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रात का अंधेरा… पेड़ों पर चल रही थी आरी! अचानक पहुंची कार्यवाहक टीम और फिर शुरू हुआ ‘ट्रॉली कांड’!… ग्राम समाज की जमीन पर हरे पेड़ों के कथित कटान का आरोप—लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली कब्जे में लेने के बाद कथित तौर पर छोड़ने का दावा, अब शिकायत ने खोल दिए कई सवाल,, शिकायतकर्ता डॉ. नईमा मलिक ने उप जिलाधिकारी हरिद्वार को शिकायती पत्र देकर मामले की पूरी जांच की मांग 

रात का अंधेरा… पेड़ों पर चल रही थी आरी! अचानक पहुंची कार्यवाहक टीम और फिर शुरू हुआ ‘ट्रॉली कांड’!…

ग्राम समाज की जमीन पर हरे पेड़ों के कथित कटान का आरोप—लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली कब्जे में लेने के बाद कथित तौर पर छोड़ने का दावा, अब शिकायत ने खोल दिए कई सवाल,,

शिकायतकर्ता डॉ. नईमा मलिक ने उप जिलाधिकारी हरिद्वार को शिकायती पत्र देकर मामले की पूरी जांच की मांग

हरिद्वार… समय—शाम करीब 6 बजे… जगह—मोहम्मदपुर कुन्हारी… और कहानी में एंट्री होती है एक पेड़ कटान आरी की!

चारों तरफ सामान्य माहौल था, लेकिन कब्रिस्तान के पास ग्राम समाज की भूमि पर कथित तौर पर हरे पेड़ों पर आरी चल रही थी। पेड़ गिर रहे थे और लकड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादी जा रही थी। तभी वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर पड़ी और फिर कहानी ने अचानक यू-टर्न ले लिया।

मामला था खसरा नंबर 182 का, जिसे शिकायतकर्ता ने ग्राम समाज की भूमि बताया है। आरोप है कि यहां बिना वैध अनुमति हरे पेड़ों का कटान किया जा रहा था। सूचना तत्काल पुलिस चौकी प्रभारी सुल्तानपुर, थाना लक्सर को दी गई।

इसके बाद फिल्म का अगला सीन शुरू होता है…

सूचना मिलते ही वन विभाग के बीट अधिकारी सत्यम और चीता पुलिस मौके पर पहुंच गई। लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को कथित तौर पर कब्जे में लिया गया। मौके पर मौजूद लोगों में हलचल मच गई। लगा कि अब कार्रवाई होगी, लकड़ी जब्त होगी और पेड़ों की गिनती होगी।

लेकिन शिकायत के मुताबिक, कहानी में यहीं आया सबसे बड़ा ट्विस्ट!

आरोप है कि कुछ देर बाद लकड़ी से भरी ट्रॉली को बिना किसी स्पष्ट कानूनी कार्रवाई या जांच के वहां से जाने दिया गया।

अब सवालों की बौछार है—

अगर पेड़ वैध तरीके से काटे जा रहे थे तो कार्रवाई की नौबत क्यों आई?

और अगर कटान अवैध था तो ट्रॉली कथित तौर पर छोड़ी क्यों गई?

क्या कटे पेड़ों की पैमाइश हुई?

क्या मौके पर ठूंठों की गिनती हुई?

क्या राजस्व रिकॉर्ड से भूमि की स्थिति जांची गई?

और सबसे बड़ा सवाल—

जिस जमीन को ग्राम समाज की बताया जा रहा है, वहां पेड़ों की कटाई की अनुमति आखिर किसने दी?

शिकायतकर्ता डॉ. नईमा मलिक ने उप जिलाधिकारी हरिद्वार को शिकायती पत्र देकर मामले की पूरी जांच की मांग की है। उन्होंने कटे हुए पेड़ों के ठूंठों और जड़ों की विधिवत पैमाइश कराने तथा लकड़ी से भरी ट्रॉली को कथित तौर पर बिना कार्रवाई छोड़ने के मामले की भी जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में स्थानीय स्तर पर मौजूद वर्तमान ग्राम प्रधान इस्तकार और पूर्व प्रधान पति ताहिर हसन का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।

शिकायत की प्रतियां जिलाधिकारी हरिद्वार, वन संरक्षक शिवालिक वृत्त, डीएफओ हरिद्वार और एसएसपी हरिद्वार को भेजी गई हैं।

अब असली कहानी प्रशासनिक जांच के बाद सामने आएगी। कितने पेड़ कटे? किसकी अनुमति थी? लकड़ी कहां जा रही थी? ट्रॉली को क्यों छोड़ा गया? और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो जिम्मेदार कौन है?

फिलहाल मोहम्मदपुर कुन्हारी में पेड़ों की कटाई से ज्यादा चर्चा उस ‘ट्रॉली वाले ट्विस्ट’ की है, जिसने पूरे मामले को रहस्य बना दिया है।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस कहानी का अगला अध्याय लिखता है—‘कार्रवाई’ या फिर फाइलों में दब जाता है पूरा मामला?

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