत भवन बने आधुनिक मिनी सचिवालय

जनपद के विभिन्न विकासखंडों में वर्षों से बने कई पंचायत भवन सीमित उपयोग में आ रहे थे। पंचायत राज विभाग ने इन्हें नई पहचान देने का निर्णय लिया और 25 पंचायत भवनों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर “मिनी सचिवालय” के रूप में विकसित किया।

इन मिनी सचिवालयों में ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने और उनका त्वरित समाधान करने की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक सोमवार को यहां जनसुनवाई आयोजित की जाती है, जहां ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी ग्रामीणों की शिकायतें सुनते हैं।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय तक नहीं जाना पड़ता। कई मामलों का समाधान गांव स्तर पर ही हो जाता है, जबकि गंभीर मामलों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंचाया जाता है।

डिजिटल हुआ परिवार रजिस्टर, आसान हुई सरकारी सेवाएं

हरिद्वार लंबे समय तक उन जिलों में शामिल रहा जहां ग्राम पंचायतों के परिवार रजिस्टर पूरी तरह डिजिटल नहीं थे। इससे प्रमाण पत्र और रजिस्टर की नकल प्राप्त करने में लोगों को परेशानी होती थी।

डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह की पहल पर सभी ग्राम पंचायतों के परिवार रजिस्टरों को डिजिटाइज करने का अभियान शुरू किया गया। इसके बाद रिकॉर्ड अधिक सुरक्षित और पारदर्शी हुआ है। अब लोगों को दस्तावेजों के लिए बार-बार पंचायत कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और सेवाओं का लाभ तेजी से मिल रहा है।इस कदम से फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावनाओं पर भी काफी हद तक रोक लगी है।

‘राष्ट्र निर्माण केंद्र’ से बच्चों को मिल रही नई दिशा

पंचायत राज विभाग की सबसे अलग और अनूठी पहल “राष्ट्र निर्माण केंद्र” मानी जा रही है। इस योजना का उद्देश्य गांवों के बच्चों को नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है।

इन केंद्रों में बच्चों को प्रेरणादायक वीडियो, नैतिक शिक्षा, सामाजिक बुराइयों से बचाव, स्वच्छता, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों की जानकारी दी जा रही है। स्थानीय शिक्षक, सेवानिवृत्त अधिकारी और बुद्धिजीवी भी इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई यह पहल अब ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त कर रही है। विभाग का मानना है कि यदि बच्चों को सही दिशा और संस्कार मिलें तो भविष्य में समाज की कई समस्याओं को जड़ से कम किया जा सकता है।

विकास के साथ अनुशासन पर भी सख्त नजर

पंचायत राज विभाग ने केवल योजनाएं शुरू करने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पंचायत व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम भी उठाए।

फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र, वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन के मामलों में कई ग्राम प्रधानों, उपप्रधानों और पंचायत कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। कई मामलों में पद से हटाने, निलंबन और विभागीय कार्रवाई तक की गई।इस सख्त रवैये ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास योजनाओं के साथ जवाबदेही और ईमानदारी भी उतनी ही आवश्यक है।

101 मिनी सचिवालय और 51 राष्ट्र निर्माण केंद्र का लक्ष्य

पंचायत राज विभाग ने भविष्य के लिए भी बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। योजना के अनुसार जुलाई 2026 तक मिनी सचिवालयों की संख्या बढ़ाकर 51 और दिसंबर 2026 तक 101 करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही स्वतंत्रता दिवस 2026 तक 51 राष्ट्र निर्माण केंद्र शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो हरिद्वार पंचायत स्तर पर नवाचार और जनसेवा का एक बड़ा मॉडल बनकर सामने आ सकता है।

ग्रामीण विकास का नया अध्याय

हरिद्वार में पंचायत राज विभाग की पहल यह साबित कर रही है कि यदि इच्छाशक्ति और नवाचार का समन्वय हो तो पंचायतें केवल विकास कार्यों की एजेंसी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और सुशासन की मजबूत इकाई भी बन सकती हैं।

मिनी सचिवालयों से लेकर डिजिटल परिवार रजिस्टर और राष्ट्र निर्माण केंद्र तक, ये प्रयास ग्रामीण जीवन को सरल, पारदर्शी और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। पंचायत राज विभाग का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य जनपदों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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