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हरिद्वार ग्रामीण की राजनीति में बड़ा उलटफेर, कांग्रेस को झटका,, हाजी इरशाद अंसारी और मुकर्रम अंसारी समर्थकों सहित बसपा में शामिल,, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बदले राजनीतिक समीकरण, क्षेत्र में तेज हुई टिकट और चुनावी रणनीति की चर्चाएं

हरिद्वार ग्रामीण की राजनीति में बड़ा उलटफेर, कांग्रेस को झटका,,

हाजी इरशाद अंसारी और मुकर्रम अंसारी समर्थकों सहित बसपा में शामिल,,

2027 विधानसभा चुनाव से पहले बदले राजनीतिक समीकरण, क्षेत्र में तेज हुई टिकट और चुनावी रणनीति की चर्चाएं

हरिद्वार ग्रामीण। वर्ष 2027 में प्रस्तावित उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रविवार को नसीरपुर कला में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हाजी मौ और इरसाद अली अंसारी ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का साथ छोड़कर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके साथ सराय निवासी मुकर्रम अंसारी सहित क्षेत्र के कई प्रमुख कार्यकर्ता भी बसपा में शामिल हुए। इस घटनाक्रम को हरिद्वार ग्रामीण की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

कार्यक्रम में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, जिला एवं विधानसभा स्तर के नेता, कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। पार्टी नेताओं ने सभी नए साथियों का फूल-मालाओं से स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके आने से हरिद्वार ग्रामीण में बसपा का जनाधार और संगठन दोनों मजबूत होंगे। नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव में मजबूती से मैदान में उतरने का भी संदेश दिया।

हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र में पिछले कई महीनों से यह चर्चा चल रही थी कि हाजी मौ, इरसाद अली अंसारी और मुकर्रम अंसारी बसपा से जुड़ सकते हैं तथा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार हो सकते हैं। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा था कि जब तक वे आधिकारिक रूप से कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल नहीं होते, तब तक इन अटकलों पर पूरी तरह विश्वास करना मुश्किल होगा। रविवार को हुए इस कार्यक्रम के बाद इन चर्चाओं पर विराम लग गया और दोनों नेताओं ने औपचारिक रूप से बसपा की सदस्यता लेकर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी।

हाजी मौ और इरसाद अली अंसारी लंबे समय से हरिद्वार ग्रामीण की राजनीति में सक्रिय और प्रभावशाली चेहरों के रूप में जाने जाते हैं। वहीं मुकर्रम अंसारी की क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ भी मजबूत मानी जाती है। ऐसे में इन नेताओं के बसपा में आने से पार्टी को मुस्लिम और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच राजनीतिक मजबूती मिलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट का चुनावी मुकाबला पहले से अधिक दिलचस्प हो सकता है। अब सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने में जुट सकते हैं। क्षेत्र में टिकट वितरण को लेकर भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

सबसे अधिक नजर अब इस बात पर है कि बसपा हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट से अपना अधिकृत प्रत्याशी किसे घोषित करती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि हाजी मौ और इरसाद अली अंसारी को पार्टी उम्मीदवार बनाया जाता है, तो क्षेत्र में मुकाबला काफी रोचक हो सकता है और त्रिकोणीय चुनावी संघर्ष की संभावना भी बन सकती है। हालांकि अंतिम तस्वीर सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपने-अपने प्रत्याशियों की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि हाजी मौ, इरसाद अली अंसारी और मुकर्रम अंसारी के बसपा में शामिल होने से हरिद्वार ग्रामीण की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। आने वाले दिनों में इसका असर क्षेत्र की चुनावी रणनीति, राजनीतिक समीकरणों और विधानसभा चुनाव की दिशा पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

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