हरिद्वार शिक्षा विभाग में अधिकारियों का टोटा, प्रभारी व्यवस्था के सहारे चल रही पूरी व्यवस्था,, मुख्य शिक्षा अधिकारी का पद भी ट्रांसफर के बाद खाली, कई ब्लॉकों में एक-एक अधिकारी संभाल रहे दोहरी जिम्मेदारी,, रिक्त पदों से निरीक्षण, शैक्षणिक मॉनिटरिंग और विभागीय जांच प्रभावित, शिक्षा निगरानी की गुणवत्ता पर उठने लगे सवाल

हरिद्वार शिक्षा विभाग में अधिकारियों का टोटा, प्रभारी व्यवस्था के सहारे चल रही पूरी व्यवस्था,,
मुख्य शिक्षा अधिकारी का पद भी ट्रांसफर के बाद खाली, कई ब्लॉकों में एक-एक अधिकारी संभाल रहे दोहरी जिम्मेदारी,,
रिक्त पदों से निरीक्षण, शैक्षणिक मॉनिटरिंग और विभागीय जांच प्रभावित, शिक्षा निगरानी की गुणवत्ता पर उठने लगे सवाल
हरिद्वार। सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा, नियमित निरीक्षण और शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षा विभाग में ही अधिकारियों का गंभीर अभाव सामने आया है। स्थिति यह है कि जिले में कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं और विभाग प्रभारी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है। मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) का पद भी स्थानांतरण के बाद खाली है, जिसकी जिम्मेदारी फिलहाल प्रभारी अधिकारी के भरोसे चल रही है। वहीं खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और उपखंड शिक्षा अधिकारी (एसडीईओ) के कई पद भी खाली होने से एक-एक अधिकारी को दो-दो ब्लॉकों का दायित्व संभालना पड़ रहा है।
अधिकारियों की कमी का असर अब विभागीय कार्यप्रणाली पर साफ दिखाई देने लगा है। विद्यालयों के नियमित निरीक्षण, शिक्षकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा, शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं हुईं तो इसका सीधा असर सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
एक अधिकारी के कंधों पर कई ब्लॉकों की जिम्मेदारी
हरिद्वार जिले में अधिकारियों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई अधिकारी एक साथ दो-दो ब्लॉकों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। हाल ही में भगवानपुर के खंड शिक्षा अधिकारी के पदोन्नत होकर जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) बनने के बाद भगवानपुर ब्लॉक का पद रिक्त हो गया। इसके बाद वहां की व्यवस्था प्रभारी अधिकारी के माध्यम से संचालित की जा रही है।
इसी प्रकार खानपुर ब्लॉक में एक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य को प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। लक्सर में तैनात विनोद कुमार खंड शिक्षा अधिकारी और उपखंड शिक्षा अधिकारी के साथ-साथ बहादराबाद ब्लॉक के उपखंड शिक्षा अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
वहीं रुड़की की खंड शिक्षा अधिकारी आकांक्षा राठौर एक साथ रुड़की और नारसन दोनों ब्लॉकों के खंड एवं उपखंड शिक्षा अधिकारी का कार्य देख रही हैं। जिले के सबसे बड़े बहादराबाद ब्लॉक में भगवानपुर के प्रधानाध्यापक विक्रम सिंह को प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। इससे स्पष्ट है कि विभाग सीमित संसाधनों और अधिकारियों के सहारे पूरी शिक्षा व्यवस्था को संचालित करने का प्रयास कर रहा है।
शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं बीईओ और एसडीईओ
खंड शिक्षा अधिकारी और उपखंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका शिक्षा विभाग में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इन अधिकारियों पर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के संचालन, शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी, पठन-पाठन की गुणवत्ता का मूल्यांकन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, विद्यालयों के नियमित निरीक्षण, विभागीय जांच तथा शिकायतों के निस्तारण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं।
जब एक अधिकारी को कई ब्लॉकों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है तो स्वाभाविक रूप से प्रत्येक विद्यालय तक समय पर पहुंचना और प्रभावी निगरानी करना चुनौती बन जाता है। इसका असर विद्यालयों के संचालन से लेकर शिक्षा की गुणवत्ता तक देखने को मिल सकता है।
प्रशासनिक कार्यों पर भी बढ़ा दबाव
अधिकारियों की कमी के कारण विभागीय कार्यों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। नियमित समीक्षा बैठकें समय पर आयोजित करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने, विद्यालयों का निरीक्षण करने तथा विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने में कठिनाइयां सामने आ रही हैं। कई विभागीय जांच और शिकायतों का निस्तारण भी लंबित बताया जा रहा है।
शिक्षा विभाग का कार्यक्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं की निगरानी, छात्र नामांकन अभियान और सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग जैसे कार्यों के लिए पर्याप्त अधिकारियों की आवश्यकता है। लेकिन रिक्त पदों के कारण वर्तमान अधिकारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया है।
शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बढ़ी चिंता
शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों और अभिभावकों का मानना है कि सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण और प्रभावी प्रशासनिक निगरानी बेहद जरूरी है। यदि अधिकारियों की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। शिक्षकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा, विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का आकलन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी कठिनाइयां आ सकती हैं।
जानकारों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जानी चाहिए ताकि प्रत्येक ब्लॉक को पूर्णकालिक अधिकारी मिल सके और विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो।
जिला शिक्षा अधिकारी अमित कुमार चंद का कहना है कि विभाग में कुछ पद रिक्त होने के कारण अधिकारियों को अतिरिक्त दायित्व सौंपे गए हैं। हालांकि इसका असर छात्रों के हितों पर नहीं पड़ने दिया जा रहा है। सभी अधिकारी आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। विद्यालयों का संचालन, शैक्षणिक गतिविधियां और विभागीय कार्य नियमित रूप से जारी हैं तथा निरीक्षण और मॉनिटरिंग भी उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कराई जा रही है।
हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभारी व्यवस्था लंबे समय तक स्थायी समाधान नहीं हो सकती। जिले की शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी सहित खंड एवं उपखंड शिक्षा अधिकारियों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति आवश्यक है। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी बल्कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को भी नई गति मिलेगी।




