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हरिद्वार में गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का बड़ा प्लान, ‘विकसित भारत-जी राम जी’ से जुड़ेंगी सरकारी योजनाएं,, CDO डॉ. ललित नारायण मिश्र के सख्त निर्देश—हर गांव में सिंचाई, जल संरक्षण और स्थायी रोजगार पर फोकस; चंदन-आंवला से लेकर ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, मशरूम, रेशम और मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा

हरिद्वार में गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का बड़ा प्लान, ‘विकसित भारत-जी राम जी’ से जुड़ेंगी सरकारी योजनाएं,,

CDO डॉ. ललित नारायण मिश्र के सख्त निर्देश—हर गांव में सिंचाई, जल संरक्षण और स्थायी रोजगार पर फोकस; चंदन-आंवला से लेकर ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, मशरूम, रेशम और मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा

हरिद्वार, 05 सितंबर 2026।
हरिद्वार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर और सतत स्वावलंबी बनाने की दिशा में प्रशासन ने बड़ा खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। अब अलग-अलग विभागों की योजनाओं को भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के साथ जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य गांवों में केवल विकास कार्य कराना नहीं, बल्कि जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, रोजगार और स्थायी आय के ऐसे स्रोत तैयार करना है, जिनसे ग्रामीण परिवार लंबे समय तक आत्मनिर्भर बन सकें।

इसी उद्देश्य को लेकर विकास भवन सभागार, रोशनाबाद में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला विकास अधिकारी, सभी खंड विकास अधिकारी सहित कृषि, भेषज, जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान, उद्यान, रेशम, मत्स्य, पंचायतीराज, स्वजल, बाल विकास, डेयरी, सिंचाई, लघु सिंचाई और पशुपालन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

चार बड़े क्षेत्रों पर होगा विकास का पूरा फोकस

बैठक में सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि विकसित भारत-जी राम जी के तहत चार प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी है। इनमें जल सुरक्षा एवं संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसम से निपटने से जुड़े कार्य शामिल हैं।

इन चारों क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़कर काम करने पर जोर दिया गया, ताकि किसी एक योजना का लाभ दूसरी योजना को भी मिल सके और सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल हो।

सीडीओ ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि उनकी योजनाओं के अधिक से अधिक कार्यों को केन्द्राभिसरण/युगपतिकरण के माध्यम से विकसित भारत-जी राम जी के साथ जोड़ा जाए। इससे गांवों में एक ही स्थान पर कई योजनाओं का संयुक्त लाभ पहुंचाने की रणनीति तैयार होगी।

हर गांव तक पहुंचेगी सिंचाई सुविधा, अधिकारियों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ खेती को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने सिंचाई व्यवस्था पर विशेष जोर दिया है। सीडीओ ने सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग को निर्देश दिए कि प्रत्येक गांव में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए।

प्रशासन का लक्ष्य है कि पानी की उपलब्धता और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करके किसानों की उत्पादकता बढ़ाई जाए। जल संरक्षण और सिंचाई को आजीविका से जोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आय के नए अवसर भी पैदा किए जा सकेंगे।

चंदन-आंवला से लेकर ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी तक पर नजर

ग्रामीणों के लिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई और अधिक आय देने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देने की रणनीति भी बनाई गई है।

भेषज विभाग एवं जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान को चंदन और आंवला पौधरोपण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके पीछे उद्देश्य पौधरोपण को भविष्य की आय से जोड़ना है।

वहीं उद्यान विभाग को ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और मशरूम उत्पादन को प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी दी गई है। ये गतिविधियां किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने में मदद कर सकती हैं।

इसी क्रम में रेशम विभाग को शहतूत वृक्षारोपण को बढ़ावा देने और मत्स्य विभाग को मत्स्य पालन के विस्तार पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। यानी गांवों में रोजगार और आय के विकल्प केवल खेती तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि बागवानी, औषधीय पौधों, रेशम उत्पादन और मत्स्य पालन को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

Self Sustainable Village Model से बदलेंगे गांवों के विकास का तरीका

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण जोर Self Sustainable Village Model यानी सतत स्वावलंबी ग्राम मॉडल पर दिया गया। विकासखंडों को ऐसे गांव विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां ग्रामीण स्तर पर ही स्थायी आय के स्रोत तैयार किए जा सकें।

इस मॉडल के तहत गांवों में जल संचय, बेहतर जल निकासी, सिंचाई सुविधाएं, स्वच्छता और आजीविका गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कूड़ा एवं अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने की योजना है। इससे गांवों की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होने के साथ स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार और आय के अवसर भी पैदा किए जा सकेंगे।

नर्सरी निर्माण से महिलाओं और ग्रामीण समूहों को मिलेंगे नए अवसर

आजीविका संवर्धन के लिए नर्सरी निर्माण जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। नर्सरी के माध्यम से पौधरोपण अभियानों को स्थानीय स्तर पर पौध उपलब्ध हो सकेंगे और ग्रामीण समूहों के लिए आय का एक नया जरिया तैयार हो सकता है।

प्रशासन की रणनीति में खास बात यह है कि जल संरक्षण, पर्यावरण, कृषि, स्वच्छता और रोजगार को अलग-अलग विषय न मानकर एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

अब कागजों से जमीन तक पहुंचाने की चुनौती

बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद अब संबंधित विभागों को अपनी-अपनी कार्ययोजनाएं तैयार कर उन्हें आपस में जोड़ना होगा। योजनाओं का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा जब गांवों में इनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।

अगर Self Sustainable Village Model धरातल पर प्रभावी तरीके से लागू होता है तो गांवों में पानी, खेती, स्वच्छता, रोजगार और स्थानीय आय के बीच मजबूत कड़ी तैयार हो सकती है।

हरिद्वार प्रशासन की यह पहल ग्रामीण विकास को पारंपरिक सरकारी योजनाओं से आगे ले जाकर ‘एक गांव—कई योजनाएं—स्थायी आय’ के मॉडल की ओर बढ़ाने का प्रयास है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अधिकारियों की बैठक में तैयार हुआ यह विजन गांवों की जमीन पर कितनी तेजी से दिखाई देता है।

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