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हरिद्वार की पंचायतों में चला जवाबदेही का बुलडोजर! फर्जी डिग्री, वित्तीय गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन पर डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह का बड़ा एक्शन,, कई ग्राम प्रधान, उपप्रधान और पंचायत अधिकारी पद से हटे, अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई से पंचायत तंत्र में मचा हड़कंप,, विकास के साथ अनुशासन का संदेश— “जनता के भरोसे और सरकारी धन से खिलवाड़ करने वालों के लिए पंचायत व्यवस्था में कोई जगह नहीं”,,

हरिद्वार की पंचायतों में चला जवाबदेही का बुलडोजर! फर्जी डिग्री, वित्तीय गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन पर डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह का बड़ा एक्शन,,

कई ग्राम प्रधान, उपप्रधान और पंचायत अधिकारी पद से हटे, अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई से पंचायत तंत्र में मचा हड़कंप,,

विकास के साथ अनुशासन का संदेश— “जनता के भरोसे और सरकारी धन से खिलवाड़ करने वालों के लिए पंचायत व्यवस्था में कोई जगह नहीं”,,

 

हरिद्वार। पंचायतों को लोकतंत्र की सबसे मजबूत और जमीनी इकाई माना जाता है, लेकिन जब इसी व्यवस्था में फर्जी दस्तावेज, वित्तीय अनियमितताएं और नियमों की अनदेखी सामने आने लगें तो पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हरिद्वार में जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह ने ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

अपनी कार्यशैली और निर्णय क्षमता के कारण चर्चाओं में रहने वाले डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ने जहां एक ओर मिनी सचिवालय, परिवार रजिस्टर डिजिटलीकरण और राष्ट्र निर्माण केंद्र जैसी अभिनव योजनाओं को गति दी, वहीं दूसरी ओर पंचायतों में सामने आई अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई कर प्रशासनिक दृढ़ता का परिचय भी दिया।

फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों पर गिरी गाज

जांच के दौरान कई ग्राम प्रधानों के शैक्षिक प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए। सत्यापन में फर्जीवाड़ा सामने आने पर विभाग ने बिना किसी दबाव के कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया।

भगवानपुर ब्लॉक की हल्लू माजरा ग्राम पंचायत की प्रधान मोमीना, खानपुर की मोहम्मदपुर मथाना ग्राम पंचायत की प्रधान सीमा, बहादराबाद की कोटा मुरादनगर ग्राम पंचायत की प्रधान शाहजहां और भगवानपुर की लामग्रांट ग्राम पंचायत की प्रधान परमजीत कौर को फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर पद से हटाया गया।

वहीं बहादराबाद की नगला खुर्द ग्राम पंचायत की प्रधान रेशमा को दो से अधिक बच्चों के प्रावधान का उल्लंघन करने पर पद गंवाना पड़ा। हाल ही में लक्सर ब्लॉक की अकौड़ा खुर्द ग्राम पंचायत की प्रधान बसंती देवी के खिलाफ वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं सिद्ध होने पर उन्हें भी पद से हटा दिया गया।

उपप्रधानों पर भी नहीं बरती गई कोई नरमी

पंचायत व्यवस्था में उपप्रधान और वार्ड सदस्य भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में जब कुछ मामलों में उनके दस्तावेजों की जांच हुई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

कोटवाल आलमपुर, हजारा ग्रांट, खजूरी और कासमपुर ग्राम पंचायतों के उपप्रधानों के शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर उन्हें सदस्य पद से हटाने की कार्रवाई की गई। इन मामलों ने पंचायत चुनावों में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों की सत्यता और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े किए।

पंचायत अधिकारियों पर भी चला सख्ती का डंडा

डीपीआरओ कार्यालय की कार्रवाई केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों तक सीमित नहीं रही। पंचायत विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कदम उठाए गए।

लक्सर के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी नीरज कुमार को अनुशासनहीनता के मामले में निलंबित किया गया। भगवानपुर के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी अनुराग चौहान के खिलाफ वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर न केवल निलंबन की कार्रवाई हुई बल्कि सरकारी धन की वसूली भी कराई गई। खानपुर के अंकित कुमार को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर स्थानांतरित किया गया। वहीं लक्सर के शंकरदीप और रुड़की के विनीत कुमार गौड़ के खिलाफ भी वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई की गई।

साफ संदेश— पंचायत जनता की है, निजी जागीर नहीं

हरिद्वार में पंचायत राज विभाग की इन कार्रवाइयों ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायतों को निजी प्रभाव, फर्जी दस्तावेजों या नियमों की अनदेखी के सहारे नहीं चलाया जा सकता। चाहे जनप्रतिनिधि हो या अधिकारी, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई तय है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन फैसलों की चर्चा है। कई लोगों का मानना है कि पहली बार पंचायत स्तर पर जवाबदेही इतनी मजबूती से तय होती दिखाई दे रही है। इससे ईमानदारी से कार्य करने वाले प्रतिनिधियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है।

नवाचार भी, अनुशासन भी— यही है हरिद्वार मॉडल

मिनी सचिवालयों के माध्यम से ग्रामीणों को गांव में ही सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना, परिवार रजिस्टरों का डिजिटलीकरण कर पारदर्शिता बढ़ाना और राष्ट्र निर्माण केंद्रों के जरिए बच्चों को नैतिक शिक्षा से जोड़ना— ये सभी पहलें विकास का चेहरा हैं। वहीं फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई प्रशासनिक अनुशासन का दूसरा पक्ष है।

हरिद्वार में पंचायत राज विभाग का यह मॉडल अब केवल विकास योजनाओं के लिए नहीं, बल्कि “सुशासन और जवाबदेही” के लिए भी पहचान बना रहा है। डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह की कार्यशैली ने यह संदेश दिया है कि विकास तभी सार्थक है जब व्यवस्था पारदर्शी, ईमानदार और जवाबदेह हो।

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