‘ऑपरेशन 35 लाख’! आधी रात का खेल, जंगल में छिपा ट्रक और पुलिस का शिकंजा,, माइनिंग चेक पोस्ट से उड़ाया 12 टायरा ट्रक, नंबर प्लेट उतारकर मिटाई पहचान… लेकिन श्यामपुर पुलिस ने 48 घंटे में खोल दी पूरी ‘मिस्ट्री’,,
हरिद्वार में फिल्मी अंदाज की ट्रक चोरी का खुलासा—चोरों ने सोचा जंगल बनेगा सुरक्षित ठिकाना, पुलिस पहुंची तो झाड़ियों के बीच खड़ा मिला 35 लाख का ‘गायब’ ट्रक

‘ऑपरेशन 35 लाख’! आधी रात का खेल, जंगल में छिपा ट्रक और पुलिस का शिकंजा,,
माइनिंग चेक पोस्ट से उड़ाया 12 टायरा ट्रक, नंबर प्लेट उतारकर मिटाई पहचान… लेकिन श्यामपुर पुलिस ने 48 घंटे में खोल दी पूरी ‘मिस्ट्री’,,
हरिद्वार में फिल्मी अंदाज की ट्रक चोरी का खुलासा—चोरों ने सोचा जंगल बनेगा सुरक्षित ठिकाना, पुलिस पहुंची तो झाड़ियों के बीच खड़ा मिला 35 लाख का ‘गायब’ ट्रक

हरिद्वार। एक तरफ करोड़ों की मशीनरी और लाखों के वाहनों पर नजर गड़ाए अपराधी… दूसरी तरफ चोरी के बाद जंगल की झाड़ियों में छिपा दिया गया करीब 35 लाख रुपये का 12 टायरा ट्रक। ऊपर से ट्रक की नंबर प्लेट भी गायब, ताकि पुलिस को उसकी पहचान तक न मिल सके। कहानी पूरी तरह किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म जैसी थी।लेकिन फिल्म का क्लाइमेक्स अपराधियों ने नहीं, हरिद्वार पुलिस ने लिखा।
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर कोतवाली श्यामपुर पुलिस ने ऐसी तेजी दिखाई कि चोरी की यह ‘मिस्ट्री’ ज्यादा लंबी नहीं चल सकी। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने संदिग्धों की तलाश शुरू की और 31 अगस्त को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में जब राज खुला तो पुलिस भी सीधे उस जगह पहुंची, जहां चोरों ने समझा था कि उनका ‘कीमती माल’ किसी की नजर में नहीं आएगा।
पहला सीन—माइनिंग चेक पोस्ट से गायब हुआ 35 लाख का ट्रक
कहानी शुरू होती है 24 अगस्त 2026 से।
कोतवाली श्यामपुर क्षेत्र की माइनिंग चेक पोस्ट से करीब 35 लाख रुपये कीमत का 12 टायरा ट्रक चोरी हो गया। भारी-भरकम ट्रक के गायब होने की सूचना ने पुलिस को सक्रिय कर दिया।मामले में कोतवाली श्यामपुर में मु0अ0सं0-104/2026, धारा 303(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
सवाल एक था—
इतना बड़ा ट्रक आखिर गया कहां?
चोरों ने वाहन को गायब करने के बाद उसकी पहचान मिटाने की भी कोशिश की। ट्रक पर लगी नंबर प्लेट हटा दी गई। उन्हें लगा होगा कि नंबर प्लेट हटते ही पुलिस की तलाश मुश्किल हो जाएगी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
दूसरा सीन—पुलिस की एंट्री और संदिग्धों पर शिकंजा
श्यामपुर पुलिस ने मामले को चुनौती के रूप में लिया। संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और जांच की कड़ियां जोड़ी जाने लगीं।
आखिरकार पुलिस की जांच दो संदिग्धों तक पहुंची।
31 अगस्त को शहजाद परवेज और हबीब खां को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
पूछताछ शुरू हुई तो धीरे-धीरे चोरी की पूरी कहानी सामने आने लगी। पुलिस के अनुसार दोनों ने ट्रक चोरी करने की बात स्वीकार की और वह लोकेशन भी बताई जहां वाहन छिपाया गया था।
अब कहानी का सबसे अहम हिस्सा शुरू हुआ।
तीसरा सीन—जंगल, झाड़ियां और 35 लाख का ‘खजाना’
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि चोरी का ट्रक गैंडीखाता क्षेत्र में जंगल गुर्जर बस्ती की ओर जाने वाले रास्ते के पास छिपाया गया है।
उपनिरीक्षक गगन मैठाणी के नेतृत्व में पुलिस टीम दोनों आरोपियों को लेकर मौके पर पहुंची।
जंगल का इलाका…
चारों तरफ झाड़ियां…
और पुलिस की निगाहें उस वाहन को तलाश रही थीं, जिसकी कीमत करीब 35 लाख रुपये थी।
तलाशी आगे बढ़ी और फिर पुलिस को वह मिल गया जिसका इंतजार था।
झाड़ियों के बीच लाल रंग का 12 टायरा ओपन बॉडी ट्रक खड़ा था।
जिस ट्रक को चोरों ने जंगल की खामोशी में छिपा दिया था, वहां पुलिस की टीम पहुंच चुकी थी।
चौथा सीन—नंबर प्लेट गायब, लेकिन ‘पहचान’ नहीं मिटा पाए
आरोपियों ने ट्रक की नंबर प्लेट हटाकर उसकी पहचान मिटाने की कोशिश की थी। लेकिन पुलिस ने वाहन की पहचान के लिए चेसिस और इंजन नंबर का सहारा लिया।
दोनों नंबरों का सत्यापन किया गया और सामने आया कि बरामद वाहन वही ट्रक है, जिसकी चोरी का मुकदमा श्यामपुर कोतवाली में दर्ज था।
यानी नंबर प्लेट गायब करके अपराधियों ने पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश तो की, लेकिन ट्रक की असली पहचान उसके चेसिस और इंजन नंबर ने खोल दी।
क्लाइमेक्स—48 घंटे में खत्म हुई चोरी की ‘मिस्ट्री’
पुलिस की कार्रवाई ने इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब दिया जब चोरी हुआ करीब ₹35 लाख का ट्रक बरामद कर लिया गया।
बरामदगी की कार्रवाई को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत रिकॉर्ड किया गया। BNSS की धारा 105 के प्रावधानों का अनुपालन करते हुए ई-साक्ष्य एप के माध्यम से पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी की गई।
वाहन बरामद होने के बाद मुकदमे में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करते हुए धारा 317(2), 3(5) और 61(2) बीएनएस की वृद्धि की गई।
दो किरदार गिरफ्तार, अब पुलिस तलाश रही है बाकी कड़ियां
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शहजाद परवेज (38) निवासी नजीबाबाद, बिजनौर और हबीब खां (55) निवासी नजीबाबाद, बिजनौर के रूप में हुई है।
अब पुलिस की जांच का अगला सवाल यह है कि क्या इस वारदात में सिर्फ यही दो लोग शामिल थे या चोरी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था?
पुलिस टीम ने निभाया ‘ऑपरेशन 35 लाख’ का किरदार
इस पूरी कार्रवाई में थानाध्यक्ष नितेश शर्मा, उपनिरीक्षक मनोज रावत, उपनिरीक्षक गगन मैठाणी, उपनिरीक्षक देवेन्द्र तोमर, अपर उपनिरीक्षक रविन्द्र गौड़, हेड कांस्टेबल शेर सिंह, कांस्टेबल राहुल देव, संदीप रावत, मनमोहन सैनी, विनीत कुमार और SOG हरिद्वार के कांस्टेबल वसीम शामिल रहे।
एसपी क्राइम निशा यादव—‘अपराधी पकड़े जाएंगे और माल भी बरामद होगा’
एसपी क्राइम निशा यादव ने कहा कि हरिद्वार पुलिस की प्राथमिकता सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि अपराध से संबंधित संपत्ति की त्वरित बरामदगी कर पीड़ित को न्याय दिलाना भी है।
इस पूरी कहानी का सार यही है—
चोरों ने ट्रक चुराया…
नंबर प्लेट उतारी…
जंगल में झाड़ियों के बीच छिपाया…
और सोचा कि कहानी खत्म।
लेकिन हरिद्वार पुलिस ने जांच की कड़ियां जोड़ते हुए आरोपियों को पकड़ा, जंगल का रास्ता पकड़ा और आखिरकार 35 लाख रुपये के ‘गायब ट्रक’ को बरामद कर कहानी का क्लाइमेक्स अपने नाम कर लिया।अपराधियों की चालाकी बनाम पुलिस की मुस्तैदी—इस बार बाजी हरिद्वार पुलिस के नाम रही।



