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पिरान कलियर दरगाह में व्यवस्था बेहाल: वायरल मारपीट के वीडियो ने खोली सुरक्षा तंत्र की पोल, जिम्मेदारों पर उठे बड़े सवाल,, रैन बसेरे के बाहर कूड़े के ढेर, सफाई व्यवस्था रामभरोसे, सुरक्षा निगरानी कमजोर; जायरीनों की सुरक्षा पर गहराया संकट,, प्रबंधकीय नेतृत्व के अभाव, लंबित जांचों, गोलक गबन प्रकरण और वक्फ संपत्तियों पर सवालों के बीच दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली कठघरे में,, लुट रही दरगाह संपत्तियो पर अवैध कब्जे और बकाया भुगतान पर भी सिस्टम मौन

पिरान कलियर दरगाह में व्यवस्था बेहाल: वायरल मारपीट के वीडियो ने खोली सुरक्षा तंत्र की पोल, जिम्मेदारों पर उठे बड़े सवाल,,

रैन बसेरे के बाहर कूड़े के ढेर, सफाई व्यवस्था रामभरोसे, सुरक्षा निगरानी कमजोर; जायरीनों की सुरक्षा पर गहराया संकट,,

प्रबंधकीय नेतृत्व के अभाव, लंबित जांचों, गोलक गबन प्रकरण और वक्फ संपत्तियों पर सवालों के बीच दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली कठघरे में,, लुट रही दरगाह संपत्तियो पर अवैध कब्जे और बकाया भुगतान पर भी सिस्टम मौन

पिरान कलियर/हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत साबिर पाक एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। दरगाह परिसर से जुड़ा मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है। वायरल वीडियो में कुछ युवक दरगाह के अखाड़ा परिसर में आपस में मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। घटना के दौरान मौजूद जायरीन और स्थानीय लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल भी नजर आ रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने दरगाह की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों को फिर हवा दे दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दरगाह में सुरक्षा, सफाई और प्रशासनिक निगरानी लगातार कमजोर होती जा रही है। देश-विदेश से लाखों अकीदतमंद यहां जियारत के लिए पहुंचते हैं, लेकिन व्यवस्थाओं का स्तर लगातार गिरता दिखाई दे रहा है। लोगों का आरोप है कि रात के समय परिसर में असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ जाती है, जिससे विवाद और मारपीट जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। यदि वायरल वीडियो की जांच में घटना सही पाई जाती है तो यह सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता मानी जाएगी।

इतना ही नहीं, दरगाह परिसर स्थित रैन बसेरे की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। रैन बसेरे के चारों ओर कूड़े के ढेर लगे होने से गंदगी का आलम बना हुआ है। सफाई व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार विभागों की सक्रियता कहीं दिखाई नहीं देती। श्रद्धालुओं का कहना है कि जहां उन्हें साफ-सुथरी और सुरक्षित व्यवस्था मिलनी चाहिए, वहां बदबू, गंदगी और अव्यवस्था उनका स्वागत कर रही है।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि कई सुपरवाइजर/कर्मचारी और जिम्मेदार अधिकारी मूल जिम्मेदारियों के बजाय “मलाईदार ड्यूटी” की तलाश में अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं। रैन बसेरे जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि ड्यूटी का सही तरीके से पालन किया जाए तो ऐसी बदहाल स्थिति कभी पैदा न हो।

दरगाह प्रबंधन को लेकर भी सवाल लगातार उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय से स्थायी और प्रभावी प्रबंधकीय नेतृत्व के अभाव में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हुई है। विभिन्न मामलों की जांच चलने के बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। कई शिकायतों और जांचों का नतीजा आज तक सामने नहीं आ सका, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

दरगाह की गोलक से जुड़े कथित गबन प्रकरण को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे आखिर आरोपी कौन था फाइल क्यों बंद हो गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। इसी प्रकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के संरक्षण, रखरखाव और उपयोग को लेकर भी लगातार चर्चाएं होती रही हैं। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्तियों के बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता।

जायरीन और स्थानीय लोगों ने रुड़की के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ से पूरे मामले में संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच, वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा, रैन बसेरे और सफाई व्यवस्था में तत्काल सुधार तथा दरगाह परिसर में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है।

दरगाह हजरत साबिर पाक केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश और विदेश के लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखना प्रशासन और संबंधित संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि सुरक्षा, स्वच्छता और प्रबंधन से जुड़े आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो आवश्यक है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और व्यवस्थाओं में सुधार के ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और दरगाह की प्रतिष्ठा दोनों सुरक्षित रह सकें।

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