हरिद्वार में किसानों का प्रदेशव्यापी तीन दिवसीय आंदोलन शुरू—स्मार्ट मीटर, मुफ्त बिजली और गन्ने के ₹750 रेट पर आर-पार की चेतावनी,, मंगलौर की गुड़ मंडी से जिला मुख्यालय तक निकली तिरंगा यात्रा, डीएम कार्यालय पर धरना शुरू; भाकियू टिकैत ने कहा—मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और उग्र,, 21 से 23 अगस्त तक चलेगा तीन दिवसीय धरना, 23 अगस्त को दोपहर 3 बजे होगा स्थगन; उत्तराखंड के कई जिलों में एक साथ आंदोलन, किसानों ने सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप

हरिद्वार में किसानों का प्रदेशव्यापी तीन दिवसीय आंदोलन शुरू—स्मार्ट मीटर, मुफ्त बिजली और गन्ने के ₹750 रेट पर आर-पार की चेतावनी,,
मंगलौर की गुड़ मंडी से जिला मुख्यालय तक निकली तिरंगा यात्रा, डीएम कार्यालय पर धरना शुरू; भाकियू टिकैत ने कहा—मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और उग्र,,
21 से 23 अगस्त तक चलेगा तीन दिवसीय धरना, 23 अगस्त को दोपहर 3 बजे होगा स्थगन; उत्तराखंड के कई जिलों में एक साथ आंदोलन, किसानों ने सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप

हरिद्वार। किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने उत्तराखंड सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को हरिद्वार जनपद में किसानों ने मंगलौर स्थित गुड़ मंडी से तिरंगा यात्रा निकालकर जिला मुख्यालय का रुख किया। यात्रा के जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचने के बाद किसानों ने वहीं तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। भाकियू टिकैत ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा और प्रदेशभर में निर्णायक संघर्ष छेड़ा जाएगा। भाकियू जिलाध्यक्ष विजय कुमार शास्त्री की ओर से जिलाधिकारी हरिद्वार को दिए गए पत्र में किसानों की समस्याओं को प्रदेश स्तर पर समाधान योग्य बताते हुए कई प्रमुख मांगें रखी गई हैं। संगठन ने कहा है कि किसानों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया गया तो इसका सीधा असर खेती, किसान और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।

स्मार्ट मीटर पर रोक और किसानों को मुफ्त बिजली की मांग
किसानों के आंदोलन में सबसे प्रमुख मुद्दा स्मार्ट मीटर का है। भाकियू टिकैत ने हरिद्वार में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाने की मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि बिजली व्यवस्था से जुड़ा यह मुद्दा केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मजदूर, गरीब और आम उपभोक्ता तक पड़ेगा।
किसानों ने खेती के लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर मुफ्त बिजली देने की मांग भी उठाई है। इसके साथ घरेलू बिजली पर भी राहत देने की मांग की गई है। किसान नेताओं का कहना है कि जब पड़ोसी राज्यों में किसानों को बिजली में राहत मिल सकती है तो उत्तराखंड जैसे ऊर्जा प्रदेश में किसानों को यह सुविधा क्यों नहीं दी जा रही।भाकियू नेताओं ने घरेलू सोलर सब्सिडी दोबारा शुरू करने की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि सरकार की नीतियों का बोझ आम जनता और किसानों पर बढ़ता जा रहा है।

नहर शुल्क माफी से लेकर पटवारियों की गांवों में मौजूदगी तक मांग
किसानों ने सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा है। मांग की गई है कि नहर का सिंचाई शुल्क माफ किया जाए, ताकि किसानों पर खेती की लागत का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
इसके साथ तहसीलों के पटवारियों को कम से कम तीन दिन गांवों में बैठने की व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है। किसान नेताओं का कहना है कि ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए तहसीलों के चक्कर काटने पड़ते हैं। यदि पटवारी नियमित रूप से गांवों में उपलब्ध रहें तो किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हो सकता है।

गन्ने के ₹750 प्रति क्विंटल भाव की मांग, पहाड़ में चकबंदी का मुद्दा भी उठा
भाकियू टिकैत ने आगामी सत्र में गन्ने का मूल्य ₹750 प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की है। किसान नेताओं का तर्क है कि खेती की लागत, महंगाई और गन्ने से बनने वाले चीनी, एथेनॉल तथा बिजली जैसे उत्पादों को देखते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
संगठन ने पहाड़ के किसानों की चकबंदी कराने की मांग भी उठाई है। किसान नेताओं के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में बिखरी हुई जमीन और जंगली जानवरों की समस्या खेती को प्रभावित कर रही है। उनका कहना है कि पहाड़ के किसान को मजबूत किए बिना पलायन की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
“किसानों की अनदेखी बंद करे सरकार”—संजय चौधरी
गढ़वाल मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी ने सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसान लगातार अपनी समस्याओं को सरकार के सामने रखते आए हैं, लेकिन समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि किसान सड़क पर इसलिए उतरता है क्योंकि उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। किसानों की आने वाली नस्लों और फसलों को बचाने के लिए आंदोलन को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने स्मार्ट मीटर और बिजली के मुद्दे को पूरे प्रदेश की जनता से जुड़ा मामला बताते हुए किसानों, मजदूरों और आम लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
“मांगें नहीं मानीं तो बड़ी पंचायत, फिर होगा बड़ा आंदोलन”
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष विजय कुमार शास्त्री ने कहा कि यह आंदोलन केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड के कई जिलों में एक साथ तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को अगले चरण में और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 21 से 23 अगस्त तक धरना चलेगा और 23 अगस्त को दोपहर तीन बजे इसे स्थगित किया जाएगा। इसके बाद संगठन आंदोलन की अगली रणनीति तय करेगा। यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो बड़ी पंचायत बुलाकर प्रदेशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया जाएगा। शास्त्री ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि किसान अपने खून-पसीने से अन्न पैदा करता है, लेकिन उसकी समस्याओं पर गंभीरता नहीं दिखाई जाती। उन्होंने कहा कि किसान अब केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होगा।

सरकार के लिए आंदोलन की चेतावनी बनी चुनौती
भाकियू टिकैत के इस प्रदेशव्यापी आंदोलन ने उत्तराखंड सरकार के सामने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है। स्मार्ट मीटर, मुफ्त बिजली, नहर शुल्क, सोलर सब्सिडी, गन्ने का मूल्य और पहाड़ के किसानों की चकबंदी जैसे मुद्दों को लेकर संगठन ने सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति साफ कर दी है।
किसान नेताओं का कहना है कि पहला चरण तीन दिन का है, लेकिन समाधान नहीं हुआ तो संघर्ष लंबा होगा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या तीन दिवसीय धरना समाप्त होने से पहले किसानों से बातचीत कर कोई ठोस समाधान निकालती है या आंदोलन अगले चरण में प्रवेश करेगा।



