जलभराव से सैकड़ों बीघा फसलें बर्बादी की कगार पर, किसानों की बढ़ी चिंता; मौ. सलीम ने उठाई सर्वे और मुआवजे की मांग,, हरिद्वार ग्रामीण और लक्सर क्षेत्र में खेतों में भरा बारिश का पानी, धान-गन्ने समेत खड़ी फसलों पर मंडराया संकट; सामाजिक कार्यकर्ता बोले—कागजी खानापूर्ति नहीं, जमीन पर उतरकर किसानों को तत्काल राहत दे प्रशासन

जलभराव से सैकड़ों बीघा फसलें बर्बादी की कगार पर, किसानों की बढ़ी चिंता; मौ. सलीम ने उठाई सर्वे और मुआवजे की मांग,,
हरिद्वार ग्रामीण और लक्सर क्षेत्र में खेतों में भरा बारिश का पानी, धान-गन्ने समेत खड़ी फसलों पर मंडराया संकट; सामाजिक कार्यकर्ता बोले—कागजी खानापूर्ति नहीं, जमीन पर उतरकर किसानों को तत्काल राहत दे प्रशासन
हरिद्वार। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और खेतों से पानी की समुचित निकासी नहीं होने के कारण हरिद्वार जिले के ग्रामीण इलाकों में किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हरिद्वार ग्रामीण और लक्सर क्षेत्र के कई हिस्सों में खेतों में जलभराव की स्थिति बनने से खड़ी फसलों पर संकट गहरा गया है। कई स्थानों पर खेतों में पानी जमा होने के कारण किसानों को अपनी महीनों की मेहनत बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है।
बारिश का पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहने से धान और गन्ने सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे समय में सामाजिक कार्यकर्ता मौ. सलीम ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वे कराने और नुकसान के आधार पर किसानों को उचित आर्थिक सहायता एवं मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
खेतों में पानी, किसान की मेहनत पर संकट
किसान के लिए फसल केवल खेत में खड़ी उपज नहीं होती, बल्कि उसके पूरे परिवार की आर्थिक व्यवस्था उससे जुड़ी होती है। बुआई से लेकर खाद, बीज, सिंचाई, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी तक किसान पहले ही बड़ी लागत लगा चुका होता है। ऐसे में तैयार होती फसल यदि लगातार जलभराव की चपेट में आ जाए तो नुकसान केवल खेत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर किसान के परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
मौ. सलीम ने कहा कि बारिश और जलभराव के कारण किसानों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति मौके पर जाकर देखी जाए और किसानों के नुकसान का निष्पक्ष आकलन किया जाए।
सर्वे में देरी हुई तो बढ़ सकता है नुकसान
सामाजिक कार्यकर्ता मौ. सलीम का कहना है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक टीमों को तत्काल भेजा जाना चाहिए। खेतों में कितनी फसल प्रभावित हुई है, कितने क्षेत्रफल में पानी जमा है और किस किसान को कितना नुकसान हुआ है—इसका मौके पर जाकर सर्वे और आकलन किया जाना जरूरी है।
उन्होंने मांग की कि सर्वे की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि राजस्व एवं संबंधित विभागों की टीमें गांव-गांव जाकर वास्तविक स्थिति दर्ज करें। किसानों को भी सर्वे प्रक्रिया की जानकारी दी जाए ताकि किसी पात्र किसान का नुकसान सरकारी रिकॉर्ड से बाहर न रह जाए।
धान और गन्ने की फसल पर विशेष चिंता
जलभराव को लेकर किसानों की सबसे बड़ी चिंता धान और गन्ने जैसी फसलों को लेकर है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल की स्थिति खराब होने की आशंका रहती है। यदि जलनिकासी जल्द नहीं हुई तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।
हरिद्वार ग्रामीण और लक्सर जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में फसलों को होने वाला नुकसान स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। किसानों का कहना है कि बारिश प्राकृतिक परिस्थिति हो सकती है, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
‘किसान के खेत का पानी उसके परिवार के चूल्हे तक पहुंचता है’
मौ. सलीम ने कहा कि किसान की परेशानी को केवल खेत में खड़े पानी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान की फसल खराब होने का मतलब उसके परिवार की आय पर सीधा असर पड़ना है।
उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। प्रभावित किसानों की पहचान कर उन्हें तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाए और नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
जनप्रतिनिधियों से भी सक्रिय भूमिका निभाने की मांग
मौ. सलीम ने क्षेत्र के विधायकों और सांसदों से भी किसानों की समस्या को गंभीरता से उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि किसानों की समस्याएं केवल बयान या आश्वासन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को प्रभावित गांवों का दौरा कर किसानों की वास्तविक समस्याएं सुननी चाहिए और शासन स्तर पर राहत एवं मुआवजे की प्रक्रिया को तेज कराने की पहल करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका से प्रभावित किसानों की आवाज शासन तक मजबूती से पहुंच सकती है।
हर साल जलभराव से स्थायी समाधान की जरूरत
मौ. सलीम ने तत्काल राहत के साथ-साथ जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि हर वर्ष बारिश के मौसम में खेतों में पानी जमा होता है तो केवल मुआवजा देना पर्याप्त समाधान नहीं है।
इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में नालों और निकासी मार्गों की सफाई, बंद पड़े रास्तों को खोलने, अतिक्रमण की स्थिति की जांच करने और आवश्यकता के अनुसार नए जलनिकासी मार्ग विकसित करने की जरूरत है। संबंधित विभागों को बारिश से पहले ही जलनिकासी व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए ताकि किसानों को हर साल इसी संकट का सामना न करना पड़े।
‘कागजी खानापूर्ति नहीं, जमीन पर उतरना होगा’
मौ. सलीम ने प्रशासन से दो टूक कहा कि किसानों के नुकसान का वास्तविक आकलन कर तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इस समय किसानों को आश्वासन से अधिक ठोस मदद की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में उसकी फसल बर्बाद होती है तो सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि प्रभावित किसान को राहत पहुंचाई जाए।
फिलहाल लगातार बारिश के बीच खेतों में जलभराव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब किसानों की नजर प्रशासन की ओर है कि नुकसान का सर्वे कब शुरू होता है, जलनिकासी के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और प्रभावित किसानों को राहत एवं मुआवजा कब तक मिलता है। मौ. सलीम की मांग ने इस पूरे मुद्दे को एक बार फिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने प्रमुखता से ला खड़ा किया है।



