सोलर लाइट घोटाले की फाइल खुली तो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची कुर्सी की लड़ाई, याचिका खारिज!…… डीएम के जनता दरबार में पहुंचा मामला, पंचायतों में छह माह में लगी सोलर लाइटों का मांगा पूरा हिसाब; 1.48 लाख के भुगतान से खुली जांच की परत

सोलर लाइट घोटाले की फाइल खुली तो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची कुर्सी की लड़ाई, याचिका खारिज!……
डीएम के जनता दरबार में पहुंचा मामला, पंचायतों में छह माह में लगी सोलर लाइटों का मांगा पूरा हिसाब; 1.48 लाख के भुगतान से खुली जांच की परत

हरिद्वार। पंचायतों में सोलर लाइट लगाने के नाम पर सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक तरफ मामला जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के जनता दरबार तक पहुंच गया है, तो दूसरी तरफ पूर्व डीपीआरओ मोहम्मद मुस्तफा खान की ओर से हरिद्वार में दोबारा पद संभालने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष अनुमति याचिका खारिज होने की बात सामने आई है। ऐसे में सोलर लाइटों की खरीद, स्थापना और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड अब जांच के केंद्र में आ गए हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ने पिछले छह माह के दौरान ग्राम पंचायतों में लगाई गई सोलर लाइटों का पूरा विवरण तलब कर लिया है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित पंचायतों में लाइटों की वास्तविक स्थापना, भुगतान, खरीद प्रक्रिया और अभिलेखों का मिलान किए जाने की बात कही गई है।
एक पंचायत से खुला मामला, 1.48 लाख का भुगतान जांच के घेरे में
प्रकरण की शुरुआत भगवानपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत शहीदवाला ग्रंट से सामने आए मामले से हुई। आरोप है कि बिना सोलर लाइट लगाए ही बाहरी फर्म को करीब 1.48 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया।
डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ने 25 सितंबर को मामले की जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितता सामने आने के बाद ग्राम पंचायत विकास अधिकारी अनुज शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। जांच के दौरान पूछताछ में निलंबित अधिकारी ने पूर्व डीपीआरओ मोहम्मद मुस्तफा खान के बार-बार कहने पर भुगतान करने का आरोप लगाया। इन आरोपों के बाद पूर्व डीपीआरओ की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की स्थिति बनी है।
यह पूरा मामला अब केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं माना जा रहा। विभाग ने अन्य ग्राम पंचायतों में भी सोलर लाइटों की खरीद और भुगतान से जुड़े दस्तावेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जनता दरबार में पहुंचा मामला, पंचायत के पैसे की रिकवरी की मांग
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोहन सिंह ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के जनता दरबार में सोलर लाइट प्रकरण को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सोलर लाइटों के नाम पर पंचायतों की धनराशि के दुरुपयोग की जांच कराई जाए और यदि सरकारी धन की अनियमित निकासी साबित होती है तो उसकी रिकवरी कराई जाए।जिलाधिकारी ने मामले में जांच कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है। यानी अब यह मामला विभागीय स्तर से निकलकर सीधे जिला प्रशासन की निगरानी में भी पहुंच गया है।
छह माह की लाइटों का हिसाब तलब, अब खुलेगा खरीद से भुगतान तक का पूरा खेल
डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ने ग्राम पंचायतों में पिछले छह माह के दौरान लगाई गई सोलर लाइटों की रिपोर्ट तलब की है। इसमें कितनी लाइटें खरीदी गईं, किस फर्म से खरीदी गईं, किस कीमत पर खरीदी गईं, कहां-कहां लगाई गईं और उनके भुगतान की प्रक्रिया क्या रही—इन तमाम बिंदुओं पर रिकॉर्ड खंगाला जाएगा।
रिपोर्ट आने के बाद स्थलीय सत्यापन और दस्तावेजों के मिलान के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।यानी अब सिर्फ कागज पर दर्ज लाइटों का हिसाब नहीं चलेगा। जरूरत पड़ने पर मौके पर जाकर यह भी देखा जाएगा कि जिन लाइटों के नाम पर भुगतान हुआ, वे वास्तव में जमीन पर मौजूद हैं या नहीं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पूर्व डीपीआरओ
मामले का दूसरा बड़ा पहलू पूर्व डीपीआरओ मोहम्मद मुस्तफा खान से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। सोमवार को उनकी याचिका पहली ही तारीख पर खारिज होने की बात सामने आई है।
इसके बाद हरिद्वार में डीपीआरओ के रूप में अतुल प्रताप सिंह के बने रहने की स्थिति स्पष्ट हुई है। अब विभागीय स्तर पर सोलर लाइट प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच और आगे बढ़ सकती है।
सवाल अब सिर्फ लाइटों का नहीं, पंचायत के पैसे का है
सोलर लाइट प्रकरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी पंचायत में बिना काम कराए भुगतान हुआ है तो जिम्मेदारी किसकी है? खरीद प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई? दरें किस आधार पर तय हुईं? टेंडर और आपूर्ति के दस्तावेज कहां हैं? और सबसे बड़ा सवाल—यदि सरकारी धन का गलत इस्तेमाल हुआ तो उसकी भरपाई कौन करेगा?
विभाग की रिपोर्ट और जांच के बाद ही इन सवालों के आधिकारिक जवाब सामने आएंगे। फिलहाल एक पंचायत में सामने आए कथित भुगतान प्रकरण ने पूरे जिले में लगी सोलर लाइटों की जांच की राह खोल दी है।
अब फाइलें खुलेंगी, तो कई सवालों के जवाब भी निकलेंगे
हरिद्वार की ग्राम पंचायतों में सोलर लाइटों के नाम पर हुए खर्च का पूरा रिकॉर्ड अब सामने आने वाला है। डीपीआरओ स्तर से रिपोर्ट तलब होने और जिलाधिकारी के जनता दरबार में मामला पहुंचने के बाद इस प्रकरण पर निगाहें टिक गई हैं।

अब असली परीक्षा कागजों की होगी—कितनी लाइटें खरीदी गईं, कितनी जमीन पर लगीं और कितने रुपये का भुगतान हुआ।
जांच में यदि वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय करने और सरकारी धन की रिकवरी की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। फिलहाल विभागीय रिपोर्ट और जांच का इंतजार है।



