बाबा रामदेव का बड़ा हमला: “मनमर्जी का नाम आजादी नहीं”, भ्रष्टाचारियों को चेताया—“सुधर जाओ, कहीं फिर आंदोलन न करना पड़े,, शिक्षा तंत्र से भर्ती प्रक्रिया तक बाबा रामदेव के तीखे सवाल, पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर जताई नाराजगी,, बोले—देश किसी पार्टी या सरकार का नहीं, 145 करोड़ भारतीयों का है; नशामुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त और चरित्रवान भारत बनाने का लें संकल्प
बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस पर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, भर्ती में भ्रष्टाचार और युवाओं में बढ़ते नशे पर तीखा हमला बोला, सुधार नहीं तो आंदोलन की चेतावनी दी।

बाबा रामदेव का बड़ा हमला: “मनमर्जी का नाम आजादी नहीं”, भ्रष्टाचारियों को चेताया—“सुधर जाओ, कहीं फिर आंदोलन न करना पड़े,,
शिक्षा तंत्र से भर्ती प्रक्रिया तक बाबा रामदेव के तीखे सवाल, पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर जताई नाराजगी,,
बोले—देश किसी पार्टी या सरकार का नहीं, 145 करोड़ भारतीयों का है; नशामुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त और चरित्रवान भारत बनाने का लें संकल्प

हरिद्वार में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पतंजलि योगपीठ में योग गुरु बाबा रामदेव ने ध्वजारोहण के बाद देश की मौजूदा व्यवस्था को लेकर तीखे तेवर दिखाए। पत्रकारों से बातचीत में बाबा रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्ती प्रक्रिया, भ्रष्टाचार, पेपर लीक, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और राजनीतिक कटुता जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आजादी का अर्थ मनमर्जी से जीवन जीना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाना है।
बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और बेईमानी को लेकर बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि जो लोग देश में भ्रष्टाचार और घपले कर रहे हैं, वे केवल व्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचा रहे, बल्कि देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों का भी अपमान कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि देश में बहुत घपला है, “सुधर जाओ, कहीं ऐसा न हो कि बाबा रामदेव को फिर आंदोलन करना पड़े।”
शिक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बाबा रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश के अनेक छोटे स्कूलों और कॉलेजों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। कहीं शिक्षक पर्याप्त नहीं हैं, कहीं बिजली-पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं का अभाव है तो कहीं विद्यार्थियों को किताबों और अन्य जरूरी संसाधनों की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में नकल और पेपर लीक जैसी शिकायतों को भी गंभीर समस्या बताया। बाबा रामदेव ने कहा कि विद्यार्थी वर्षों तक मेहनत करते हैं, परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन यदि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने या परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी जैसी शिकायतें सामने आती हैं तो मेहनत करने वाले युवाओं के साथ अन्याय होता है।
उन्होंने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की उपयोगिता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में मेहनत करके अच्छे अंक प्राप्त करते हैं, लेकिन उच्च शिक्षा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश के दौरान परिस्थितियां अलग हो जाती हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में एक ऐसी नीति की जरूरत बताई जिसमें विद्यार्थियों की मेहनत और योग्यता का वास्तविक मूल्यांकन हो।
सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता की मांग, अनशन की चेतावनी
सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर बाबा रामदेव ने और भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में साक्षात्कार के स्तर पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि यदि योग्य युवाओं को उनकी योग्यता के बजाय पैसे, सिफारिश या किसी अन्य प्रभाव के आधार पर अवसर मिलता है तो यह व्यवस्था और लोकतांत्रिक न्याय दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
बाबा रामदेव ने सरकारों से भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश का युवा मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है। ऐसे में पेपर लीक, भर्ती घोटाले या भ्रष्टाचार की कोई भी शिकायत युवाओं के विश्वास को तोड़ती है।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो युवाओं का असंतोष बढ़ सकता है। बाबा रामदेव ने कहा कि अगर व्यवस्था में व्याप्त घपले और घोटालों को ठीक नहीं किया गया तो उन्हें देशहित में पूर्व की तरह दोबारा आंदोलन या अनशन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
“मेरी मर्जी, मेरा जीवन” पर बोले बाबा—यह आजादी नहीं, अनुशासनहीनता है
बाबा रामदेव ने Gen Z के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ युवा नशे की गिरफ्त में आकर “मेरी मर्जी, मेरा जीवन” जैसी सोच को स्वतंत्रता से जोड़ते हैं, लेकिन मनमर्जी को आजादी का नाम नहीं दिया जा सकता। उनके अनुसार वास्तविक स्वतंत्रता जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ आती है।
उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाने की अपील की। बाबा रामदेव ने नशामुक्त भारत के साथ-साथ भ्रष्टाचारमुक्त और चरित्रवान भारत के निर्माण को समय की आवश्यकता बताया।
सड़क से संसद तक बढ़ती राजनीतिक कटुता पर भी जताई चिंता
योग गुरु ने देश में बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक कटुता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सड़क से लेकर संसद तक कई बार ऐसा माहौल दिखाई देता है, मानो पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे के दुश्मन हों। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कई बार दोनों पक्ष ऐसे आमने-सामने दिखाई देते हैं, जैसे भारत और पाकिस्तान खड़े हों।
उन्होंने जाति और धर्म के नाम पर समाज में बढ़ती दूरी को समाप्त करने की अपील की। बाबा रामदेव ने कहा कि भारत किसी एक राजनीतिक दल, सरकार, विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री का देश नहीं है। यह देश करोड़ों भारतीयों का है और इसकी एकता तथा अखंडता की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बाबा रामदेव ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे भ्रष्टाचार, बेईमानी, शोषण, नशे और सामाजिक विभाजन के खिलाफ सामूहिक रूप से खड़े हों। उन्होंने कहा कि आजादी केवल तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने के संकल्प में बदलना होगा।



