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हरिद्वार में नशे के सौदागरों पर अब और कसेगा शिकंजा! एनसीओआरडी समिति की बैठक में एडीएम वैभव गुप्ता के सख्त निर्देश—क्लैंडेस्टाइन लैब, ड्रग नेटवर्क और अवैध दवा कारोबार पर होगी पैनी निगरानी,, स्कूल-कॉलेज से लेकर गांव-गांव तक चलेगा ‘नशा मुक्त भारत अभियान’, तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई का ऐलान

हरिद्वार में नशे के सौदागरों पर अब और कसेगा शिकंजा!

एनसीओआरडी समिति की बैठक में एडीएम वैभव गुप्ता के सख्त निर्देश—क्लैंडेस्टाइन लैब, ड्रग नेटवर्क और अवैध दवा कारोबार पर होगी पैनी निगरानी,,

स्कूल-कॉलेज से लेकर गांव-गांव तक चलेगा ‘नशा मुक्त भारत अभियान’, तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई का ऐलान

हरिद्वार, 10 जुलाई 2026।
हरिद्वार में नशे के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर और अधिक सख्ती बरतने का फैसला किया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में जिला कार्यालय सभागार में आयोजित एनसीओआरडी (NCORD) समिति की बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता ने साफ कहा कि जनपद में नशे के कारोबार, अवैध तस्करी और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित विभागों को संयुक्त कार्रवाई करते हुए ऐसे नेटवर्क पर लगातार नजर रखने और कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जनपद में चल रही गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 के दौरान एनडीपीएस अधिनियम के तहत कई मुकदमे दर्ज किए गए हैं तथा हेरोइन (स्मैक), चरस, गांजा और विभिन्न प्रतिबंधित दवाओं की बड़ी मात्रा में बरामदगी की गई है। प्रशासन का कहना है कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है और इस अभियान को आगे भी और तेज किया जाएगा।

बैठक के दौरान अवैध मादक पदार्थों के निर्माण और भंडारण से जुड़े संभावित क्लैंडेस्टाइन लैब (Clandestine Labs) पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे किसी भी संदिग्ध स्थान की लगातार निगरानी की जाए और सूचना मिलने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन का मानना है कि यदि ऐसे अवैध ठिकानों पर समय रहते कार्रवाई की जाए तो नशे की बड़ी खेप बाजार तक पहुंचने से पहले ही रोकी जा सकती है।

इसके साथ ही औषधि निरीक्षक को निर्देशित किया गया कि नारकोटिक्स, साइकोट्रॉपिक एवं अन्य प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री रोकने के लिए मेडिकल स्टोरों, थोक दवा विक्रेताओं और अन्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण किया जाए। बिना वैध अनुमति प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल पुलिस कार्रवाई से नशे की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज की भागीदारी और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से सीबीएसई, आईसीएसई सहित सभी विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। छात्रों को यह बताया जाएगा कि नशा केवल स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि परिवार, समाज और भविष्य को भी बर्बाद कर देता है।

प्रशासन ने नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की। निर्देश दिए गए कि सभी पुनर्वास केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए ताकि उपचार और पुनर्वास की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से संचालित हो सके। अधिकारियों ने कहा कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

बैठक में सभी विभागों को निर्देशित किया गया कि “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत ग्राम पंचायतों, नगर क्षेत्रों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए युवाओं, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा ताकि नशे के खिलाफ सामाजिक माहौल तैयार हो सके।

प्रशासन का मानना है कि यदि समाज और सरकारी तंत्र मिलकर काम करें तो नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। इसी सोच के साथ विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और नियमित समीक्षा करने का भी निर्णय लिया गया।

बैठक में एसपी ट्रैफिक निशा यादव, सीओ सदर संजय शर्मा, ड्रग इंस्पेक्टर हरीश सिंह, एक्साइज इंस्पेक्टर दर्शन सिंह, डिप्टी कमिश्नर जीएसटी दीपक कुमार, इंस्पेक्टर शांति कुमार गंगवार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हरिद्वार में नशे के अवैध कारोबार, तस्करी और प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखने और जनपद को नशा मुक्त बनाने के लिए जागरूकता, उपचार, पुनर्वास और सख्त कानूनी कार्रवाई—चारों मोर्चों पर एक साथ काम किया जाएगा।

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