हर जिले में बने जिला मानवाधिकार आयोग: भदोरिया एसोसिएट की राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से बड़ी मांग! प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट-1993 में संशोधन कर जिला स्तर पर आयोग गठित करने की उठाई आवाज, आम नागरिकों को स्थानीय स्तर पर मिले न्याय,, अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, सुमेधा भदोरिया एडवोकेट और चेतन भदोरिया ने भेजा ज्ञापन, मानवाधिकार संरक्षण व्यवस्था को गांव-गांव तक पहुंचाने की पहल
हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट (पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह) एवं चेतन भदोरिया (एलएलबी अध्ययनरत) ने भारत के महामहिम राष्ट्रपति तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट, 1993 में आवश्यक संशोधन करते हुए देश के प्रत्येक जनपद में जिला मानवाधिकार आयोग की स्थापना किए जाने की मांग उठाई

हर जिले में बने जिला मानवाधिकार आयोग: भदोरिया एसोसिएट की राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से बड़ी मांग!
प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट-1993 में संशोधन कर जिला स्तर पर आयोग गठित करने की उठाई आवाज, आम नागरिकों को स्थानीय स्तर पर मिले न्याय,,
अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, सुमेधा भदोरिया एडवोकेट और चेतन भदोरिया ने भेजा ज्ञापन, मानवाधिकार संरक्षण व्यवस्था को गांव-गांव तक पहुंचाने की पहल
हरिद्वार। हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट (पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह) एवं चेतन भदोरिया (एलएलबी अध्ययनरत) ने भारत के महामहिम राष्ट्रपति तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट, 1993 में आवश्यक संशोधन करते हुए देश के प्रत्येक जनपद में जिला मानवाधिकार आयोग की स्थापना किए जाने की मांग उठाई है।


ज्ञापन में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 22, 23, 25 और 32 सहित अन्य संवैधानिक प्रावधान प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करते हैं। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए वर्ष 1993 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राज्यों में राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया था। हालांकि वर्तमान व्यवस्था देश की विशाल जनसंख्या, भौगोलिक विस्तार और बढ़ते मानवाधिकार मामलों को देखते हुए पर्याप्त नहीं है।
भदोरिया एसोसिएट ने अपने ज्ञापन में कहा कि आज भी पुलिस अत्याचार, अवैध हिरासत, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के उत्पीड़न, दिव्यांगजनों तथा कमजोर वर्गों के अधिकारों के हनन जैसे मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय और राहत नहीं मिल पाती। राज्य मानवाधिकार आयोग केवल राज्य मुख्यालय तक सीमित होने के कारण आम नागरिकों की वहां तक पहुंच आसान नहीं है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जब जिला स्तर पर जिला न्यायालय, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उपभोक्ता आयोग जैसी संस्थाएं प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं, तो मानवाधिकार संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था भी जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
जिला मानवाधिकार आयोग बनने से होंगे ये प्रमुख लाभ
- प्रत्येक नागरिक को स्थानीय स्तर पर मानवाधिकार संरक्षण मिलेगा।
- शिकायतों का त्वरित संज्ञान लेकर समयबद्ध जांच संभव होगी।
- पीड़ितों को राज्य मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
- महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और कमजोर वर्गों को तत्काल सहायता मिलेगी।
- थानों, जेलों, बाल गृहों, वृद्धाश्रमों और मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण हो सकेगा।
- मानवाधिकारों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी।
- राज्य मानवाधिकार आयोग पर मामलों का दबाव कम होगा।
- संविधान में निहित मानव गरिमा और मौलिक अधिकारों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।

प्रस्तावित जिला आयोग के अधिकार
ज्ञापन में जिला मानवाधिकार आयोग के संभावित अधिकार एवं कार्यक्षेत्र का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतें प्राप्त करना, जांच करना, संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगना, पीड़ितों को अंतरिम राहत एवं मुआवजे की अनुशंसा करना, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति करना, जिला प्रशासन को सुझाव देना, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में मानवाधिकार जागरूकता अभियान चलाना तथा प्रत्येक वर्ष जिला मानवाधिकार रिपोर्ट प्रकाशित करना शामिल है।
सरकार से की ये प्रमुख मांगें
भदोरिया एसोसिएट ने राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट, 1993 में आवश्यक संशोधन कर प्रत्येक जनपद में जिला मानवाधिकार आयोग के गठन का विधिक प्रावधान किया जाए। साथ ही विधि एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ विचार-विमर्श कर एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जो निर्धारित समय सीमा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इसके बाद संसद के आगामी सत्र में आवश्यक विधेयक लाकर जिला मानवाधिकार आयोग की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि प्रत्येक जिले में मानवाधिकार आयोग की स्थापना होती है तो आम नागरिकों को न्याय सुलभ होगा, शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी, प्रशासन की जवाबदेही बढ़ेगी, मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं में कमी आएगी तथा लोकतंत्र और सुशासन की भावना और अधिक मजबूत होगी। साथ ही भारत विश्व के समक्ष मानवाधिकार संरक्षण की विकेंद्रीकृत एवं प्रभावी व्यवस्था प्रस्तुत करने वाला एक आदर्श लोकतांत्रिक राष्ट्र बनकर उभरेगा।



