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रुड़की तहसील में पीआरडी जवान रिश्वत लेते गिरफ्तार, लेकिन दरगाह गोलक गबन प्रकरण पर अब भी सन्नाटा! जनता पूछ रही— आखिर फाइल क्यों हुई बंद? रिश्वत के आरोप में पीआरडी जवान पर त्वरित कार्रवाई, जबकि चर्चित दरगाह दानपात्र गबन मामले में लंबे समय बाद भी नहीं मिला स्पष्ट जवाब; जवाबदेही पर उठ रहे सवाल,, कभी प्रभावशाली सुपरवाइजर पर हुई थी कार्रवाई, निलंबन भी हुआ, लेकिन बाद में बहाल होकर बंद हो गई फाइल; आस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता की मांग तेज,, आरोपी निकला खिलाड़ी बंद हो गई जांच की फाइल 

रुड़की तहसील में पीआरडी जवान रिश्वत लेते गिरफ्तार, लेकिन दरगाह गोलक गबन प्रकरण पर अब भी सन्नाटा! जनता पूछ रही— आखिर फाइल क्यों हुई बंद?

रिश्वत के आरोप में पीआरडी जवान पर त्वरित कार्रवाई, जबकि चर्चित दरगाह दानपात्र गबन मामले में लंबे समय बाद भी नहीं मिला स्पष्ट जवाब; जवाबदेही पर उठ रहे सवाल,,

कभी प्रभावशाली सुपरवाइजर पर हुई थी कार्रवाई, निलंबन भी हुआ, लेकिन बाद में बहाल होकर बंद हो गई फाइल; आस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता की मांग तेज,, आरोपी निकला खिलाड़ी बंद हो गई जांच की फाइल 

हरिद्वार। रुड़की तहसील में रिश्वत लेने के आरोप में एक पीआरडी जवान की गिरफ्तारी के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की गति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। एक ओर छोटे स्तर के मामलों में तत्काल गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर पिरान कलियर दरगाह के बहुचर्चित गोलक (दानपात्र) गबन प्रकरण को लेकर अब भी कई सवाल अनुत्तरित बने हुए हैं।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि भ्रष्टाचार के विरुद्ध शासन और दरगाह प्रशासन की नीति “जीरो टॉलरेंस” की है, तो दरगाह जैसे संवेदनशील धार्मिक संस्थान से जुड़े मामले की स्थिति भी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। लोगों के बीच चर्चा है कि जिस मामले ने लंबे समय तक सुर्खियां बटोरीं, उसका अंतिम परिणाम आखिर क्या रहा।

जानकारों के अनुसार, मामले के सामने आने के बाद एक प्रभावशाली सुपरवाइजर को निलंबित किया गया था और विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई थी। लेकिन बाद में संबंधित सुपरवाइजर की बहाली हो गई और मामला धीरे-धीरे ठंडी फाइलों में सिमट गया। आज भी आम लोगों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि जांच का निष्कर्ष  आखिर क्या निकला होगा और यदि कोई दोषी था तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई।

पिरान कलियर दरगाह देशभर के लाखों जायरीनों की आस्था का केंद्र है। श्रद्धालु यहां विश्वास के साथ दान करते हैं और यही कारण है कि दानपात्र से जुड़ी किसी भी अनियमितता की खबर आमजन के बीच गंभीर चिंता का विषय बन जाती है। लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल जांच शुरू होना पर्याप्त नहीं, बल्कि जांच के परिणाम भी सार्वजनिक होने चाहिए।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि एक पीआरडी जवान के खिलाफ रिश्वत के आरोप में तत्काल कार्रवाई संभव है, तो दरगाह गोलक प्रकरण जैसे चर्चित मामले में जिम्मेदारी तय करने और सच्चाई सामने लाने में इतनी लंबी चुप्पी क्यों रही। कुछ बुद्धिजीवीयो का कहना है कि कानून की कसौटी सभी के लिए समान होनी चाहिए और जवाबदेही भी समान रूप से तय होनी चाहिए।

दरगाह गोलक गबन प्रकरण की जांच की वर्तमान स्थिति पर आधिकारिक जानकारी जारी की जाए। उनका कहना है कि आस्था, दान और सार्वजनिक विश्वास से जुड़े मामलों में पारदर्शिता ही सबसे बड़ा उत्तर है।

फिलहाल रुड़की तहसील में हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सभी मामलों में कार्रवाई का पैमाना एक जैसा है, या फिर कुछ चर्चित फाइलें समय के साथ धूल फांकने के लिए छोड़ दी जाती हैं। जनता अब दरगाह गोलक प्रकरण पर स्पष्ट और आधिकारिक जवाब चाहती है।

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