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TET से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत दिलाने की मांग तेज, प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजा ज्ञापन,, उत्तराखंड स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन हरिद्वार ने उठाई पुरानी मांग, OPS बहाली और TET से छूट का भी किया आग्रह,, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए समान नीति लागू करने की मांग, हजारों शिक्षकों के भविष्य को लेकर सरकार से शीघ्र निर्णय की अपील

TET से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत दिलाने की मांग तेज, प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजा ज्ञापन,,

उत्तराखंड स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन हरिद्वार ने उठाई पुरानी मांग, OPS बहाली और TET से छूट का भी किया आग्रह,,

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए समान नीति लागू करने की मांग, हजारों शिक्षकों के भविष्य को लेकर सरकार से शीघ्र निर्णय की अपील

हरिद्वार। उत्तराखंड स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, जनपद हरिद्वार ने शिक्षकों से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दों—टीईटी (Teacher Eligibility Test) से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट तथा पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली—को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष जोरदार पैरवी की है। एसोसिएशन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अलग-अलग ज्ञापन भेजकर मांग की गई है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए और उनके हितों की रक्षा के लिए समान राष्ट्रीय नीति बनाई जाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों में हजारों शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति RTE Act, 2009 और एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना से पहले हुई थी। इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर हुई थी। इसलिए वर्षों बाद टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के Anjuman-I-Islam’s Saif Tyabji Girls High School बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा है कि न्यायालय ने पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि न्यायालय द्वारा टीईटी संबंधी अनुपालन अवधि को 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि इस विषय पर व्यापक और व्यावहारिक समाधान की आवश्यकता है।

एसोसिएशन का कहना है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी का कोई वैधानिक अस्तित्व नहीं था। उस समय नियुक्तियां तत्कालीन नियमों और शैक्षणिक अर्हताओं के आधार पर हुई थीं। ऐसे में बाद में लागू किए गए नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है। संगठन ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि इस विषय पर स्पष्ट और समान नीति बनाकर सभी राज्यों में एकरूपता सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि देश के विभिन्न राज्यों में इस विषय को लेकर अलग-अलग स्थिति बनी हुई है, जिससे शिक्षकों के बीच असमंजस और असमानता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। यदि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करती है तो वर्षों से लंबित यह विवाद समाप्त हो सकेगा और प्रभावित शिक्षकों को राहत मिलेगी।

इसके साथ ही एसोसिएशन ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। संगठन का कहना है कि शिक्षक और कर्मचारी अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय शिक्षा और राष्ट्र निर्माण को समर्पित करते हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। नई पेंशन व्यवस्था की तुलना में पुरानी पेंशन योजना अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद मानी जाती है, इसलिए सरकार को इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।

ज्ञापन में सरकार से छह प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए आवश्यक नीतिगत निर्णय लेना, एनसीटीई के माध्यम से इस विषय पर आवश्यक संशोधन या स्पष्टीकरण जारी करना, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा करना, सभी राज्यों के लिए समान नीति लागू करना, इस विषय पर आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक पहल करना तथा पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू करने पर सकारात्मक निर्णय लेना शामिल है।

उत्तराखंड स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, हरिद्वार का कहना है कि यह मांग किसी विशेष वर्ग को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि उन शिक्षकों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए उठाई गई है जिन्होंने अपनी नियुक्ति के समय लागू सभी नियमों का पालन किया था और वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। संगठन का मानना है कि उनकी सेवा, अनुभव और योगदान को देखते हुए उन्हें अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक उलझनों में नहीं फंसाया जाना चाहिए।

ज्ञापन पर जिला अध्यक्ष अभिनवी चौहान, जिला कोषाध्यक्ष अरविंद शर्मा तथा जिला मंत्री हेमंत चौहान के हस्ताक्षर हैं। संगठन ने केंद्र सरकार से अपेक्षा जताई है कि वह शिक्षकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शीघ्र निर्णय लेगी, जिससे हजारों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ी अनिश्चितता समाप्त होगी और शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता तथा विश्वास का वातावरण मजबूत होगा।

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