हरिद्वार में पानी बचाने का बड़ा ‘ऑपरेशन’ शुरू, SARRA ने करोड़ों की योजनाओं पर लगाई मुहर,, भूजल संकट से निपटने के लिए 63 रिचार्ज शाफ्ट और 6 तालाबों पर खर्च होंगे 528.55 लाख रुपये, विकासखंडों की योजनाओं को भी मिली मंजूरी—पथरी रौ नदी के लिए बनेगी विशेष कार्ययोजना

हरिद्वार में पानी बचाने का बड़ा ‘ऑपरेशन’ शुरू, SARRA ने करोड़ों की योजनाओं पर लगाई मुहर,,
भूजल संकट से निपटने के लिए 63 रिचार्ज शाफ्ट और 6 तालाबों पर खर्च होंगे 528.55 लाख रुपये, विकासखंडों की योजनाओं को भी मिली मंजूरी—पथरी रौ नदी के लिए बनेगी विशेष कार्ययोजना

हरिद्वार, 05 सितंबर 2026।
हरिद्वार में लगातार बढ़ते जल दबाव और भूजल संरक्षण की जरूरत के बीच प्रशासन ने जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार के जल संरक्षण अभियान के तहत स्प्रिंग एंड रिवर रेजुवेनेशन अथॉरिटी (SARRA) की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति (DLEC) की बैठक में जल संरक्षण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण कार्ययोजनाओं को हरी झंडी दे दी गई। विकास भवन सभागार में हुई बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी एवं SARRA के जिला स्तरीय कार्यकारी समिति के उपाध्यक्ष डॉ. ललित नारायण मिश्र ने की।
बैठक में साफ संकेत दिया गया कि आने वाले समय में केवल जल स्रोतों के संरक्षण की बात नहीं होगी, बल्कि बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने, तालाबों को पुनर्जीवित करने और भूजल स्तर को मजबूत करने के लिए धरातल पर बड़े पैमाने पर काम कराया जाएगा। इसके लिए विभिन्न विभागों और विकासखंडों की कार्ययोजनाओं को मंजूरी दी गई।
528.55 लाख रुपये की दो बड़ी योजनाओं पर बड़ा फोकस
जल संरक्षण की इस पूरी कवायद में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका लघु सिंचाई विभाग की योजनाओं की रहने वाली है। विभाग की ओर से 63 रिचार्ज शाफ्ट बनाने के लिए 331.15 लाख रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई। इसके अलावा 06 तालाबों के निर्माण एवं पुनरोद्धार के लिए 197.40 लाख रुपये का प्रस्ताव रखा गया।
दोनों योजनाओं को जोड़ें तो अकेले इन कार्यों के लिए 528.55 लाख रुपये यानी करीब 5.29 करोड़ रुपये का प्रावधान सामने आया है। रिचार्ज शाफ्ट और तालाबों के जरिए बारिश के पानी को अधिक प्रभावी तरीके से संरक्षित करने और भूजल संवर्धन को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहरीकरण, बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग के बीच भूजल का संरक्षण भविष्य की बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में बारिश के पानी को सीधे बह जाने देने के बजाय उसे जल स्रोतों और भूजल भंडार तक पहुंचाने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।
भगवानपुर से नारसन तक विकासखंडों की योजनाओं को मंजूरी
बैठक में जिले के विभिन्न विकासखंडों ने भी जल संरक्षण से संबंधित अपनी कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं। भगवानपुर विकासखंड ने 181.65 लाख रुपये की योजना प्रस्तुत की। इसी तरह बहादराबाद ने 95.08 लाख रुपये, लक्सर ने 36.98 लाख रुपये, रुड़की ने 70.65 लाख रुपये तथा नारसन ने 65.15 लाख रुपये की कार्ययोजनाएं समिति के समक्ष रखीं।
इन योजनाओं में सिर्फ एक प्रकार के काम को शामिल नहीं किया गया है, बल्कि तालाब निर्माण एवं पुनरोद्धार, रिचार्ज पिट निर्माण, वृक्षारोपण और जल संरक्षण से जुड़े अन्य कार्यों को भी शामिल किया गया है।
पांचों विकासखंडों की प्रस्तावित योजनाओं की कुल राशि 449.51 लाख रुपये यानी करीब 4.50 करोड़ रुपये बैठती है। समिति ने प्रस्तुत कार्ययोजनाओं पर चर्चा के बाद उन्हें सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की।
तालाबों को मिलेगा नया जीवन, बारिश का पानी नहीं होगा बेकार
जल संरक्षण की योजनाओं में तालाबों के निर्माण और पुराने तालाबों के पुनरोद्धार को विशेष महत्व दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब पारंपरिक रूप से वर्षा जल संचयन और स्थानीय जल संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में इन जल स्रोतों को फिर से सक्रिय करने की योजना का सीधा असर जल संरक्षण पर पड़ सकता है। 06 तालाबों के निर्माण और पुनरोद्धार के लिए प्रस्तावित 197.40 लाख रुपये की योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं रिचार्ज पिट और रिचार्ज शाफ्ट बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल भंडार को मजबूत करने में मदद करेंगे।
‘एक जनपद, एक नदी’ अभियान में पथरी रौ पर प्रशासन की नजर
बैठक में ‘एक जनपद, एक नदी’ अभियान को लेकर भी अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए गए। सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने संबंधित अधिकारियों को पथरी रौ से संबंधित कार्ययोजना जल्द तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
इस निर्देश से स्पष्ट है कि प्रशासन जल संरक्षण को केवल तालाब और रिचार्ज शाफ्ट तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि जिले के प्राकृतिक जल स्रोतों और नदी-नालों के संरक्षण को भी अभियान का हिस्सा बनाने पर जोर दे रहा है। सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। योजनाओं की स्वीकृति के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इनके प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन की होगी।
वृक्षारोपण भी बनेगा जल संरक्षण अभियान का हिस्सा
जल संरक्षण की स्वीकृत कार्ययोजनाओं में वृक्षारोपण को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करते हुए जल संरक्षण की व्यापक रणनीति को प्रभावी बनाना है। बारिश के पानी के संरक्षण से लेकर भूजल संवर्धन और जल स्रोतों के पुनर्जीवन तक, योजनाओं को आपस में जोड़कर काम करने पर जोर दिया जा रहा है।
अब असली परीक्षा धरातल पर अमल की
SARRA समिति की बैठक में योजनाओं को मंजूरी मिलना जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम जरूर है, लेकिन अब निगाहें इनके धरातलीय क्रियान्वयन पर रहेंगी। करोड़ों रुपये की इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब रिचार्ज शाफ्ट, तालाब, रिचार्ज पिट और वृक्षारोपण जैसे कार्य निर्धारित गुणवत्ता और समयसीमा के भीतर पूरे हों।
बैठक में सदस्य सचिव/नोडल अधिकारी (SARRA) एवं अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई खंड हरिद्वार भरत राम सहित संबंधित रेखीय विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।हरिद्वार में जल संरक्षण की इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में भूजल संवर्धन, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि कागजों पर स्वीकृत यह करोड़ों का प्लान जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ उतरता है।



